the kashmir files: 1990 कश्मीरी पंडितो के पलायन का जिम्मेदार भाजपा।।।

फिल्म the kashmir files ने इतिहास के पन्नो के वो दर्द बयाँ कर दिया जिस से आज के पीढ़ी अनजान थे। वैसे हमसे ये सच पिछले कई सालो से छुपाया गया था। लेकिन कुछ सोशल मीडिया के पोस्ट जरिए ये दावा किया जा रहा है कि कश्मीर पंडितो के पलायन जिम्मेदार भाजपा है। ये सच है कि उस समय भाजपा (BJP) की सरकार था। किंतु आपको सोशल मीडिया के जरिए आधा सच बताया जा रहा है। हम आज आपको पुरा सच बताएगे।

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फिल्म the kashmir files ने इतिहास के पन्नो के वो दर्द बयाँ कर दिया जिस से आज के पीढ़ी अनजान थे। वैसे हमसे ये सच पिछले कई सालो से छुपाया गया था। लेकिन कुछ सोशल मीडिया के पोस्ट जरिए ये दावा किया जा रहा है कि कश्मीर पंडितो के पलायन जिम्मेदार भाजपा है। ये सच है कि उस समय भाजपा (BJP) की सरकार था। किंतु आपको सोशल मीडिया के जरिए आधा सच बताया जा रहा है। हम आज आपको पुरा सच बताएगे।the kashmir files

1982 के कहानी

असल में कश्मीर पंडितो के पलायन 1990 से शुरू नहीं होती बल्कि कि ये कहानी 1982 से शुरू होती है। तब देश के प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी। साल 1982 के दौरान श्रीनगर में कश्मीर पंडितों के विरुद्ध नफरत का माहौल पैदा किया जा रहा था। Jammu Kashmir Liberation Front (jklf ) नाम का आंतकवादी संगठन कश्मीर के आम मुसलमानों के दिमाग में ये जहर भर रहा था। the kashmir files

कि जब तक कश्मीरी पंडित कश्मीर से नहीं जाएंगे। तब तक उन्हें उनका हक और नौकरियां नहीं मिलेंगी। ये उस वक्त की बात है, जब देश में इंदिरा गांधी की सरकार थी और जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री Jammu & Kashmir National Conference (जम्मू और कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस) के नेता Farooq Abdullah (फारूक अब्दुल्ला) थे।

कश्मीर में 1984 में भी दंगे हुए

कश्मीरी पंडितों के विरुद्ध धीरे धीरे नफरत इतनी बढ़ गई कि 3 फरवरी 1984 को ब्रिटेन में भारत के राजनयिक रविंद्र महात्रे को JKLF के आतंकवादियों ने अगवा कर लिया।और वो JKLF के संस्थापक और आतंकवादी मकबूल भट्ट की रिहाई की मांग करने लगे। जब ये मांग पूरी नहीं हुई तो आतंकवादियों ने रविंद्र महात्रे की हत्या कर दी। और बाद में 11 फरवरी 1984 को मकबूल भट्ट को भी दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई। इससे कश्मीर में दंगे शुरू हो गए और कश्मीरी पंडितों के घरों को निशाना बनाए जाने लगा। ये सबकुछ उस समय हुआ था जब देश में इंदिरा गांधी की सरकार थी। कश्मीर में 1984 हुए दंगे के समय इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं।

जगमोहन किसके करीबी थे?

कुछ लोग दावे कर रहे है कि जगमोहन मल्होत्रा जो कि भाजपा के नेता थे। उन्ही राजपाल रहते कश्मीर में दंगे हुए ? अब हम सच बताते में वास्तव में इंदिरा गांधी जम्मू कश्मीर में फारुख अब्बदुल्लाह की सरकार गिरा कर, गुलाम मोहम्मद शाह को मुख्यमंत्री बनाना चाहती थीं। the kashmir files

इसीलिए उन्होंने अप्रैल 1984 को जगमोहन मल्होत्रा को जम्मू कश्मीर का राज्यपाल बना कर भेजा। अर्थात जो लोग ये कह रहे हैं कि उस समय जगमोहन BJP में थे, ये बात पुरी तरह से गलत है। जगमोहन, इंदिरा गांधी के करीबी थे और उन्होंने उनके कहने पर ही गुलाम मोहम्मद शाह की सरकार का गठन करवा दिया था।the kashmir files

