Sunday, November 28, 2021
HomePoliticspopulation control law in india: जानिए जनसंख्या नियंत्रण कानून पर...

population control law in india: जानिए जनसंख्या नियंत्रण कानून पर केंद्र सरकार का जवाब और जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम , क्या भारत 2050 में बन जाएगा इस्लामिक राष्ट्र ..

 

वर्तमान परिस्थिती देश सामने सबसे विकट समस्या है, देश की लगातार ही बढ़ रही आबादी। कुछ समय पूर्व ही मेरी website Shashiblog.in एक mobile एप्लिकेशन साथ मिलकर देश भर में जनता के राय को जाने के लिए online सर्वे करवाए जिसमें हजारो संख्या लोग जुड़े थे। उसमें 99 प्रतिशत जनता का मानना था कि जनसंख्या कानून बन जाना चाहिए। जबकि केवल एक प्रतिशत लोगो कहना कि वो जनसंख्या नियंत्रण कानून पक्ष में नही है। जो जनसंख्या कानून प्रक्ष नही उन लोगो का मानना है कि   हमारा देश लोकतांत्रिक देश है , चीन तरह तानाशाली नही है। आज में उसका उत्तर दुंगा , हमारे सविधान के ही सातवीं अनुसूची में जनसंख्या नियंत्रण परिवार नियोजन के प्रावधान है। हम आज के इस लेख ये बताए गे कि  जनसंख्या नियंत्रण से संबंधित एक जनहित याचिका का जवाब में देते हुए केंद्र सरकार क्या कहा है। वो भी हम आपको बताएगे उस पहले यही कहेंगे कि इस ब्लॉक पुरा जरूर पढ़े।  

जनसंख्या वृद्धि वजह से सापेक्ष शब्द है

जनसंख्या वृद्धि वजह से एक सापेक्ष शब्द है। देश में उत्पादित खाद्यान्नों या उपलब्ध संसाधनों के परिप्रेक्ष्य में अधिक तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या आर्थिक वृद्धि दर और सामाजिक संतुलन दोनों को नकारात्मक ढंग से प्रभावित करती है। वस्तुत: स्वास्थ्य संबंधी प्रगति दर के कारण घटती मृत्यु दर और स्थायी जन्म दर इस विसंगति के मूल में स्थित है। यद्यपि मानव संसाधन किसी भी देश की प्रगति के लिये आवश्यक है तथापि इसमें कमी या वृद्धि से उस देश का विकास प्रभावित हो जाता है।   

भारत में बेरोजगारी , अपराध , गरीबी , भुखमरी , ट्रैफिक जाम और अस्पताल में स्वस्थ व्यवस्था की कमी बड़ी वजह जन जनसंख्या वृद्धि है। भारत अधिकतर समस्या का जड़ जनसंख्या वृद्धि है। अगर इसे आसान शब्दो में समझे तो अगर किसी परिवार 8 से 12 सदस्य है तो अक्सर ही देखा जाता है कि उस परिवार गरीबी अधिक होती है। वही कोई छोटा परिवार जिसके सदस्य संख्या 4 होती है तो उसके सामने आर्थिक चुनौती भी आती वो परिवार उस चुनौती से भी विजय हासिल करके। कुछ वर्षो में मिडिल क्लास में आ जाता है। इसलिए कहते है कि छोटा परिवार सुखी परिवार।अक्सर देखा जाता है कि बड़े परिवार में संपत्ति विवाद बड़ी वजह बनती है। संपत्ति बांटवारा खेती योग्य भुमि उस परिवार पास है तो भुमि बहुत छोटा हो जाता है। जिसके वजह से आजीविका जो खेती उसमें कमी होती और कई परिवार में  जमीनो बंटावारा होने के बाद वो खेती नही कर पाते है। ऐसे में अधिकतर लोग गरीबी में ही जीने पड़ मजबुर हो जाते है। इसलिए अगर छोटा परिवार है तो अक्सर ही सुखी परिवार में गिने जाते है।

द वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रोस्पोट्स 2019 रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र की द वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रोस्पोट्स 2019 : हाईलाइट्स नामक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 तक चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2050 तक भारत की कुल आबादी 1.64 बिलियन के आँकड़े को पार कर जाएगी एवं वैश्विक जनसंख्या में 2 बिलियन हो जाएगी। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि इस अवधि में भारत में युवाओं की बड़ी संख्या मौजूद होगी, लेकिन आवश्यक प्राकृतिक संसाधनों के अभाव में इतनी बड़ी आबादी की आधारभूत आवश्यकताओं जैसे- भोजन, आश्रय, चिकित्सा और शिक्षा को पूरा करना भारत के लिये सबसे बड़ी चुनौती होगी। ये विषय भारत के लिए बड़ी चिंता विषय है क्योंकि हमारे कृषि योग्य भुमि लगभग दो प्रतिशत है और पीने योग्य पानी चार प्रतिशत ही है। लेकिन जनसंख्या 20 प्रतिशत है।

