जनरल विपिन रावत और मधुलिका रावत के अमर प्रेम कहानी.. Love story

जनरल विपिन रावत और मधुलिका रावत के अमर प्रेम कहानी : एक हादसा देश को गहरे जख्म दे गया, नियति ने क्रूर अन्याय किया है, एक हादसे ने देश के पहले cds जनरल विपिन Rawat और उनकी पत्नी को छीन लिया। आज हम आपको बताए गे जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) और उनकी पत्नी Madhulika Rawat (मधुलिका रावत) प्रेम कहानी (love story)। लेकिन उस पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) के बारे में कुछ खास बाते बताएगे । उनका परिवार कई पीढ़ियों से देश की सेवा कर रहा है। बिपिन रावत ने देहरादून और शिमला से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। जिसके बाद बिपिन रावत एनडीए और आईएमए देहरादून से सेना में एंट्री ली थी।बिपिन रावत (Bipin Rawat) ने आईएमए में सर्वश्रेष्ठ स्वार्ड ऑनर से सम्मानित रहे। इसके साथ ही उन्होंने मेरठ यूनिवर्सिटी से मिलिट्री-मीडिया स्ट्रैटेजिक स्टडीज में पीएचडी भी की थी। यानी आप जनरल विपिन रावत को डाक्टर विपिन रावत भी कह सकते है। बिपिन रावत ने साल 1978 में आर्मी की 11वीं गोरखा रायफल की पांचवीं बटालियन से अपने करियर की शुरुआत की थी। बिपिन रावत (Bipin Rawat) के पिता लक्ष्मण सिंह लेफ्टिनेंट जनरल के पद से रिटायर हो चुके हैं। बिपिन रावत और मधुलिका रावत की 2 बेटियां कृतिका और तारिणी हैं जो मां और पिता की मौत के बाद अकेली हो गई हैं।

जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत की अंतिम विदाई में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। उनकी दिलेरी से तो हर कोई वाकिफ है। जिसने दुश्मनों के इरादों को पस्त कर दिया। लेकिन आज हम आपको उस प्रेम कहानी बताने जा रहे है। जो शादी के सात फेरों से लेकर दुनिया से विदा लेते समय तक साथ रहे।

दोनों की शादी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है। हैरानी वाली बात तो ये रही कि उनकी पत्नी का जन्म जहां हुआ, उनकी शादी भी वही हुई। इस किस्से का खुलासा तब हुआ, जब मधुलिका रावत के भाई ने दोनों की लव स्टोरी के बारे में बताया। मधुलिका रावत के भाई यशवर्धन सिंह ने कहा कि किस्मत ने उन्हें मिलाया है। उन्होंने कहा, बिपिन रावत के पिता (लक्ष्मण सिंह रावत) ने उनकी बहन का हाथ अपने बेटे (Bipin Rawat) के लिए मांगा था। जनरल रावत के पिता भी सेना में अधिकारी थे। उन्होंने उनके पिता
दिवंगत मृगेंद्र सिंह को पत्र लिखकर शादी की बातचीत की।

यशवर्धन सिंह ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में आगे कहा कि उनका परिवार मध्य प्रदेश में शहडोल जिले के सुहागपुर का रहने वाला है। लेकिन हमारे नानाजी का परिवार लखनऊ का रहने वाला है और उनकी बहन का जन्म वहीं हुआ था। ऐसे में उनका जन्म स्थान भी ’25, अशोक मार्ग’ है और उनकी शादी भी दिल्ली में ’25, अशोक मार्ग’ में हुई। उन्होंने कहा, ये एक सुखद संयोग था। दोनों अपनी ज़िंदगी खुशहाली से बिता रहे थे। लेकिन क्रैश में दोनों उन्हें छोड़कर चले गए। लेकिन उनका साथ ज़िंदगी के अंतिम वक्त तक नहीं छूटा। दोनों को एक ही चिता पर मुखाग्नि दी गई। बिपिन रावत और मधुलिका रावत (Madhulika Rawat) का साथ ज़िंदगी भर के सफर के साथ-साथ अंतिम समय पर भी बना रहा।

जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) और उनकी पत्नी मधुलिका रावत (Madhulika Rawat) की अंतिम यात्रा उनके आधिकारिक आवास से शुरु हुई थी। उनकी इस अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’ और ‘जनरल रावत अमर रहें’ जैसे कई नारे लगाए। जनरल की अंतिम यात्रा में आम लोग जहां उनपर पुष्प बरसाते नज़र आए। वहीं वाहन में बैठे लोग वाहन से उतरकर उन्हें सैल्यूट कर रहे थे। जिसे देखकर लोगों की आंखें नम हो गई। इस तरह लोगों ने देश के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत को विदाई दी।

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