मंदिर तोड़ मस्जिद बनाने के दिए थे आदेश

कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री गुलाम मोहम्मद शाह हैं। जिन्हें 1986 में कश्मीरी पंडितों के विरुद्ध हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार माना जाता है।उस वक्त जम्मू के New Civil Secretariat Area में मुसलमान कर्मचारी नमाज पढ़ने की डिमांट कर रहे थे। उसके लिए वो वहां बने एक प्राचीन मन्दिर को तुड़वाना चाहते थे।ये बात जैसे ही गुलाम मोहम्मद शाह को मालूम पड़ा उन्होंने मन्दिर को तोड़ कर मस्जिद बनाने का आदेश दे दिया। जिससे तनाव बढ़ गया और दक्षिण कश्मीर के क्षेत्रो में विरोध करने वाले कश्मीरी पंडितों के घर जला दिए गए।

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साल 1989 से बिगड़ने लगे स्थिती

साल 1989 में जब कश्मीर के स्थिती काफी बिगड़ गए और कश्मीरी पंडितों की हत्या की जाने लगीं। तब भी राजीव गांधी का ध्यान कश्मीर पर नहीं गया बल्कि वो उस वक्त के लोकसभा चुनाव में व्यस्त थे। वो किसी भी तरह सरकार बनाने के बारे में सोच रहे थे। जबकि कश्मीर में स्थिती बिगड़ते जा रही थी । जम्मू कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन ने उस समय राजीव गांधी को दो चिट्ठियां लिखी थीं।जिसका जिक्र उन्होंने अपनी पुस्तक, My Frozen Trubulence In Kashmir में किया है।the kashmir files

राज्यपाल जगमोहन ने लिखी चिठ्ठीपीएम राजीव गांधी

8 अप्रैल 1989 को उन्होंने अपनी पहली चिट्ठी में कहा था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्लाह ने कश्मीर को उसके हालात पर छोड़ दिया है। इस चिट्ठी के आखिर में वो ये भी लिखते हैं कि अगर राजीव गांधी ने आज कोई कदम नहीं उठाया तो बहुत देर हो जाएगी और बाद में ऐसा ही हुआ।राजीव गांधी ने इस चिट्ठी को गम्भीरता से नहीं लिया। जगमोहन ने इसके एक महीने बाद 14 मई 1989 को उन्हें एक और चिट्ठी लिखी और कश्मीर के तनावपूर्ण स्थिती के बारे में विस्तृत रूप से बताया। लेकिन तब भी राजीव गांधी इस पर मौन रहे यही मौन पुरा कश्मीर पर भारी पड़ जाएगा।the kashmir files

जब राजीव गांधी कश्मीर के स्थिती को नजरअंदाज कर रहे थे। उसी वक्त जुलाई 1989 को जगमोहन का राज्यपाल के तौर पर पांच साल का कार्यकाल पुर्ण हो गया है।और वो जम्मू कश्मीर से दिल्ली लौट आए। उसके बाद कश्मीर में कश्मीरी पंडितों पर जुल्म का सिलसिला शुरू हो गया। 14 सितंबर 1989 को कट्टरपंथी जेहादियों ने पंडित टीका लाल टपलू की खुलेआम हत्या कर दी। ये कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से भगाने के लिए की गई पहली हत्या थी। उस वक्त कश्मीर के राज्यपाल जगमोहन नहीं थे। बल्कि उनकी स्थान पर K. V. Krishna Rao कार्यभाल सम्भाल चुके थे। तब देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे और जम्मू कश्मीर में फारुख अब्दुल्लाह की सरकार थी।the kashmir files

19 जनवरी 1990 को पंडितों से कश्मीर छोड़ने के लिए कहा

सितंबर से जनवरी के बीच कई कश्मीरी पंडितों की हत्याएं हुई। फिर आई वो तारीख यानी 19 जनवरी 1990 की रात कश्मीरी पंडितों को कश्मीर छोड़ने के लिए कह दिया गया। लेकिन इसी दिन दो और बड़ी घटनाएं हुई थीं।पहली घटना ये थी कि, श्रीनगर में कश्मीरी पंडितों का कत्ले-आम शुरू होने से पहले फारुख अब्दुल्लाह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन देश में आज तक किसी ने उनसे ये प्रश्न नहीं पूछा कि आखिर उनके इस्तीफे के बाद कश्मीरी पंडितों पर संगठित तरीके से हमले कैसे हुए? क्या उन्हें इसकी जानकारी पहले से हो गई थी। दूसरी बात जनवरी 1989 में ही फारुख अब्दुल्लाह London चले गए थे। और ऐसा बताया जाता है कि जब कश्मीर जल रहा था, वो London में Glof खेल रहे थे।the kashmir files