भारत जनसंख्या वृद्धि दर में कमी आई

जबकि विगत कुछ वर्षो के आंकड़े दर्शा रहे है। एक समुदाय विशेष छोड़ दे , भारत में जनसंख्या वृद्धि दर कमी आई है।

जनसंख्या नियंत्रण पर कानून केंद्र सरकार का जवाब

जनसंख्या नियंत्रण कानून कई संगठन लगातार ही मांग करे। ओर जनता भी मांग कर रही है जनसंख्या नियंत्रण कानून की।  लेकिन केंद्र सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण से संबंधिक एक जनहित याचिका का जवाब देते हुए कहा कि देश में लोगो विवश नहीं किया जा सकता है। केंद्र इस उत्तर से लोगो में गहरी निराशा हुई है। खासकर उन लोगो में जो लंबे अर्से जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग कर रहे थे।

जनसंख्या नियंत्रण कानून क्या कहती सविधान (population control law in india) 

उल्लेखनीय है कि 1976 में संसद के दोनो सदनों में विस्तृत चर्चा के बाद 42 संविधान की सातवी अनुसूची में जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन का प्रावधान किया गया है। 42 वें संशोधन द्वारा केंद्र और राज्य सरकरों जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने अधिकार दिया गया है। परंतु इस अधिकार का उपयोग आजतक किसी राज्य में नही किया गया है। बाद में जब वर्ष 2000 में जस्टिस वेंकटचलैया की अध्यक्षता में गठित 11 सदस्यीय संविधान समीक्षा आयोग ने अनुच्छेद – 47 ए जोड़ने और जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने का सुझाव दिया था। अनुच्छेद 47 ए उन परिवारों को शिक्षा , रोजगार और कर कटौती में छुट देने की बात करता है। जिनके दो बच्चे है। यह जिन दंपती के बच्चो की संख्या दो से ज्यादा है उन्होंने सरकारी लाभों से भी वंचित करने का प्रस्ताव रखता है। क्या इस सच्चाई मुंह मोड़ा जा सकता है। देश में जिस दर से जनसंख्या बढ़ रही है। चाहे आज उसकी गति धीमी क्यों ना हो। उसके चलते आने वाले कुछ वर्षो में संसाधनों की असंतुलित खफत और बढ़ जाएगी।

स्थानीय लोगो जनसंख्या वृद्धि से क्षेत्रीय असंतुलन

ये बात किसी छिपी नही है कि जबतक भारत में हिन्दू बहुसंख्यक है तभी तक भारत सेक्युलर अर्थात धर्मनिरपेक्ष है। जो लोग सेक्युलर नेता होने दावे करते वो भी जानते हैं कि जिस दिन हिन्दू अल्पसंख्यक हो गया उसी दिन भारत का सदियों धर्मनिरपेक्ष विरासत का अंत हो जाएगा। हिन्दू धर्म ही धर्मनिरपेक्ष सिखाता है , बाकी किसी भी धर्मनिरपेक्ष होना नही सिखाता है। वैसे सेक्युलर शब्द 100 या 150 साल पहले आई होगी लेकिन दुनिया एकमात्र हिंदू धर्म ही जो
सदियों सिखाता है कि तु वसुधैव कुटुम्बकम।।

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित दुःख भाग्भवेत।।

पूरा विश्व एक परिवार है, इसलिए  हमें सारी मानव सभ्यता के साथ  सहजता और सरलता  के साथ रहना चाहिए। वैदिक काल से ही संपूर्ण विश्व को परिवार मानने की विशाल भावना भारतीयता में समाविष्ट हैं। हर भारतीय अपने परिवार के साथ -साथ पूरे वैश्विक समाज के कल्याण की कल्पना के साथ जीवन यापन करता हैं ,हिंदू सनातन धर्म ‘संयुक्त परिवार’ को श्रेष्ठ शिक्षण संस्थान मानता है। किसी हिन्दूओ मंदिर पुजा पाठ दौरान प्रार्थना होता उसमें संपुर्ण जगत कल्याण की बात किया जाता है।

