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kalki avatar kab hoga: यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्

श्रीमदभगवतगीता के चौथे अध्याय के इस सांतवे श्लोक का अर्थ है कि जब-जब इस पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, विनाश का कार्य होता है और अधर्म आगे बढ़ता है, तब-तब मैं इस पृथ्वी पर अवतार लेता हूँ।

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यह कथन भगवान विष्णु के आँठवें अवतार श्रीकृष्ण ने महाभारत का महायुद्ध शुरु होने से पहले अर्जुन से कहा था। अब जैसा कि इस कथन से साफ है कि भगवान समय-समय पर धरती पर पापियों का विनाश करने के लिए आते रहते हैं, तो प्रश्न यह है कि भगवान का दसवाँ यानी कल्कि अवतार कब होगा? आज हम आपको भगवान विष्णु के इसी अवतार के बारे में सब कुछ बताने वाले हैं, तो बस वीडियो को अंत तक देखते जाइये।

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दसवें अवतार के बारे में जानने से पहले आइये जान लेते हैं कि भगवान के पिछले 9 अवतार कौन-कौन से थे।

भगवान के पिछले 9 अवतार कौन-कौन से थे।

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पहला अवतार था मत्स्य अवतार, इस अवतार में भगवान विष्णु मछली बनकर इस धरती पर प्रकट हुए थे। उन्होंने यह अवतार राजा मनु को प्रलय से बचाने के लिए लिया था।

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दूसरा अवतार है कूर्म या कच्छप अवतार। कच्छप का मतलब होता है कछुआ और इस अवतार में उन्होंने क्षीरसागर के समुद्रमंथन में मंदर पर्वत को अपने कवच पर रखा था।kalki avatar kab hoga


तीसरा अवतार है वराह, वराह का मतलब होता है सुअर। इस अवतार में भगवान ने सुअर का रूप लेकर हिरण्याक्ष को मारा था।

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चौथा अवतार है नृसिंह या नरसिंहा और जैसा कि नाम से साफ है कि इस अवतार में वे आधे मनुष्य वह आधे सिंह यानी शेर थे। इस अवतार में उन्होंने अपने भक्त प्रहलाद के लिए उसके पिता हिरणाकश्यप को मारा था।
पाँचवा अवतार है वामन अवतार, इस अवतार में भगवान ब्राम्हण बालक के रूप में धरती पर आए थे।
छठा अवतार है परशुराम। क्षत्रियों के अहंकार और प्रकोप से विश्व को बचाने के लिए भगवान ने यह अवतार लिया था।
साँतवा अवतार हैं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम। उनके बारे में तो कौन नहीं जानता। आप उनकी जीवन गाथा को रामायण में पढ़ सकते हैं।

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अब राम नाम आया है तो इसी बात पर कमेंट बॉक्स में ‘जय श्रीराम’ लिख दीजिये।
आँठवा अवतार वहीं हैं जिनके कथन से हमने इस वीडियो की शुरुआत करी, नन्दलाल श्रीकृष्ण।
भगवान का नौवा अवतार महात्मा बुद्ध थे, जिन्होंने बौद्ध धर्म की स्थापना की।
और अब दसवां और आखिरी अवतार होगा ‘कल्कि’ जिसके बारे में ‘कल्कि पुराण’ में लिखा है कि जब कलयुग में पाप बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा और कोई भी धर्म पर चलने वाला नहीं बचेगा तब भगवान विष्णु एक बार फिर से अवतार लेंगे। वे अपने सफेद घोड़े पर बैठकर जिसका नाम ‘देवदत्त’ होगा, अपनी तलवार से सभी पापियों का संहार करके पुन: धर्म की स्थापना करेंगे। भगवान का यह अवतार ‘निष्कलंक अवतार’ के नाम से भी जाना जायेगा।

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पुराणों के मुताबिक भगवान विष्णु का कल्कि अवतार सावन महीने के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को होगा इसलिए हर साल इस दिन कल्कि जयंती भी मनाई जाती है। भगवान कल्कि के जन्‍म के समय गुरु, सूर्य और चंद्रमा एक साथ पुष्‍य नक्षत्र में होंगे। कल्कि भगवान कलयुग व सतयुग के संधिकाल में आएंगे यानी कि जब कलयुग खत्म होने वाला होगा और सतयुग शुरू होने वाला होगा। या यह भी कहा जा सकता है कि जैसे श्रीकृष्ण के बैंकुठधाम जाने से द्वापरयुग खत्म हुआ था वैसे ही भगवान कल्कि के आने से कलयुग खत्म होगा।
इसके अलावा आपको बता दें कि श्रीमद्भागवत-महापुराण के 12वें स्कंद के अनुसार,
“सम्भलग्राममुख्यस्य ब्राह्मणस्य महात्मनः।
भवने विष्णुयशसः कल्किः प्रादुर्भविष्यति।।”