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जगमोहन को 19 जनवरी को ही बनाया गया था राज्यपाल

दूसरी बात इसी दिन जगमोहन को फिर से जम्मू कश्मीर का राज्यपाल बना कर वहां भेज दिया गया था।अब सोचने वाली बात है कि इन दंगों की पृष्ठभूमि पिछले 10 सालो से तैयार हो रही थी। जब इंदिरा गांधी और राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे। लेकिन कांग्रेस के अनुसार इस नरसंहार के लिए जिम्मेदार वो नहीं हैं, बल्कि इसके लिए जिम्मेदार जगमोहन हैं, जिन्हें 19 जनवरी को ही दंगों वाले दिन फिर से राज्यपाल बनाया गया था। the kashmir files

और वी.पी. सिंह की वो इसके लिए सरकार जिम्मेदार है। जो दंगों से एक महीने पहले ही दिसम्बर 1989 में बनी थी।वैसे दौर में कांग्रेस और जम्मू कश्मीर के नेताओं के लिए एक बात काफी कही जाती थी कि इन पार्टियों के नेता श्रीनगर में साम्प्रदायिक होते हैं। जम्मू में Communist होते हैं और दिल्ली में आते ही ये धर्मनिरपेक्ष हो जाते हैं।और अगर आज के विपक्ष को देखे तो इस स्थिती में कोई बदलाव नहीं हुआ है।the kashmir files

क्या जगमोहन भाजपा के थे ??

सबसे पहले स्पष्ट रूप से आपको बता दे कि जगमोहन साल 1994 के बाद भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले वो राज्यपाल थे और कांग्रेस का हिस्सा हुआ करते थे।

कश्मीर का मुद्दा समझ नहीं आता’

जगमोहन अपनी इस book में कई चौकाने वाला खुलासा भी किए। इसमें देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु की भी कुछ चिट्ठियों का जिक्र करते हैं। जो उन्होंने 1950 के दशक में लिखी थीं। इन चिट्ठियों में नेहरु लिखते हैं कि जब बाकी मुद्दों की बात आती है तो उनका पक्ष स्पष्ट होता है।लेकिन जब बात कश्मीर की आती है, तो उन्हें समझ ही नहीं आता कि उन्हें क्या करना चाहिए और उनका पक्ष क्या होना चाहिए।the kashmir files

नेहरु ये बात वर्ष 1952 में उस वक्त के जम्मू & कश्मीर के मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्लाह को लिखते हैं। इस विषय को गंभीरता से सोचिए कि नेहरू प्रधानमंत्री रहते हुए कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में गया। इस पर पाकिस्तान के साथ युद्ध, एक तिहाई कश्मीर पर पाकिस्तान का कब्जा हो गया और अनुच्छेद 370 लागू किया गया। ये सबकुछ नेहरु के समय हुआ। लेकिन नेहरु कहते हैं कि उन्हें कश्मीर का मुद्दा समझ में ही नहीं आता है । इससे आप सकते है कि आजतक हम pok दुबारा क्यों हासिल नहीं पाए।the kashmir files

खैर The Kashmir Files मुवी दशकों के बाद ऐसा हुआ है।जब एक फिल्म, जिसमें बड़ी Starcast नहीं है, कोई बड़ा बजट नहीं है।इसे किसी बड़े फिल्म निर्माता और निर्देशक ने भी नहीं बनाया था। और ना ही इस फिल्म के पीछे कोई बहुत बड़ा प्रोडक्शन हाउस है।इसकी कोई पब्लिसिटी और Marketing भी नहीं हुई है। the kashmir files

लेकिन इसके बाद भी ये फिल्म एक बहुत बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई है।अब तक ये फिल्म 106 करोड़ ज्यादा रुपये कमा चुकी है।इससे मालूम चलता है कि अगर Content बेहतर हो, और अगर वो दिल को छू जाए तो उसे कोई भी नहीं रोक पाएगा।खैर कश्मीर पर इसी se तरह सच्ची कहानी आपके लिए लाते रहेंगे। बने रहिए हमारे साथ the kashmir files

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