Friday, October 22, 2021
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Tokyo olympics में सिल्वर जीतने वाली Mirabai की कहानी:2016 में एक बार भी सही तरीके से वेट नहीं उठा पाई थी मीराबाई

Tokyo olympics में सिल्वर जीतने वाली Mirabai Was की कहानी: मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक में भारत का पहला पदक जीता है। उन्होंने 49 किग्रा भार वर्ग में कुल 202 किग्रा भार उठाकर रजत पदक जीता। इस तरह देश को 21 साल बाद भारोत्तोलन में ओलंपिक पदक मिला है।

Tokyo olympics में सिल्वर जीतने वाली Mirabai Was की कहानी

इससे पहले कर्णम मल्लेश्वरी ने 2000 सिडनी ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। मीराबाई की सफलता इस मायने में खास हो जाती है कि वह 2016 के रियो ओलंपिक में अपने किसी भी प्रयास में ठीक से वजन नहीं उठा सकीं। उसके सभी प्रयास अयोग्य घोषित कर दिए गए। Tokyo olympics में सिल्वर जीतने वाली Mirabai Was की कहानी

ओलिंपिक में जाने से पहले मीराबाई ने भास्कर से कहा था कि मैं तोक्यो ओलंपिक में मेडल जरूर जीतूंगी। क्योंकि मुझे ओलंपिक में खेलने का अनुभव है। मैं अपने पहले ओलंपिक में पदक जीतने से चूक गया। तब अनुभव की कमी के कारण मैं पदक नहीं जीत पाया था। Tokyo olympics में सिल्वर जीतने वाली Mirabai Was की कहानी

मीराबाई ने बनाया विश्व रिकॉर्ड


इस साल अप्रैल में आयोजित ताशकंद एशियाई भारोत्तोलन चैंपियनशिप में मीराबाई चानू ने स्नैच में 86 किलोग्राम भार उठाकर क्लीन एंड जर्क में 119 किलोग्राम का विश्व रिकॉर्ड बनाया था। वह कुल 205 किग्रा के साथ तीसरे स्थान पर रही। इससे पहले क्लीन एंड जर्क में वर्ल्ड रिकॉर्ड 118 किलो का था। 49 किग्रा में चानू का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कुल 203 किग्रा (88 किग्रा और 115 किग्रा) था, जो उन्होंने पिछले साल फरवरी में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में बनाया था।

11 साल की उम्र में वेटलिफ्टिंग में पहला मेडल जीता था


मीराबाई मणिपुर के इंफाल की रहने वाली हैं। उन्होंने स्थानीय भारोत्तोलन टूर्नामेंट में 11 साल की उम्र में भारोत्तोलन में अपना पहला स्वर्ण जीता। उन्होंने विश्व और जूनियर एशियाई चैंपियनशिप के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने भारोत्तोलन करियर की शुरुआत की। वह कुंजारानी देवी को अपना आदर्श मानती हैं। Tokyo olympics में सिल्वर जीतने वाली Mirabai Was की कहानी

विश्व भारोत्तोलन चैम्पियनशिप में पदक जीतने वाले पहले भारतीय


मीराबाई विश्व भारोत्तोलन चैम्पियनशिप में पदक जीतने वाली पहली भारतीय भारोत्तोलक हैं। उन्होंने यह उपलब्धि 2017 (49 किग्रा भार वर्ग) में हासिल की थी। उन्होंने 2014 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में 49 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीता था। मीराबाई ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था।

चोट के बाद 2019 में शानदार वापसी


मीराबाई को 2018 में पीठ दर्द से जूझना पड़ा था। हालांकि, इसके बाद उन्होंने 2019 थाईलैंड वर्ल्ड चैंपियनशिप से वापसी की और चौथे स्थान पर रहीं। फिर उन्होंने पहली बार 200 किलो से ज्यादा वजन उठाया। चानू का कहना है कि उस समय भारत सरकार को पूरा सहयोग मिला था। मुझे इलाज के लिए अमेरिका भेजा गया था। उसके बाद मैंने न सिर्फ वापसी की, बल्कि अपने करियर का सबसे ज्यादा वजन उठाने में भी कामयाब रही।

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