Sunday, November 28, 2021
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kya evm hack ho sakta hai evm kya hai ••• अबतक का सबसे सटीक विश्लेषण

 

नमस्कार दोस्तों हमारे देश में जब भी कोई राजनीति दल चुनाव हारती तब वह हार का दोष इवीएम को देते है। आज हम यही समझने का प्रयास करेंगे क्या वकई इवीएम हैक हो सकती है। या फिर विपक्ष के दलो का बहाना है। जिस तरह एक छोटे बच्चे का exam अच्छे अंक नही मिलते है। वो अपने माता-पिता के पिटाई बचने के लिए सीधे तौर यह कह देता है कि कॉपी सही तरीका से जांच स्कूल नहीं हुआ है जाहिर सी बात है कि उस बच्चे के माता नहीं मानेंगे। उसी तरह के हमारे विपक्षी दल जो हारने के बाद उन लोगो जो उनके कार्यकर्ता होते या वोटर होते उन्हे संतुष्ट करने के लिए ये भ्रम फैलाते है कि इवीएम हैक हो गया है। जैसा कि आप जानते हैं कि मैं जब कोई विश्लेषण करता हूँ। तो पुरी fact आधार पड़ करता हूँ इसलिए मेरा हर विश्लेषण (Analysis) सबसे सटीक रहता है।

हर चुनाव राजनीति दल ये आरोप लगाते थे कि evm hack ho gya hai.. आज हम इसी को समझे गे क्या वास्तव में evm hack ho sakta hai। इस विषय लिखने से पहले करीब तीन चार महीने तक रिसर्च किया है।

kya evm hack ho sakta hai
Image Source : india TV 

आज दौर में ये प्रश्न है कि evm voting machine setting kya ja sarta hai… agar aap YouTube search kregekya evm hack ho sakta hai.  to aapko kai video Milenge. लेकिन वास्तविकता में जितने विडियो में इवीएम को हैक करके बताया गया , सबके सब fake रहती है।
क्योंकि भारतीय Election commission जो evm इस्तेमाल करती है। वो इवीएम काफी सुरक्षित होती है। क्योंकि भारत में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम अन्य देशों की मशीनों से अलग होती हैं क्योंकि बाहर की ईवीएम जहां नेटवर्क से जुड़ी होती हैं। वहीं भारतीय मशीनें पूरी तरह से offline चलती हैं। evm के internet नहीं जुड़े होने के वजह से उसमें छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो जाती है। आपको याद है कि जब Election commission evm hack karne ka challenge Diya tha. Tab koi bhi political party Nahin gaya tha. क्योंकि उन्होंने मालूम वास्तविकता कि वो इवीएम हैक नही कर सकते है।

बैलेट बॉक्स सुरक्षित है या ईवीएम? (Is the ballot box safe or EVM?)

kya evm hack ho sakta hai
Image Sourcewww.pexels.com


जैसा कि आप जानते होंगे, ईवीएम से पहले हमारे देश में बैलेट बॉक्स से चुनाव होते थे। बैलेट बॉक्स में वोटर कागज पर ठप्पा लगाकर उम्मीदवारों को वोट करते थे। फिर सारे बैलट पेपर्स को एक स्थान पर रखकर गिनती की जाती थी। गिनती के बाद नतीजे बताए जाते थे। ये पूरी प्रक्रिया मैन्युअल थी।उसमें अच्छा-खासा समय लगता था। कई बार सारे नतीजे आने में 2 से 3 दिन लग जाते थे। वो उस दौर जब भारत की आबादी 30 से 50 के आस-पास करोड़ थी। कल्पना कीजिए आज दौर में इतनी बड़ी आबादी वोटो गिरना संभव है , बैलेट बॉक्स  से , शायद नतीजे आने में कई महीने लग जाएगे। जब देश में बैलेट बॉक्स चुनाव होती थी आम तौर बूथ कैपरिंग की घटनाएं सामने आती थी। जो लोग ये कहते है कि अमेरिका जैसा सुपर पावर evm इस्तेमाल नही करता उनकी आबादी कितनी है , क्या भारत तरह Booth capping जैसी घटनाए सामने आती है ? जवाब ये है कि नही। अमेरिका में लोकतंत्र खतरे में क्योंकि वहाँ के चुनावी प्रक्रिया पर वही लोगो भरोसा नही है। दुनिया एकमात्र देश भारत है जहाँ पर लोकतंत्र का मूल्य सिद्धांत जीवित है ।

बैलेट बॉक्स स्थान पर देश में इवीएम  क्यों लाया गया है?


