Pegasus जासूसी कांड के संपुर्ण inside story

Pegasus जासूसी कांड के संपुर्ण inside story आज हम बताएगे। आईए जानते हैं , इसे विस्तार से जानते हैं।

inside story

जानिए जासूसी कांड क्या है ?

आरोप है कि इजरायल की एक कंपनी NSO Group जो कि जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस की सहायता से भारत के कई महत्वपूर्ण लोगों की जासूसी कराई गई। इस सॉफ्टवेयर की सहायता से पहले इन लोगों के मोबाइल फोन हैक किए गए और फिर इन लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी गई। कथित तौर पर जिन लोगों की जासूसी की गई उनमें 40 पत्रकारों, विपक्ष के कुछ नेताओं, केंद्र सरकार के दो मंत्रियों, कानूनी पदों पर बैठे लोगों और कई उद्योगपतियों के नाम शामिल हैं।Pegasus की जासूसी कांड संपुर्ण inside story

इनमें से कुछ नाम हैं- राहुल गांधी, भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैश्नव, राज्य मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी संजय काचरू और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर और इस लिस्ट में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के निजी सचिव का भी नाम है।Pegasus की जासूसी कांड संपुर्ण inside story

सबसे खास बात है कि इस जासूसी कांड के केंद्र में जो लिस्ट है।उसमें 45 देशों के 50 हजार फोन नंबर्स हैं और किसी को नहीं पता कि किसने किसकी जासूसी कराई लेकिन भारत में विपक्ष के नेताओं और पत्रकारों ने अपने आप ही ये अंदाजा लगा चुके है। कि ये जासूसी नरेंद्र मोदी की सरकार ने करवाई है। जबकि पेगासस बनाने वाली कंपनी एनएसओ ग्रुप इससे इनकार कर चुकी है। उसका कहना है ये लिस्ट फेक है और इंटरनेट पर बहुत पहले से उपलब्ध है।Pegasus की जासूसी कांड संपुर्ण inside story

अब हम आपको बताते है कि ये रिपोर्ट कौन से मिडिया तैयार किया है।

दो विदेशी संस्थाओं ने तैयार की रिपोर्ट

ये रिपोर्ट एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) और फॉरबिडन स्टोरीज (Forbidden Stories) नामक दो अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने तैयार की हैह। इनमें से एमनेस्टी इंटरनेशनल पर पिछले कई वर्ष भारत में कानूनों के उल्लंघन और भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे थे। जिसके बाद इस एमनेस्टी इंटरनेशनल के सारे अकाउंट्स फ्रिज कर दिए गए थे। और ये संस्था भारत सरकार पर कई आरोप लगाकर देश से भाग गई थी।वही बात करे फॉरबिडन स्टो​रीज एक चैरिटेबल संस्था है। जो कि ऐसे स्वतंत्र पत्रकारों को प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है। जिनकी जान को सरकार या दुश्मनों से खतरा होता है।इन दोनों संस्थाओं ने मिलकर ये रिपोर्ट बनाई है जिसे भारत के कई मीडिया संस्थानों ने प्रकाशित किया।Pegasus की जासूसी कांड संपुर्ण inside story

सबसे खास बात ये है कि जिन पत्रकारो के जासूसी हुई , उसमें ज्यादातर पत्रकार बेरोजगार हो चुके है। वो अभी web pattern या यूट्यूब (YouTube) चैनल के पत्रकार बन के रह चुके है। भला उनकी जासूसी करवा के सरकार को क्या मिलेगी। आज दौर इन पत्रकारो के इनका प्रभाव न के बराबर है और इनकी विश्नसनीयता भी लगभग शून्य हो चुका है। आपको एक उदाहरण के तौर पर समझाते है , जासूसी कितने पैसे खर्च हुई है । उसके बाद आप तय कीजिए कोई भी सरकार ऐसे बेरोजगार पत्रकार इतने रूपये खर्च करेंगे।Pegasus की जासूसी कांड संपुर्ण inside story

10 लोगों की जासूसी पर 9 करोड़ का खर्च

पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए 10 लोगों की जासूसी करने पर करीब 9 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। अर्थात अगर भारत के 40 पत्रकारों की जासूसी वाली बात सही है। तो इन पर सरकार के 36 करोड़ रुपये खर्च हुए होंगे। गौर करने वाली बात है ये है कि सभी पत्रकार आज की तारीख में बेरोजगार हो चुके या फिर निष्क्रिय हैं। अर्थात इनका प्रभाव न के बराबर है। और इनकी विश्नसनीयता (reliability) भी लगभग शून्य है। अब आप सोचिए इन पर 40-50 करोड़ रुपये कौन खर्च करेगा। इसे आसान शब्दो में समझे कोई भी सरकार किसी के जासूसी तभी करवाए गी जब उन से कुछ हासिल हो। भला इन बेरोजगार पत्रकारो के जासूसी करवा के क्या मिलेगा???Pegasus की जासूसी कांड संपुर्ण inside story

