Thursday, October 21, 2021
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विवादित बयान: कवि मुनव्वर राणा ने कहा, डरने की जरूरत नहीं, भारत में तालिबान से ज्यादा क्रूरता

राणा ने अफगानिस्तान में होने वाली क्रूरता की तुलना हिंदुस्तान से कर दी है। इसके बाद वह भाजपा समेत अन्य दलों के निशाने पर आ गए हैं।

यूपी के रहने वाले मशहूर शायर मुनव्वर राणा ने अफगानिस्तान में होने वाली क्रूरता की तुलना हिंदुस्तान से कर दी है। उन्होंने कहा कि जितनी क्रूरता अफगानिस्तान में है, उससे ज्यादा क्रूरता तो हमारे यहां पर पहले से ही है। पहले रामराज था, लेकिन अब कामराज है। उनके इस बयान के बाद से ही वह  कई नेताओं और लोगों के निशाने पर आ गए हैं। जब से तालिबान का अफगानिस्तान में राज शुरू हुआ है कई लोग इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इनमें कुछ लोगों की प्रतिक्रिया काफी विवादित भी है।

शायर मुनव्वर राणा भी इस सूची में शामिल हो गए हैं, उनका कहना है कि अगर राम से काम है तो ठीक, वरना कुछ भी नहीं। इसके बाद वह भाजपा समेत अन्य दलों के निशाने पर आ गए हैं। भाजपा ने इसे देश विरोधी बयान करार दिया है।

सांसद शफीकुर्रहमान बर्क के खिलाफ राजद्रोह का केस
इससे पहले तालिबानी लड़ाकों की देश के स्वतंत्रता सेनानियों के साथ तुलना करने पर समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क के खिलाफ राजद्रोह समेत कई धाराओं में संभल कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की गई है। यह कार्रवाई भाजपा नेता की तहरीर के आधार पर की गई।

भाजपा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश सिंघल ने संभल कोतवाली में दी तहरीर में बताया कि सपा सांसद डॉ. बर्क ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की तुलना अफगानिस्तान में आतंक मचा रहे तालिबानी लड़ाकों से की है। इसी तहरीर के आधार पर पुलिस द्वारा कार्रवाई की गई है।

तालिबान की जीत के लिए अल्लाह को शुक्रिया
इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के संभल से सांसद शफीकुर रहमान बर्क के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता सज्जाद नोमानी भी तालिबान के समर्थन में उतर आए थे। उन्होंने बयान जारी कर अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे को जायज बताया था। उन्होंने कहा कि तालिबान ने पूरी दुनिया की सबसे मजबूत सेनाओं को धूल चटाई है। इन नौजवानों ने काबुल की जमीन को चूमा है।

उन्होंने तालिबान की जीत के लिए अल्लाह को शुक्रिया कहा। हिंदुस्तान का मुसलमान, तालिबान को सलाम करता है। नोमानी ने आगे कहा कि पूरी दुनिया ने देखा कि कैसे एक निहत्थी कौम ने दुनिया की सबसे मजबूत फौजों का मुकाबला किया और काबुल के महल में वे दाखिल हो गए। उनमें किसी भी तरह का घमंड नहीं था, बड़े बोल नहीं थे। एक बार फिर यह तारीख रकम हुई है।

विस्तार

यूपी के रहने वाले मशहूर शायर मुनव्वर राणा ने अफगानिस्तान में होने वाली क्रूरता की तुलना हिंदुस्तान से कर दी है। उन्होंने कहा कि जितनी क्रूरता अफगानिस्तान में है, उससे ज्यादा क्रूरता तो हमारे यहां पर पहले से ही है। पहले रामराज था, लेकिन अब कामराज है। उनके इस बयान के बाद से ही वह  कई नेताओं और लोगों के निशाने पर आ गए हैं। जब से तालिबान का अफगानिस्तान में राज शुरू हुआ है कई लोग इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इनमें कुछ लोगों की प्रतिक्रिया काफी विवादित भी है।

शायर मुनव्वर राणा भी इस सूची में शामिल हो गए हैं, उनका कहना है कि अगर राम से काम है तो ठीक, वरना कुछ भी नहीं। इसके बाद वह भाजपा समेत अन्य दलों के निशाने पर आ गए हैं। भाजपा ने इसे देश विरोधी बयान करार दिया है।

सांसद शफीकुर्रहमान बर्क के खिलाफ राजद्रोह का केस

इससे पहले तालिबानी लड़ाकों की देश के स्वतंत्रता सेनानियों के साथ तुलना करने पर समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क के खिलाफ राजद्रोह समेत कई धाराओं में संभल कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की गई है। यह कार्रवाई भाजपा नेता की तहरीर के आधार पर की गई।

भाजपा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश सिंघल ने संभल कोतवाली में दी तहरीर में बताया कि सपा सांसद डॉ. बर्क ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की तुलना अफगानिस्तान में आतंक मचा रहे तालिबानी लड़ाकों से की है। इसी तहरीर के आधार पर पुलिस द्वारा कार्रवाई की गई है।

तालिबान की जीत के लिए अल्लाह को शुक्रिया

इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के संभल से सांसद शफीकुर रहमान बर्क के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता सज्जाद नोमानी भी तालिबान के समर्थन में उतर आए थे। उन्होंने बयान जारी कर अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे को जायज बताया था। उन्होंने कहा कि तालिबान ने पूरी दुनिया की सबसे मजबूत सेनाओं को धूल चटाई है। इन नौजवानों ने काबुल की जमीन को चूमा है।

उन्होंने तालिबान की जीत के लिए अल्लाह को शुक्रिया कहा। हिंदुस्तान का मुसलमान, तालिबान को सलाम करता है। नोमानी ने आगे कहा कि पूरी दुनिया ने देखा कि कैसे एक निहत्थी कौम ने दुनिया की सबसे मजबूत फौजों का मुकाबला किया और काबुल के महल में वे दाखिल हो गए। उनमें किसी भी तरह का घमंड नहीं था, बड़े बोल नहीं थे। एक बार फिर यह तारीख रकम हुई है।

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