 इसलिए लाया गया क्योंकि कि the Hindu अखबार अनुसार 36 हजार सीटो में से 300 सीटे ऐसे जहाँ बहुत अधिक फर्जी वोटर है। जो कि पुरे देश जनादेश के तस्वीर बिगाड़ सकते थे।

इवीएम क्या है? ( evm kya hai?)

Evm यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल मतदान की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने के लिए किया जाता है। evm बैलेट बॉक्स से अधिक आसान थीं। और स्टोरेज, गणना आदि सब कुछ अधिक अच्छा होने की वजह से इनका इस्तेमाल शुरू हुआ। अब लगभग 15 सालों से ये भारतीय चुनावों का हिस्सा बना हुआ। evm mein eak  कंट्रोल यूनिट, एक बैलेट यूनिट और 5 मीटर की एक केबल होती है। मशीन बैटरी से चलती है। उसकी कंट्रोल यूनिट मतदान अधिकारी के पास होती है। जबकि बैलेट यूनिट का प्रयोग मतदाता करते हैं।जब तक मतदान अधिकारी कंट्रोल यूनिट से बैलेट का बटन प्रेस नहीं करेगा। बैलेट यूनिट से वोट डाल पाना संभव नही है। बैलेट यूनिट से एक बार वोट डाले जाने के बाद लोग चाहें जितनी बार भी बटन दबाएं, कोई फर्क नहीं पड़ता। मतदाता द्वारा एक बार बटन दबाने के बाद यानी और एक वोट लेते ही मशीन लॉक (Machine lock) हो जाती है। उसके बाद सिर्फ नए बैलेट नंबर से ही खुलती है।

इवीएम के बारे कुछ महत्वपूर्ण तथ्य बताते है (Explains some important facts about EVM)

पहली बार 1974 में अमेरिका (USA) के कैलिफोर्निया में स्थानीय चुनावों में इसका प्रयोग हुआ। उसके बाद एक बेहतर evm का प्रयोग इलुनॉयस, शिकागो में हुआ। 1975 में अमेरिकी सरकार ने इन मशीनों को लेकर एक रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक अधिकारी नियुक्त किया।

भारत में केरल के एक उपचुनाव में पहली 1982 में ऐसी मशीन का इस्तेमाल किया गया। लेकिन कोर्ट ने इन मशीनों के इस्तेमाल को खारिज कर दिया। 1991 में बेल्जियम पहला देश था। जहां evm का इस्तेमाल चुनाव में हुआ। लेकिन सही मायनों में वहां भी इसका पूरा इस्तेमाल 1999 से शुरू हुआ। भारत में 1982 में पहली बार इस्तेमाल के बाद 2003 के चुनावों में इसका व्यापक प्रयोग किया गया।

देश में अब भी ईवीएम भारत के इन्हीं दो नवरत्न उपक्रमों भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा बनाई जाती है। इन्हें कुछ देशों को भी निर्यात किया जाता है। बैलेट बॉक्स की तुलना में इन मशीनों से चुनाव सस्ता पड़ता है।

क्या ईवीएम बिना  बिजली के चल सकती हैं?

हां इनके लिए किसी तरह के बिजली की अवश्यकता नहीं होती, ये इनके साथ जोड़ी गईं बैटरी से चलती हैं।

एक ईवीएम में कितने वोट रिकॉर्ड किए जा सकते हैं?

भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission)
जिन ईवीएम का इस्तेमाल करता है, वो मशीनें 2000 वोट तक रिकॉर्ड कर सकती हैं।

इनमें वोट कब तक इनकी मेमोरी में रिकॉर्ड रहता है?

वोटों का डाटा ईवीएम की कंट्रोल यूनिट की मेमोरी में लंबे समय तक रिकॉर्ड रह सकता है। उसकी मेमोरी डाटा को आंच भी नहीं आती।

एक ईवीएम की उम्र कितनी होती है?

आमतौर पर 16-17 साल या उससे अधिक होती है।

एक ईवीएम में कितने उम्मीदवारों के नाम दर्ज हो सकते हैं?