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अर्थात, “सम्भल गाँव में विष्णुयश नाम के एक उदार ह्रदय वाले ब्राह्मण होंगे। उन्हीं के घर कल्कि भगवान अवतार लेंगे।”
इसके अलावा ग्रंथों में यह भी लिखा है कि उनकी माता का नाम सुमति होगा, उनके तीन बड़े भाई भी होंगे जिनके नाम सुमन्त, प्राज्ञ और कवि होंगे। उनके पुरोहित याज्ञवल्क्य तथा गुरू भगवान परशुराम होंगे। भगवान कल्कि की दो पत्नियाँ होगीं, जिनमें एक का नाम पद्मा तथा दूसरी का रमा होगा। उनके 4 बेटे भी होंगे, जिनका नाम जय, विजय, मेघमाल तथा बलाहक होगा।
यह तो सारी जानकारी हो गई भगवान विष्णु के कल्कि अवतार के बारे में पर अब हम आपको एक बहुत ही हैरान कर देने वाली बात बताने वाले हैं जिसे सुनकर आपको अपने सनातन धर्म पर बहुत ही ज़्यादा गर्व महसूस होगा।
चार्ल्स डार्विन की इवेल्यूशन थ्योरी के बारे में तो आपने सुना ही होगा जो कहती है कि इंसानी जीवन की शुरूआत पानी में हुई, यानी वह सबसे पहले मछली था फिर विकसित होते-होते वह ज़मीन पर आया, जानवरों की तरह जंगलों में रहा और फिर धीरे-धीरे आधुनिक मनुष्य बना जैसा कि वह आज है।

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तो बात असल में यह है कि यह जो डार्विन की थ्योरी हम स्कूलों में पढ़ते हैं वह भगवान के अवतारों से ही आयी है। यकीन नहीं होता ना? तो यह सुनिये, सबसे पहले मत्स्य अवतार यानी मछली जो मनुष्य के आरंभिक जीवन को दर्शाता है।
फिर कच्छप अवतार जो मानव जीवन के जल और धरती दोनों जगह रह पाने के गुण को दिखाता है।
उसके बाद आता है वराह अवतार यानी सुअर जो मनुष्य के जंगलों में जानवरों की भाँति रहने और चारों हाथ-पैरो पर चलने वाले समयकाल की तरफ इशारा है।

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चौथा अवतार है नृसिंह यानी आधा जानवर आधा मनुष्य, जिसका मतलब है कि अब मनुष्य अपने पैरो पर खड़ा हो गया था पर वह अभी भी जानवरों की भांति ही जंगलों में रहता था।
नृसिंह के बाद आता है वामन अवतार, भगवान का यह अवतार बौना था जोकि विकास की इस यात्रा में मानव के मानसिक व शारीरिक अधूरेपन को दर्शाता है।
इसके बाद है परशुराम अवतार, भगवान का यह अवतार मनुष्य के उस पड़ाव की ओर संकेत करता है जब वे औज़ारों व हथियारों से शिकार करता था और गुफाओं में रहता था।
इसके बाद आता है राम अवतार, जिन्हें पुरुषोत्तम कहा गया जिससे यह बात साफ हो जाती है कि सांतवे स्तर पर मनुष्य गुफाओं से निकलकर एक समाज में रहने लगा और पूर्ण रूप से मानव बना।

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फिर है कृष्ण अवतार, जो हमें धर्म-अधर्म, राजनीति, कूटनीति आदि का ज्ञान देकर गया और डार्विन की थ्योरी भी यही कहती है कि एक सभ्य समाज में रहने के बाद मनुष्य को उस समाज की बुराईयों से भी लड़ना पड़ा।
उसके बाद आता है बुद्ध अवतार, यह अवतार सामाजिक बुराईयों और इस माया में फंस चुके मानव को अध्यात्म की ओर ले गया।
और अंत में आता है कल्कि अवतार जो इस दुनिया को खत्म करके पुन: निर्माण करेगा जैसा कि साइंटिस्ट भी कहते हैं कि कुछ समय बाद यह यूनिवर्स पूरी तरह से खत्म होकर दोबारा बनेगा।
खैर यह बात तो हो गई भगवान विष्णु के दशवतार की और डार्विन की थ्योरी इससे प्रेरित होने की पर अब अंत में हम आपको एक स्पष्ट बात बता देना चाहते हैं कि जैसे कुछ वीडियोंज़ या आर्टीकल ये दावा करते हैं कि भगवान कल्कि का यूपी के एक शहर में जन्म हो चुका है तो ऐसा कुछ भी नहीं है। कल्कि भगवान कलयुग के बिलकुल अंत में आएंगे जो कि अभी बहुत दूर है इसलिए ऐसी झूठी बातों को सच न मानें और इस छलावे से दूर रहें।


उम्मीद है आपको इस वीडियो से बहुत कुछ नया जानने को मिला होगा। तो वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें

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