Super exclusive:कश्मीर में लगातार हो रहे आंतकी हमले से लोगो के जेहन ताजा हो रहे 1990 के दौर काला अध्याय

हाल के दिनो में घाटी में कई आंतकी हमले की खबरे आ रही है। घाटी के मौजुदा परिस्थिती को देखकर आम लोगो को जेहन में फिर से 1990 के वो यादे ताजा होनी लगी। जो कश्मीर घाटी का काला अध्याय था। वो याद आने लगा। जब इसी तरह के टारगेट किलिंग तहत कश्मीर के अल्पसंख्यक हिन्दू और सिख को निशाने बनाया जाता था। आज फिर से लोगो आँखो सामने वही भय दिखने लगा। जो आज से 31 साल पहले इसी कश्मीर घाटी ने देखा था। नया कश्मीर के आज दौर के पिढ़ी भले ही 1990 के दौर मौजुद नहीं थे। लेकिन इतिहास पन्नो दर्ज वो काला अध्याय जरूर पढ़ा होगा । जब महजबी नफरत आग में पुरा कश्मीर जल रहा था। Kashmiri Pandit (कश्मीरी पंडित) समझ नहीं आ रहा था , कि कौन उनके पड़ोसी है और कौन आंतकवादी है। सब एक जैसे ही लग रहे थे। मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगाकर कहा जाने लगा कि Kashmiri Pandit (कश्मीरी पंडित) यहां से चले जाएं, नहीं तो बुरा होगा. इसके बाद लोग लगातार हत्यायें औऱ रेप करने लगे. कहते कि पंडितो, यहां से भाग जाओ, पर अपनी औ•••तो को यहीं छोड़ जा।

Kashmiri Pandit

क्या 1990 से 2021 तक कुछ नहीं बदला

मौजुदा परिस्थिती देंखे तो क्या 1990 से 2021 में कुछ नहीं बदला। 1990 में भी कश्मीर अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं और आज भी नहीं। बस इतना बदला है कि अब कश्मीर के किसी मस्जिद से ये आवाज नहीं आ रही है। कि हिन्दूओ कश्मीर खाली करो। किंतु मौजुदा परिस्थिती वैसी लग रही है। बस आंतकवादी समर्थन करने वाले लोग कलतक मस्जिदों में लाउडस्पीकर ऐलान करवाते थे। आज वो अंदरग्राउंड होकर धोखे से वार करते है। क्योंकि उन लोगो को भी मालूम है कि ये नया भारत ये अपने दुश्मनो को छोड़ता नहीं है। इस नये कश्मीर में पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई लाख कोशिश कर ले,फिर से नब्बे के दशक जैसी हालात पैदा होने नहीं देंगे। यही नये भारत व नये कश्मीर के सौगंध है।

कश्मीर समस्या जड़ वहाबी विचारधारा

कश्मीर समस्या का जड़ पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई तो है ही साथ में वहाबी इस्लाम के विचारधारा इसके जड़ है। आईए जानते हैं कि वहाबी इस्लाम क्या है?? वहाबी इस्लाम को माने वाले मुसलमान दुसरो मुशरिक’ याने काफिर और उन्हें मारना जायज है। इस शब्द अर्थ यही है कि जिहाद सिर्फ दुसरे धर्म मानने वालों के ही विरुद्ध नहीं बल्कि उन सभी मुसलमानों के भी खिलाफ है जो सुन्नी और वहाबी से इतर मुस्लिम संप्रदाय (शिया आदि) हैं। आज दौर में आप जितने इस्लामिक आंतकवादी संगठन देखा होगा वो सब इसी वहाबी विचारधारा से आते है , जिनका उद्देश्य पुरे विश्व में इस्लाम के राज स्थापित करना है। खैर किसी और लेख में गंभीर विषय पर विश्लेषण करेंगे । आज हम मौजुदा परिस्थिती रहते है , और जानते हैं कि सरकार आगे क्या कदम उठा सकती है।

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