Eak evm में 64 उम्मीदवारों के नाम शामिल किए जा सकते हैं. एक ईवीएम में 16 नाम ही होते हैं और अगर किसी क्षेत्र में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या अधिक है। तो वहां evm की संख्या बढ़ा दी जाती है। अगर किसी क्षेत्र में उम्मीदवारों की संख्या 64 से अधिक हो जाए तो वहां बैलेट पेपर का इस्तेमाल करना होगा।

कितनी है ईवीएम की कीमत?

Election Commission के अनुसार साल 1989-90 में जब ईवीएम खरीदी गई थीं।उस समय प्रति ईवीएम (एक कंट्रोल यूनिट, एक बैलेटिंग यूनिट एवं एक बैटरी) की लागत 5500/ थी। ईवीएम में शुरुआती निवेश भले ही अधिक  हो। लेकिन ईवीएम से मत पत्र से होने वाले वोटिंग की तुलना में कम खर्च होता है।

क्या इवीएम हैक क्यों नही हो सकता है ( EVM hack Kyon Nahin ho sakta hai )

Kya sach mein evm hack ho sarta hai is Sawal Ka Jawab ye yah hai ki Kabhi Nahin.. क्योंकि ये मशीनें किसी इंटरनेट नेटवर्क से नहीं जुड़ी होतीं लिहाजा इन्हें हैक करना संभव नहीं। 

बहुत से लोग ये दावा करते है कि एक छोटी सी 

Bluetooth Chief hack kya ja sarta hai  , में आपको बता देना चाहता ये संभव नही क्योंकि evm मशीन के जिस तरह बनाया गया उसमें किसी तरह के 

Bluetooth Chief नही लगाया जा सकता है। क्योंकि जैसे ही आप Bluetooth Chief लगाए गे उसी समय वो मशीन बिल्कुल बंद हो जाएगी।

क्या इवीएम बनाने वाले कंपनी कुछ गरबड़ कर सकती है?

इवीएम बनाने वाली दो सरकारी कंपनियों- भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बेंगलुरु” और “इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया हैदराबाद” द्वारा किया जाता है। सभी क्षेत्रो में मशीने भेजी जाती है। ओर उसमें alphabet क्रम में उम्मीदवार नाम ओर चिन्ह डाले जाते है। evm बनाने वाले लोगो ये मालूम नही होता है कि कौन मशीन किस स्थान जाने वाला है। वहाँ किस उम्मीदवार नाम किस क्रम होगी ये कोई नही जानता है। क्योंकि Chief बनाने वालो ये नही मालूम होता है कि इवीएम  पटना , दिल्ली चेन्नई ये अन्य कोई शहर या गांव में जाएगा। ये सुनिश्चित करने मशीन में कोई गरबड़ी नही हुई इसके कई चरणों में सील लगाया जाता है। जिस से किसी व्यक्ति को ये पता लगाने असंभव होता है कि कौन से इवीएम कौन क्षेत्र जाएगा। इसके अलावा VVPAT मशीन भी आ चुका जिस से वोटर आसानी जान सकता है। उसका वोट किसे गया है। इस evm hack होने की संभवना ना बराबर रह जाती है। 

kya evm hack ho sakta hai
Image Source : www.newindianexpress

 evm hack karne ka  आरोप BJP पर लगाया जाता है। अगर वकई  evm हैक करना संभव होता तो BJP दिल्ली का चुनाव आसानी जीत जाना चाहिए , वहाँ भाजपा कैसे हार गये है। तब तो दिल्ली में केजीवाल सरकार नही बना चाहिए , क्योंकि अगर भाजपा हैक कर सकती सभी राज्यो में आसानी जीतना चाहिए।  ऐसे कई राज्यों है जहाँ भाजपा हार हुई है , उन राज्यों में भी इवीएम इस्तेमाल हुई है। वर्तमान दौर हम ये कह सकते है कि इवीएम हैक नही किया जा सकता है। बाकी आप ये लेख सहमत या असहसमत आप निर्भर करता है। अगर आपको लगता है कि मैंने कोई  point छोड़ दिया तो अपनी रॉय मुझे कामेंट दे।

लेखक राजनीति जानकार – शशिकांत यादव..

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