Pok पर Indian army का exclusive प्लान , pm modi दिया हरी झंडी अब pok पर लहराया गा तिरंगा. जाने कब ??

हर कोई जानना चाहता है कि पीओके कब वापस मिलेगा ? आज हम इसी विषय की जानकारी देंगे। आज हम आपको बताए गे कि पीओके भारत में कब शामिल होने जा रहा है। आज हमारे पास super exclusive information है , जिसके आधार पर हम आपको पीओके भारत में शामिल होने के फाइनल तारीख बताए गे।

Jammu and Kashmir

उस पहले हम जानते हैं कश्मीर के इतिहास को और आज ये बताए गे कि कश्मीर के आधा से ज्यादा भाग पाक में कैसे चला गया है। क्योंकि भारत ने तो आजतक कोई युद्ध नहीं हारा है। फिर कैसे कश्मीर का आधा हिस्सा चला गया। सबसे पहले हम आपको बताते है कि जम्मू-कश्मीर के विलय का इतिहास।

जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय संपुर्ण कहानी

जम्मू-कश्मीर की कहानी सैकड़ों साल पुरानी है. इसका गौरवशाली इतिहास इसकी पहचान है। लेकिन 1947 के बाद उस गौरवशाली इतिहास पर आतंक की ऐसी लकीर खींच दी गई कि जिसके वजह से जम्मू-कश्मीर का स्वरूप सदा के लिए बदल गया था। अगर इतिहास में जाईए गा तो जब 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्रता मिली थी। तीन राजाओ ने भारत में विलय नहीं किया था। वो थे जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू कश्मीर के शासकों ने भारत के साथ विलय नहीं किया। भारत ने जूनागढ़ में जनमत संग्रह करवाया, जिस कारण से वहां की जनता ने पाकिस्तान के बजाय भारत के साथ विलय करने का निर्णय लिया।इस तरह से 9 नवंबर 1947 को जूनागढ़ भारत का अहम हिस्सा बना। वहीं सेना की कार्रवाई के बाद 17 सिंतबर 1948 को हैदराबाद का भारत में विलय हो गया। अब आते जम्मू-कश्मीर के कहानी पर आखिर कैसे जम्मू-कश्मीर का विलय भारत में हुआ है।

पाकिस्तान के कबायली लड़ाकों कहानी –

 जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के राजा महाराज ​हरि सिंह के पास दो विकल्प थे। पहला विकल्प अपनी रियासत को भारत में शामिल करें। दुसरा विकल्प पाकिस्तान में। लेकिन यह निर्णय कर पाने में हरि सिंह (Hari Singh) को काफी समय लिया। इसी वक्त पाकिस्तान की तरफ वाले कश्मीरियों मुस्लिम बहुल इलाको ने हरि सिंह के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। उसके बाद पाकिस्तान के षडयंत्र शुरू हुई। पाकिस्तान के कबायली लड़ाकों ने 24 अक्टूबर 1947 को कश्मीर पर आक्रमण कर दिया। अब हरि सिंह ने भारतीय सेना की सहायता मांगी। तत्कालीन गृहनंत्री Vallabhbhai Patel (वल्लभ भाई पटेल) ने हरि सिंह (Hari Singh) को शर्तों पर सहायता देने का भरोसा दिलाया था।

सरदाल पटेल ने क्या शर्तों रखा ??

शर्त के मुताबिक जम्मू-कश्मीर को भारत के राज्य के तौर पर स्वयं को स्वीकार करना था। और भारत को रक्षा, विदेश नीति और संचार जैसे कुछ अधिकार देने थे। हरि सिंह ने इसे मंजूर किया। लेकिन तब तक विद्रोहियों ने एक बड़े हिस्से पर अपना कब्ज़ा कर लिया था। बाद में इस हिस्से को आज़ाद कश्मीर घोषित किया। तबसे ये इलाका आज़ाद कश्मीर या पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) कहलाता है।

370 या फिर 35 ए कश्मीर कैसे मिला

कश्मीर का विलय बाकी राज्यों तरह ही हुई थी। जैसे अन्य राज्यों में एग्रीमेंट पर साइन किए , उसी तरह के एग्रीमेंट कश्मीर के लिए साइन किए गये। जैसा कि आप जानते हैं कि 5 अगस्त 2019 को धारा 370 और 35 ए हटा़या गया था। लेकिन फिर भी मन ये सवाल आता है कि जब कश्मीर का विलय भी अन्य राज्यों के तरह सामान्य हुई थी। तो फिर धारा 370 और 35 ए क्यों दिया था। इसका जवाब बड़ा आसान है। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के शेख अब्दुल्ला से बहुत ही अच्छे दोस्ती थी। इसी दोस्ती चक्कर में 370 और 35 ए दिया गया। पंडित नेहरू ने राष्ट्रहित स्थान दोस्ती को चुना।

अब जानिए कश्मीर के आधा से ज्यादा भाग पाक में कैसे चला गया??

