Friday, October 22, 2021
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शरिया कानून आड़ में महिलाओ से इस्लामिक मुल्को में सबसे ज्यादा जुल्म।।। 20 साल बाद भी नहीं बदला तालिबान ..

अफगानिस्तान में 20 साल तक चली लड़ाई का अंत हुआ। आखिर ये लड़ाई तालिबान की जीत हुई. लेकिन हार गई अफगानिस्तान के 1.50 करोड़ महिलाए। हार गई वो लड़किया जो कलतक सपने देखती कुछ बने का. हार गई वो बच्चीया जो स्कूल जाने के उम्र में तालिबान की लड़ाको के सेक्स स्लेव बना पड़ा।

सुपर पावर अमेरिका का ढोंग

कहने को अमेरिका स्वयं को सुपर पावर कहता है । परंतु अमेरिका ने अफगानी लोगो को मरते हुए छोड़ चला गया। ठीक वैसे जैसे आज से कई साल पहले Saigon को छोड़ भागा था। इतिहास गवाह है , कि अमेरिका ने एक भी लड़ाई जीता नहीं है। अमेरिका ने हर बार इसी तरह भागा है।

शरिया कानून नाम पर इस्लामिक मुल्को में सबसे ज्यादा जुल्म महिलाओ पर किया जाता है। जिसकी उदाहरण के तौर पर आप अफगानिस्तान से आ रही है। उन विडियो या तस्वीरे रूप देख पा रहे है। तालिबानी के आने के बाद अफगानिस्तान के महिलाओ की हालात बहुत ही दयनीय हो चुकी है।

शरिया कानून आड़ में लड़कियो को स्कूल जाने से रोका जाता है

इस्लामिक मुल्को में शरिया कानून नाम लड़कियो स्कूल जाने रोका जाता है। यहाँ तक की पढ़ने के उम्र में शादी या फिर सेक्स स्लेव बना लिया जाता है। दुर्भाग्य बात है कि दुनिया भर के मानव अधिकार के चैम्पियन कहने जाने वाले देश और संगठन इस विषय पर मौन हो जाते है। मुझे अचानक ही किसी के लिखे कविता याद रहा जिसके शब्द थे-

विश्व भर में मानवता हुई मौन
जटिल प्रश्नों के उत्तर दे कौन ….!!!!

आज के समय में ये बात बिल्कुल सटीक बैठती , जब आज पुरा विश्व के मानवता हुई मौन हुई , ना जाने ये जटिल प्रश्नों के उत्तर दे ???? कौन देंगा।

इस्लामिक मुल्को में शरिया कानून आड़ में महिलाओ पर जुल्म

इस्लामिक मुल्को में शरिया कानून के आड़ में सबसे ज्यादा जुल्म महिलाओ पर होता है। आज 21 सदी में दुनिया भर में समाज में महिला और पुरूष के बीच का भेदवाद समाप्त और equality बात हो रही है। लेकिन अजीब विडबंना है कि आज भी इस्लामिक मुल्क रूढ़िवादी सोच को बढ़ावा दिया जाता है।

शरिया कानून आड़ में महिलाओ को घर से बाहर नौकरी करने और अकेले घर से निकले से रोका जाता

शरिया कानून आड़ में महिलाओ को घर से बाहर निकलकर नौकरी करने और अकेले घर से निकलने से रोका जाता है। भले ही तालिबान लाख दावे करे वो अब 21 सदी के सोच वाला तालिबान परंतु कड़वी सच्चाई यही है कि तालिबान नहीं बदला है। बल्कि तालिबान वही है जो पहले था।

तालिबान दुनिया भर में अपने छवि सुधारने के लिए ये दावा कर रहा था कि अफगानिस्‍तान में महिलाओं को समान अधिकार दिया जाएगा। लेकिन तालिबान का असली रंग कुछ ही घंटो में आना शुरू हो गया है। नवभारतटाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान के टीवी चैनल कई महिला रिपोर्टर नौकरी निकाल दिया गया है। इसमें कुछ महिला रिपोर्टर के interview दिया है।

अफगानिस्तान के महिला रिपोर्टर के interview

अफगानिस्तान के महिला रिपोर्टर के interview क्या कहा ये बताने से पहले हम आपको आज की कुछ बड़ी खबरे बताते है। सरकारी टीवी चैनल की एंकर खादिजा अमीन को बर्खास्‍त कर दिया है। उनकी स्थान पर एक पुरुष तालिबानी एंकर को बैठाया गया है।वहीं कुछ महिला एंकर ने interview भी दिया है। आईए आज वही बताते है। महिला एंकर शबनम दावरान ने कहा कि हिजाब पहनने और आईडी कार्ड लाने के बाद भी उन्‍हें ऑफिस में घुसने नहीं दिया गया। शबनम ने आगे बताया कि अब तालिबान राज आ गया है और उन्‍हें घर जाना होगा। तालिबान राज आने के बाद अफगानिस्‍तान में महिलाएं अपने घरों में कैद होकर रह गई हैं। उन्‍हें न केवल अपने जीवन का डर सता रहा है बल्कि उनका भविष्‍य भी अब संकट में आ गया है। मंगलवार को सुबह प्राइवेट टीवी चैनल टोलो की महिला एंकर बेहेश्‍टा अर्घंद ने तालिबान के मीडिया विंग से जुड़े मावलावी अब्‍दुलहक हेमाद से इंटरव्‍यू लिया था।

महिला एंकर ने तालिबानी अधिकारी से घर-घर की जा रही तलाशी के बारे में सवाल पूछे थे। इस वक्त मावलावी ने कहा कि अब पूरी दुनिया तालिबान को मानती है कि वे देश के असली शासक हैं। मुझे अभी भी हैरानी हो रही है कि लोग अभी तालिबान से डरे हुए हैं।इस पूरे इंटरव्‍यू की काफी प्रसन्नता हुई। लेकिन कुछ घंटे बाद ही तालिबान ने अपना असली रंग दिखा दिया। खादिजा अमीन को रोते हुए कहा कि तालिबान ने उन्‍हें और अन्‍य महिला कर्मचारियों को हमेशा के लिए नौकरी से निकाल दिया है।

28 साल की अमीन ने कहा मैं एक पत्रकार हूं और मुझे काम करने नहीं दिया जा रहा है। अब मैं आगे क्‍या करूंगी। अगली पीढ़ी के लिए कुछ भी नहीं है। हमने पिछले 20 साल में जो कुछ भी हासिल किया है, वह सब खो दिया है । तालिबान जैसा पहले था वैसा ही अभी भी तालिबान हैं। उनके अंदर कोई परिवर्तन नहीं हुआ है ।

इन महिला पत्रकारों की कहानी ने यह बता दिया है कि अफगानिस्‍तान की महिलाएं अनिश्चितता और गहरी निराशा के दौर से गुजर रही है और तालिबान आज 21 में सदी में भी रूढ़िवादी सोच चल रही है। तालिबान विश्व के शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

लेखक राजनीति के जानकार – shashi Kant yadav

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