वही बात करे इस्लाम की बियाण्ड बिलीव पुस्तक में विभिन्न देशों के इस्लाम के बारे लिखा – इस्लाम की
उत्पत्ति मुलत: कबीलाई संगठन रूप में हुई है। ये महजब पुरे विश्व तलवार से फैला है और अपने गहरे अन्तर्गुम्फन एकनिष्ट कट्टरता और निर्विवाद संरचना के बल पर बना रहा। उसमें किसी तरह के समायोजन या मध्समार्ग की सम्भावना नही थी। उसकी पुरी संरचना के गुच्छे से किसी को स्वतन्त्र रूप से अलग नहीं किया जा सकता था। इस्लाम का इतिहास जब इस धर्म के पास राजनीतिक शक्ति व सत्ता हो इसके अनुयायी का राज्य पर नियन्त्रण पदधति में तह केवल तभी प्रभावी और उन्नत हो सकता है। जब और जहाँ उन्होंने ऐसा नहीं पाया कि वे शक्ति का केन्द्र नही है। तब वहाँ उन्होंने खुद को असहाय, कठिन व संकटपूर्ण परिस्थितियों में पाया है। सुन्न इस्लाम में धर्मनिरपेक्षता के लिए कोई स्थान नही है। डां मुशीरूल हक ने धर्मनिरपेक्ष भारत इस्लाम में लिखा है कि मुसलमान का विश्वास है कि ईश्वरीय ज्ञान उसे सारी दुनिया फैलाना है तो वह उन लोगों को सम्मान की ढृष्टि से नही देख सकता जिन्हे वह पंथ भ्रष्ट मानता है।

खैर बात जनसंख्या वृद्धि पर कर रहे थे वैसे इस्लाम इतिहास पर फिर कभी चर्चा करेंगे। जहां दक्षिण और पश्चिम भारत में जन्म दर कम है वही उत्तर तथा पुर्वी भारत में बिहार और ओडिसा जैसे राज्यों में अधिक है। सामान्य दिखने वाला क्षेतीय अंतर कई बार संधर्ष की स्थितियों को तब उत्पन्न कर देता है। जब किसी क्षेत्र में कम विकास और अधिक जनसंख्या के चलते वहाँ के लोग दुसरे राज्यों पलायन करते है।

जो देश बहुभाषी और बहुधार्मिक नहीं है वे जनसंख्या वृद्धि दर के मामले में क्षेत्रिय और संसाधन संबंधी विषमताओ को ढृष्टि में रखते है। परंतु जो देश बहुभाषी है। और जहां विभिन्न समुदाय लोग रहते है वँहा जनसंख्या एक संतुलन बनाए रखना जरूरी है। धर्मनिरपेक्षता राष्ट्र में किसी एक धर्म विशेष की जनसंख्या में वृद्धि दर कम है। इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए देश को एक मध्यमार्ग अपनाने की जरूरत है। इसलिए जनसंख्या नियंत्रण कानून विचार करने की जरूरत है , क्योंकि देश भावनाए यही कहती हैं कि देश में एक सख्त जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की अवश्यकता है।

जनसंख्या नियंत्रण के संबंध में हम इंडोनेशिया का सुहातों मॉडल को अपना सकते है। एक इस्लामिक देश होते हुए भी वहां सरकार ने धर्मवलंबियों के विरोध के बावजूद जन जागरण की मुहिम चलाई। महिलाओ तक पैड बनाकर उन्हे कम बच्चे के महत्व को बताने के लिए अथक प्रयास किया। इंडोनेशिया सरकार ने नेशनल फैमिली प्लानिंग को अॉर्डिनेशन बोर्ड बनाया। और उसमें इंडोनेशिया के सबसे बड़े मुस्लिम समुह मोहम्मदियों को शामिल किया। इंडोनेशिया सरकार ने प्रचार – प्रसार अभियान में दुरदराज के गांवो में जाकर घर- घर गर्भनिरोधक गोलियां बांटी। नतीजा इंडोनेशिया 1970 में 5-6 बच्चे थे जो 2010 में 2.6 रह गया है।

अगर सरकारे चाहे तो जनसंख्या वृद्धि रूक सकती है। अगर लोग ऐसे मान रहे तो क्यों चईना तरह सख्त बनाने के बारे सोचना चाहिए। किसी देश वहाँ स्थानीय लोगो जनसंख्या कमी होगी और विदेशी हमलावर आबादी बढ़ेगी तो उस देश सदियों पुरानी संस्कृति  समाप्त होने खतरे बढ़ेगी। अगर किसी देश के संस्कृति समाप्त हो गई उस देश को बर्बाद होने से कोई नही बचा सकता है। जब राष्ट्रहित के लिए यथोचित निर्णय अवश्यक ही नही अपितु अनिवार्य हो जाता है।

लेखक राजनीति जानकार – शशिकांत यादव 

RELATED ARTICLES

Leave a Reply

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments