Saturday, October 16, 2021
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Super exclusive:कश्मीर में लगातार हो रहे आंतकी हमले से लोगो के जेहन ताजा हो रहे 1990 के दौर काला अध्याय , और जाने टारगेट किलिंग के पीछे क्या कारण ?

आज कश्मीर में आंतकी हमले में दो शिक्षक हत्या कर दी। पिछले तीन दिन के अंदर में घाटी में पांच आम नागरिक मारे गये। घाटी के मौजुदा परिस्थिती को देखकर आम लोगो को जेहन में फिर से 1990 के वो यादे ताजा होनी लगी। जो कश्मीर घाटी का काला अध्याय था। वो याद आने लगा। जब इसी तरह के टारगेट किलिंग तहत कश्मीर के अल्पसंख्यक हिन्दू और सिख को निशाने बनाया जाता था। आज फिर से लोगो आँखो सामने वही भय दिखने लगा। जो आज से 31 साल पहले इसी कश्मीर घाटी ने देखा था। नया कश्मीर के आज दौर के पिढ़ी भले ही 1990 के दौर मौजुद नहीं थे। लेकिन इतिहास पन्नो दर्ज वो काला अध्याय जरूर पढ़ा होगा । जब महजबी नफरत आग में पुरा कश्मीर जल रहा था। Kashmiri Pandit (कश्मीरी पंडित) समझ नहीं आ रहा था , कि कौन उनके पड़ोसी है और कौन आंतकवादी है। सब एक जैसे ही लग रहे थे। मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगाकर कहा जाने लगा कि Kashmiri Pandit (कश्मीरी पंडित) यहां से चले जाएं, नहीं तो बुरा होगा. इसके बाद लोग लगातार हत्यायें औऱ रेप करने लगे. कहते कि पंडितो, यहां से भाग जाओ, पर अपनी औ•••तो को यहीं छोड़ जा।

Kashmiri Pandit pic credit -amarujala.com

क्या 1990 से 2021 तक कुछ नहीं बदला

मौजुदा परिस्थिती देंखे तो क्या 1990 से 2021 में कुछ नहीं बदला। 1990 में भी कश्मीर अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं और आज भी नहीं। बस इतना बदला है कि अब कश्मीर के किसी मस्जिद से ये आवाज नहीं आ रही है। कि हिन्दूओ कश्मीर खाली करो। किंतु मौजुदा परिस्थिती वैसी लग रही है। बस आंतकवादी समर्थन करने वाले लोग कलतक मस्जिदों में लाउडस्पीकर ऐलान करवाते थे। आज वो अंदरग्राउंड होकर धोखे से वार करते है। क्योंकि उन लोगो को भी मालूम है कि ये नया भारत ये अपने दुश्मनो को छोड़ता नहीं है। इस नये कश्मीर में पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई लाख कोशिश कर ले,फिर से नब्बे के दशक जैसी हालात पैदा होने नहीं देंगे। यही नये भारत व नये कश्मीर के सौगंध है।

कश्मीर समस्या जड़ वहाबी विचारधारा

कश्मीर समस्या का जड़ पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई तो है ही साथ में वहाबी इस्लाम के विचारधारा इसके जड़ है। आईए जानते हैं कि वहाबी इस्लाम क्या है?? वहाबी इस्लाम को माने वाले मुसलमान दुसरो मुशरिक’ याने काफिर और उन्हें मारना जायज है। इस शब्द अर्थ यही है कि जिहाद सिर्फ दुसरे धर्म मानने वालों के ही विरुद्ध नहीं बल्कि उन सभी मुसलमानों के भी खिलाफ है जो सुन्नी और वहाबी से इतर मुस्लिम संप्रदाय (शिया आदि) हैं। आज दौर में आप जितने इस्लामिक आंतकवादी संगठन देखा होगा वो सब इसी वहाबी विचारधारा से आते है , जिनका उद्देश्य पुरे विश्व में इस्लाम के राज स्थापित करना है। खैर किसी और लेख में गंभीर विषय पर विश्लेषण करेंगे । आज हम मौजुदा परिस्थिती रहते है , और जानते हैं कि सरकार आगे क्या कदम उठा सकती है।