विपक्ष आरोप क्यों संदेह हो रहा

कुछ बातो पर ध्यान दे एक मोबाइल नंबर सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश का बताया गया, वह 2014 का निकला। इस साफ साबित हो जाता है विपक्ष का ये विरोध पुरी तरह बे बुनियाद है।Pegasus की जासूसी कांड संपुर्ण inside story

आइटी मंत्री ने क्या कहा

पेगासस मामले पर आइटी मंत्री का कहना है कि किसी की जासूसी नहीं की गई। और सभी आरोपों को निराधार बताया है। और आइटी मंत्री बताया कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है जो अपने सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार के रूप में निजता के ​अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक (data protection bill) 2019 और सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 को भी पेश किया गया है़। ताकि आपका निजी डाटा की सुरक्षा की जा सके। सरकार का कहना है कि विदेशी अखबार में प्रकाशित खबर आर्टिकल से कुछ भी साबित नहीं होता। वास्तविकता में पेगासस को सरकार के साथ जोड़ने के पहले भी प्रयास हुए हैं जो कि विफल रहे हैं। इसमें कोई संदेह नहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि को खराब करने के लिए राष्ट्र विरोधी ताकतें विदेशी तत्वों से मिलकर षडयंत्र रचते रहते हैं। कुछ महीने पहले ही किसान आंदोलन (kisaan aandolan) Pegasus की जासूसी कांड संपुर्ण inside story

और सीसीए के विरुद्ध आंदोलन को जिस ढंग से अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रचारित किया गया। उसमें प्रधानमंत्री को बदनाम करने की षडयंत्र भी शामिल थी। भला आप ही सोचिए ये रिपोर्ट संसद सत्र शुरू होने से पहले कैसे आया है। वैसे भी PM नरेन्द्र मोदी की सरकार काफी मजबूत है। उसे किसी सहारे की जरूरत नहीं है तो फिर अपनों या दूसरों की जासूसी कराने या फोन हेक कराने का आरोप एक fake news ही है। Pegasus की जासूसी कांड संपुर्ण inside story

पहले यह जानते हैं कि जासूसी के लिए क्या नियम  और सरकारों को फोन टैपिंग का क्या अधिकार है?

सरकार जासूसी नियम बताने से पहले मुझे एक बात याद आ रहा है। जो कि इस देश के पुर्व पीएम मनमोहन सिंह  के कथन है। जिसमें उन्होंने था कि राष्ट्रहित में जासूसी करवाना जायज है। अब हम आपको बताते है कि सरकार ने जासूसी के लिए क्या नियम बनाए है। इसका जवाब है कि हमारे यहां कोई भी सरकार बिना किसी कारण के किसी का भी फोन टैप नहीं करवा सकती है। इंडियन टेलीग्राफ एक्ट(Indian Telegraph Act) 1885 के सेक्शन 5 (2) और इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1951 के रूल 419-A के तहत देश की संप्रभुता और एकता को कायम रखने के लिए सरकार की 10 एजेंसियों को फोन टैपिंग और अन्य तरह की जासूसी का अधिकार है। Pegasus की जासूसी कांड संपुर्ण inside story

अब समझ चुके है कि बिना किसी कारण के सरकार जासूसी नहीं कर सकती है। यानी विपक्ष आरोप बे बुनियाद लगता है। जिन पत्रकारो ने अपने साथ जासूसी बात कही है। वो अब बेरोजगार हो चुके है । उनके जासूसी Modi government को कुछ नहीं मिलने वाला है। ना ही पीएम मोदी इतने कमजोर नेता है जो उन्होंने जासूसी करवाने की अवश्यकता है।Pegasus की जासूसी कांड संपुर्ण inside story

अगर आप भी चाहते हैं कि आपके 

दैनिक भास्कर में छपी RTI रिपोर्ट 

दैनिक भास्कर में छपी RTI रिपोर्ट अनुसार UPA सरकार ने हर महीने 9,000 फोन टैप कराए। 500 ईमेल को इंटरसेप्ट किया। इस आंकड़े साबित होता है कि पूर्ववर्ती सरकारो ने भी जासूसी करवाया है।Pegasus की जासूसी कांड संपुर्ण inside story

इतिहास में कई उदाहरण

अगर आप इतिहास में जाएगे , तो ऐसी कई उदाहरण जब पुर्व की सरकारे ने जासूसी करवाया है। जासूसी कांड के कई आरोपी नेताओ की कुर्सी गई है। जिसके सबसे बड़े उदाहरण पुर्व पीएम चंद्रशेखर है। वैसे भारतीय राजनीति में जासूसी के इतिहास पर किसी और दिन लेख लिखे गे। लेकिन वर्तमान जासूसी कांड में ऐसी कोई ठोस सबुत नहीं मिला है , जिससे हम ये कह सकते है कि जासूसी हुई है।Pegasus की जासूसी कांड संपुर्ण inside story

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