Katihar news : कटिहार जिले का गौरव है मिनी बाबाधाम के नाम से प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर

Katihar news : बिहार के कटिहार जिला कई मामलो ऐतिहासिक है। नीति आयोग भी कहता है कि कटिहार पर्यटन (tourism) क्षेत्र में एक नया अध्याय लिख सकता है।हाल पयर्टन विभाग का आकड़ा आया है कि गोवा से अधिक बिहार घूमने आ रहे विदेशी पर्यटक (tourist) आ रहे है। फिर भी बिहार के स्थिती नहीं बदलता है। इसके बड़ी वजह है कि बिहार में पर्यटन (tourism) क्षेत्र में सरकारी विफलता है जो कि इस पर काम करना ही नहीं चाहती है। खैर पर्यटन (tourism) क्षेत्र पर किसी और लेख में बात करेंगे। अभी हम कटिहार केमिनी बाबाधाम के नाम से प्रसिद्ध गोरखपुर गांव के गोरखनाथ शिव मंदिर का इतिहास को बताते है।

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मिनी बाबाधाम के नाम से प्रसिद्ध कटिहार का गोरखनाथ मंदिर

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मिनी बाबाधाम के नाम से प्रसिद्ध गोरखपुर गांव के गोरखनाथ शिव मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। शिव मंदिर कटिहार जिला का ऐतिहासिक व जिला का गौरव है। सुंदर तालाब और पेड़ों से घिरे सुगम वातावरण में अवस्थित इस शिव मंदिर की कहानी कई क्विंदतियों से जुड़ी है। ऐसा कहा जाता है कि सम्राट अशोक द्वारा बौद्ध धर्म के व्यापक प्रचार से लोग निक्कमे होने लगे थे। तब गुरु शंकराचार्य ने चार शिवाश्रम भारत के चार कोने में स्थापित कर लोगों को सक्रिय बनाने निकले। इसी क्रम में इस मंदिर का निर्माण हुआ होगा।Katihar news

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कुछ इतिहासकारों का मानना कि मंदिर के उपरी हिस्सा से अशोक चक्र एवं नागफन अंकित है। मंदिर का निर्माण विशेष आकार के ईंट, चूना, सुरखी से प्राचीन काल की कारीगरी की अनूठी मिसाल है। बिना नींव की कटोरी को उल्टा कर बैठा देने जैसा अवस्था में यह मंदिर अद्भूत प्रतीत होता है। दूसरी ओर एक क्विंदती के अनुसार अनुमानित 1053 ई सन में प्रसिद्ध संत गोरखनाथ जी महाराज अपने गुरु मछिन्द्रानाथ को असम के कामाख्या में नैनयोगिन के चंगुल से छुड़ाने के क्रम में जाग मछिन्द्र गोरख आये और चारों साथ कामख्या जा रहे थे। इसी क्रम में गोरखपुर में तीन दिन रहे और इस मंदिर की स्थापना की गयी एवं इसी कारण इस गांव का नाम गोरखपुर पड़ा एवं मंदिर का नाम गोरखनाथ हुआ। साथ ही गोरखनाथजी महाराज गोरखनाथ गांव के उत्तर पूर्वी में एक गोरख चंडी की स्थापना किया।Katihar news

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गुरु गोरखनाथ द्वारा यह सिद्धपीठ घोषित किया गया था। मंदिर के पूर्व में मां दुर्गा का मंदिर, पश्चिम में चैती काली, दक्षिण मे महामाया, उत्तर पूर्वी दिशा में गोरखचंडी के स्थान से प्रतीत होता है कि देवनगरी गोरखपुर बहुत ही प्राचीन है। 1947 ई के देश स्वतंत्रता के बाद यह मंदिर बिहार राज्य में स्थापित है। इस मंदिर के दस्तावेज की जानकारी का पता लगाने का कोशिश किया जा रहा है।

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मंदिर जाने के लिए रास्ता तक नहीं

क्या भारत बन रही गृहयुद्ध स्थिती और जाने क्या होता गृहयुद्ध।

कटिहार के ऐतिहासिक शिव मंदिर जाने के लिए रास्ता तक नहीं है। जो कि कटिहार जिला के पर्यटन (tourism) क्षेत्र में विकास का महत्वपूर्ण केन्द्र बन सकता है। उसी मंदिर जाने के लिए कटिहार एवं बिहार के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर जाने वाली सड़क दयनीय स्थिती देंखे।. स्थानीय लोग फेसबुक पर पोस्ट करके बिहार के ex डिप्टी सीएम और कटिहार के सांसद आग्रह कर रहे है कि इस स्थान पर बेहतर सड़क निर्माण करे। देखते है कि कबतक लोगो के मांग पुर्ण हो पाती है। खैर ऐतिहासिक स्थल पर दर्शन करने जरूर जाए।Katihar news

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