जाने कैसे हुई हत्या

वरिष्ठ पत्रकार आदित्यराज कौल ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के सूत्रों के हवाले से Twitter पर लिखा कि आतंकियों ने श्रीनगर के सफाकदल हायर सेकेंडरी स्कूल के सभी शिक्षकों को पंक्ति में खड़ा किया, उसके बाद उनके पहचान पत्र और मोबाइल फोन की जाँच की। इसके साथ ही आतंकियों ने उनसे पूछताछ भी की और उनमें से अधिकतर को छोड़ दिया। माना जा रहा है कि जिन शिक्षकों को आतंकियों ने जाने दिया, वे सभी मुस्लिम थे। वहीं आतंकियों ने सिख समुदाय से संबंध रखने वाली शिक्षिका सतिंदर कौर और हिंदू समुदाय से संबंध रखने वाले शिक्षक दीपक चंद की गोली मारकर हत्या कर दी। आपको ये बता दे कि सतिंदर कौर स्कूल की प्रिंसिपल और दीपक कौल शिक्षक थे। मारे गए दोनों शिक्षक अलोचीबाग के रहने वाले थे। इनमें से एक सिख तो दूसरा कश्मीरी पंडित था। रिपोर्ट के अनुसार आतंकी पहले से ही घात लगाए हुए थे और जैसे ही स्कूल खोलने के लिए दोनों शिक्षक वहाँ पहुँचे, आतंकी स्कूल में घुस गए।

आंतकी हमले जिम्मेदार लेने वाले TRF कौन ?

श्रीनगर के ईदगाह इलाके में हुए आंतकी हमले की जिम्मेदारी रेडिकल इस्लामिक टेररिज्म संगठन TRF ने लिया है। आपको जानकारी के लिए बता दे कि इस संगठन का link भी आंतकवाद के फैक्ट्री पाकिस्तान से जुड़ा रहा है। आतंकी संगठन TRF को पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा का फ्रंट माना जाता है। मिडिया रिपोर्ट के अनुसार बीते दिनों में टीआरएफ के ओवरग्राउंड वर्कर्स पूरी तरह मुख्य काडर में तब्दील हो चुके हैं और लोगों की निशाना बनाकर हत्या कर रहे हैं। आंतकी संदेश देना चाहते है कि गैरमुस्लिम समुदायों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मिडिया रिपोर्ट को माने तो आंतकी हमले पैटर्न के बदलने की दो वजह बताया जा रहा है। पहला ये कि इन आतंकी संगठनों को नए डोमिसाइल एक्ट और नई चुनावी प्रक्रिया से समस्या है। ये सॉफ्ट टारगेट पर हमला करते हैं। जबकि दुसरी वजह ये है कि पिछले दिनो सरकार ने आतंकियों की हिंसा से मजबूर होकर घाटी छोड़ने वाले कश्मीरी पंडित (Kashmiri Pandit) सहित सभी विस्थापितों की पुश्तैनी जायदाद वापसी की कड़ी में सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। इसी कदम से खलबली पाकिस्तान और उसके पाले हुए आंतकी संगठन में खलबली मच गई है। कई रक्षा विश्लेषक भी यही मानते है कि कश्मीरी पंडितों को घाटी में फिर से बसाने और नया कश्मीर बनाने की केंद्र सरकार की कोशिश के कारण भी आतंकी इस तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

मंदिर में तोड़फोड़ और आगजनी से कश्मीरी पंडितों में गुस्सा

आपको ये बता दे कि पिछले कई दिनो से लगातार कई घटना सामने आ रही है , जहाँ पर चुन-चुन कश्मीर के अल्पसंख्यक समुदाय हिन्दू वो सिख समुदाय निशाने लिया जा रहा है। यहाँ तक कि कश्मीरी पंडितों के कुल देवी मंदिर में तोड़फोड़ और आगजनी से कश्मीरी पंडितों में गुस्सा है।

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