आज जो आप पीओके देखे रहे है , उसके जिम्मेदार केवल भारत़ के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू थे। नेहरूजी ने एक नहीं बल्कि कि कई गलती की है। लम्हों ग़लती की सजा सदियों में भुगतनी पड़ती है?’कुछ ऐसा ही कह सकते है , नेहरूजी का गलतियों का सजा आज का भारत भोग रहा है। 5 अगस्त 2019 को मोदीजी ने नेहरू जी के एक गलती को सुधार दिया। लेकिन सब का प्रश्न यही कि पीओके कब भारत में शामिल होगा । इसका जवाब हम आज देंगे । पीओके वापस भारत में शामिल होने के फाइनल तारीख बताए गे। लेकिन उस पहले हम आपको पीओके बारे बताएगे ।

पीओके के बारे में कुछ खास बाते ??

POK का कुल क्षेत्रफल करीब 13 हजार वर्ग किलोमीटर (km) है। जहां करीब 30 लाख लोग रहते हैं। वैसे तो यह हिस्सा अधिकतर गुमनामी में रहता है लेकिन POK पर सीधे तौर पर पाकिस्तान का दखल है । भारत व पाकिस्तान (ind & pak ) दोनों ही इस हिस्से पर अपने अधिकार क्षेत्र का दावा करते रहे है।और कई बार कई तरह के दावे पेश किए जाते रहे। अब भी ये हिस्सा एक राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। pok कई क्षेत्रो को पाकिस्तान ने चीन को दे दिया है।आईए बताते उन क्षेत्रों नाम ..

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा चीन

  पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी (pok) का एक बड़ा हिस्सा हुनज़ा गिलगिट, शक्सगाम घाटी और रक्साम है। बाल्टिस्तान के क्षेत्रो 1963 में पाकिस्तान ने चीन को सौंपे थे। इस सत्तांतरित क्षेत्रो को ट्रांस काराकोरम कहा जाता है।भारतीय जम्मू-कश्मीर का वह हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहलाया, जिस पर पाकिस्तान ने 1948 में धोखे से कबायली लड़ाकों हमले से हासिल किया है।

1971 में इंदिरा गांधी के POK वापस लेने का अवसर था

1971 के युद्ध में हमारे देश के वीर सैनिको ने केवल 13 दिनो पाकिस्तान को परास्त कर दिया। इंदिरा गांधी के पास अपने पिता के गलती सुधारने का अवसर था। और जम्मू-कश्मीर का समस्या का संपुर्ण सामधान करने का। लेकिन इंदिरा गांधी ने भी वही गलती की जो उनके पिता ने किया। ऐसा हम इसलिए कह रहे क्योंकि उस समय भारत ने 93,000 हजार पाकिस्तानी युद्ध बंधकों के बदले में pok को पाकिस्तान से वापस ले सकता था। लेकिन इंदिरा गांधी ऐसा नहीं किया। वास्तव समझोता के टेबल पर इंदिरा गांधी गुंगी गुड़िया ही साबित हुई है।

अब पीओके हमारा होगा

आज हम आपको pok के वापस मिलने की फाइनल डेट बता रहे है। सुरक्षा कारणो से हम आपको कुछ ही जानकारी देंगे। वैसे भारतीय सेना ने pok को हासिल करने के लिए एक बड़ा प्लान बनाया है। सबसे पहले हम आपको बता दे कि 2024 के चुनाव से पहले पीओके भारत का हिस्सा होगा। पीओके वापस लाने के लिए भारत ने जो प्लान बनाया है। उसके तहत जम्मू-कश्मीर का तेजी विकास करके पीओके आवाम को बताने कि उनका भविष्य भारत के साथ ही बेहतर है। दुसरा विकल्प ये है कि पाकिस्तान अगर कोई आंतकी हमला करता है। उसी वक्त भारत पीओके पर हमला कर देंगा। जैसा कि गृहनंत्री अमित शाह बोले थे कि जब जब मैंने जम्मू-कश्मीर बोला है तब तब इसमें पीओेके और अक्साई चिन भी समाहित हैं। तीसरा जो विकल्प उसके अनुसार भारत 2024 से पहले पाकिस्तान पर एक बड़ा सैन्य कार्रवाई करेंगा। जिसके तहत पुरा पीओके वापस लिया जाएगा। मुझे एक बयान याद रहा है जो कि सेना प्रमुख ने कहा था। जनरल नरवाणे ने साफ कहा है कि संसद चाहे तो गुलाम कश्मीर (पीओके) को वापस लेने के लिए भारतीय सेना तैयार है। संसद के प्रस्ताव के अनुरूप पीओके को वापस लेने का आदेश मिलता है तो सेना कार्रवाई करेगी। इस बयान अर्थ यही है कि सेना किसी वक्त पीओके वापस लेने के लिए तैयार है। जैसे सरकार तरफ से इशारा मिलेगी। सेना फौरन ही एक्शन के लिए तैयार हो जाएगी। इसके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि बात होगी तो केवल पीओके पर होगी। अंत आपको इतना बता दे कि पीओके चंद दिनो में भारत का हिस्सा होगा। जो हमारे पास exclusive रिपोर्ट है , उसके अनुसार बता रहे है।

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