Exit poll या opinion poll कितना सच होता है इसके विश्वसनीय होने की संभवना कितनी ?

चुनावी मौसम एक फिर से आ गई है। एक बार फिर से
सर्वे की भरमार लग जाती है। कोई कहता है कि बीजेपी को इतने वोट मिलेंगे तो कोई कहता है कि कांग्रेस को इतने वोट मिलेंगे। इन अलग-अलग सर्वे को मुख्यतः दो भागों में बांटा जाता है। ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल। आज हम आपको बताए गे कि आखिर कैसे ओपिनियन पोल या फिर एग्जिट पोल किया जाता है। और इसके विश्वसनीय होने की संभवना कितनी होती है।

अक्सर ही ओपिनियन पोल या फिर एग्जिट पोल को लेकर हमारे मन कुछ सवाल आता है। जैसे कि

(1) ओपिनियन पोल या फिर एग्जिट पोल क्या सच में होती है?

(2) अगर ओपिनियन पोल या फिर एग्जिट पोल होती तो इसे कैसे किया जाता है? और कितनो सीटो पर?

(3.) ओपिनियन पोल या फिर एग्जिट पोल कितनो सीटो पर होता है?

(4.) इसके विश्वसनीय होने की संभवना कितनी होती है?

ओपिनियन पोल या फिर एग्जिट पोल क्या सच में होती है?

इसका जवाब है कि हाँ ओपिनियन पोल या फिर एग्जिट पोल सच में होती है। इसे तय किया गया मतदान केन्द्रो पर किया जाता है।

अगर ओपिनियन पोल या फिर एग्जिट पोल होती तो इसे कैसे किया जाता है?

क्या होता है ओपिनियन पोल?

चुनाव की घोषणा के बाद होने वाले वो सर्वे जिसमें वोटरों से पूछा जाता है कि आप कौन सी पार्टी को वोट देंगे, वैसे सर्वे को ओपिनियल पोल कहते हैं। इस सर्वे में मुख्य रूप से सैंपल साइज पर जोर होता है। जिसका जितना बड़ा सैंपल साइज होता है, उसके नतीजे उतने सही होने के करीब होते हैं।

क्या होता है एग्जिट पोल?

मतदान के दिन जब वोटर वोट डाल कर निकलता है तो सर्वे करने वाले उससे यह पूछते हैं कि आपने कौन सी पार्टी को वोट दिया है, ऐसे सर्वे को एग्जिट पोल कहते हैं। एग्ज़िट पोल करने वाला व्यक्ति वोटर का डेमोग्राफिक डाटा इकट्ठा करता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने जिसे वोट किया उसके पीछे क्या फैक्टर्स थे। चूंकि लोगों द्वारा डाले गए वोट गोपनीय होते हैं। एग्ज़िट पोल ही एकमात्र रास्ता है, जिससे ये जानकारी इकट्ठा की जा सकती है। exit poll के आंकड़े सुबह या शाम के नहीं होते बल्कि कि पुरे दिन के होते है। क्योंकि अगर सुबह या शाम का डाटा हो तो सर्वे गलत होने की संभवना अधिक रहती है। इस सर्वे करने वाला व्यक्ति पुरे दिन उसी मतदान केन्द्र पर रहता है। जहाँ उस ने सर्वे के लिए तय किया था। फिर आपके मन ये सवाल आता है कि ये तय कैसे किया जाता है ? इसका जवाब है कि सर्वे करने वाला व्यक्ति हर चुनाव में उसी मतदान केन्द्र पर वापस जाता है जिस मतदान केन्द्र पर वो हर बार जाता रहा है। यानी मतदान केन्द्रो पर कोई बदलाव नहीं होता है। जिस केन्द्र पर पिछली बार गया था , उसी मतदान केन्द्र पर वो बार बार जाता है।

ओपिनियन पोल या फिर एग्जिट पोल कितनो सीटो पर होता है।

जैसा कि आप जान चुके है कि ओपिनियन पोल या फिर एग्जिट पोल कैसे किया जाता है़। कितनो सीटो होती है , इसे जानने के लिए विभिन्न सर्वे एजेंजी डाटा को देखना पड़ेगा। जो न्यूज चैनलो पर आते तब वो अपना डाटा बताते है। इसके अलावा आखबार प्रकाशित करते है तब भी डाटा के बारे यानी कितनो लोगो से बीच किया उसकी जानकारी देते है।

Exit poll या opinion poll विश्वसनीय होने की संभवना कितनी होती है?

Exit poll या opinion poll होने की संभवना महज 20 से या 30 प्रतिशत है। opinion poll से कम विश्वसनीय होने की संभवना Exit poll पोल में होता है। opinion poll 100 से 280 के बीच होता है। लेकिन एग्जिट पोल में यह संभव नहीं है। आमतौर पर, एजेंसियां ​​अपने चुने हुए कुछ मतदान केन्द्र पर केवल 10 लोगो से पुछती है। Exit poll या opinion poll विश्वसनीय नहीं होने के पिछे सबसे बड़ा कारण ये है कि किसी भी सर्वे के विश्वसनीय होने के लिए 1%
सैंपल साइज होना अवश्यक है जो कि भारत समेत पुरी दुनिया में कोई भी सर्वे एजेंजी नहीं करती है। इसलिए कई बार बिहार जैसे राज्य में सर्वे गलत हो जाता है। एग्जिट पोल की प्रक्रिया में उन वैज्ञानिक तरीको का प्रयोग नहीं हो पाता है जो पोस्ट पोल या प्री पोल में अपनाई जाती है।

जनत सर्वे पर कितना विश्वास करती है

अभी वर्तमान में चुनावी राज्यों में एक सर्वे किया है , जिसे एक न्यूज चैनल और सर्वे एजेंजी द्वारा किया गया। जिसका का सवाल था कितने प्रतिशत जनता को सर्वे पर यकीन करते है वो हम आपको बताते है।

ये थी Exit poll या opinion poll पर हमारा संपुर्ण विश्लेषण। आशा करते है कि आपके मन के सारे सवाल का जवाब मिल गया होगा।

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