भारतीय राजनीति पर निबंध (Indian Politics Essay in Hindi)

Indian Politics Essay in Hindi: भारतीय राजनीति ये शब्द समझ ही गये आज हमारा विषय क्या है । इन दिनो भारतीय राजनीति में भारतीय जनता पार्टी अर्थात (BJP) का युग चल रहा है। भारतीय जनता पार्टी अर्थात (BJP) वो पार्टी बन गया है। जो कि अजेय हो चुका है । जिसे कोई नहीं हरा सकता है। ये सबकुछ मोदी मैजिक के कारण हुआ खैर हम किसी और लेख में भाजपा के सफलता के कारण बताए गे और भाजपा के संगठन किस प्रकार से चलता है। आज का हमारा विषय भारतीय राजनीति परमानव एक सामाजिक प्राणी हैं और जिंदगी के कई पहलुओं से मनुष्य का सम्बन्ध होता है। प्रत्येक पहलु एक राजनीति गतिविधियों से जुड़ा होता है। मनुष्यों से जुड़ी इन्हीं गतिविधियों को हम राजनीति कहते है।

Indian Politics Essay in Hindi


राजनीति(Politics) ग्रीक भाषा के “पोलिश” शब्द से बना है जिसका अर्थ है मनुष्यों से जुड़ी नगर गतिविधियां। आपको आसान शब्दो में बताए गे कि राजनीति एक खेल का ही स्वरूप होता है। जिसमें कई टीम और प्रत्येक टीम में कई खिलाड़ी उपस्थिति होते है, लेकिन विजय सिर्फ एक की ही होती है। उसी प्रकार कई राजनीतिक दल चुनाव लड़ते है और जीतने वाली पार्टी ही सत्ताधारी पार्टी होती है। भारत की राजनीतिक प्रणाली संविधान के मुताबिक काम करता है। कुछ राजनेता और सरकारी कर्मचारियों ने देश के राजनीति की छवि और देश के हालात को बिगाड़ कर रख दिया है। लालच, भ्रष्टाचार, गरीबी, अशिक्षा ने भारतीय राजनीति (Indian politics) को दागदार बना रखा है।

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चुनाव में जीत के बाद सत्ता प्राप्त करने प्रक्रिया

भारत के राजनीति में चुनाव के बाद जीती हुई राजनीतिक दल सत्ता दल से सत्ता की प्राप्ति की एक प्रक्रिया को कहते है। ये राजनीतिक चुनाव प्रक्रिया ग्राम से लेकर देश के चुनाव तक होता है , और सभी चुनावों का नियंत्रण चुनाव आयोग के द्वारा किया जाता है। भारत की राजनीति और चुनाव की प्रक्रिया के द्वारा ही यहां एक सफल सरकार का गठन सम्भव हो पाता हैं। सरकार देश के विकास कार्य और राष्ट्र की प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए कार्य करती है। भारत में पहला आम चुनाव आजादी के बाद सन 1951 में हुआ था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने स्वतंत्रता के बाद भारत के पहले चुनाव में जीत हासिल की थी। भारत में दो बड़ी राष्ट्रीय पार्टियां है, एक राष्ट्रीय कांग्रेस और दूसरी भारतीय जनता पार्टी।

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भारतीय सरकार का संसदीय स्वरुप

भारत की राजनीति एक संसदीय ढांचे के अंदर काम करता है, मुखिया, राष्ट्रपति और देश का प्रधानमंत्री सरकार का प्रतिनिधित्व करते है। भारत एक संसदीय संघीय लोकतान्त्रिक गणतंत्र देश है। भारत की राजनीति द्वी-राजतन्त्र के तहत काम करता है, जिसमें एक केंद्र सरकार और दूसरी राज्य सरकार के रूप में कार्य करती है। भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश में संसदीय स्वरूप ही सरकार के कार्य को दर्शाती है। इस प्रकार देश का प्रधानमंत्री को ही सरकार के रूप में मानते है। वैसे देश का मुखिया तो राष्ट्रपति होता है पर सारी बागडोर प्रधानमंत्री के हाथों में होती है। राष्ट्रपति ही देश का प्रथम नागरिक होता है।

वोट देने का अधिकार

देश में आम चुनाव के द्वारा लोग अपनी पसंद के प्रतिनिधि को चुनने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र होते है। देश का प्रत्येक वो व्यक्ति जिसने 18 वर्ष की आयु पार कर ली है, वह स्वतंत्र रूप से अपने मत का प्रयोग या अपनी इच्छा से उसे अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार होता है।

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प्रत्येक पांच वर्षों के बाद देश का आम चुनाव होता है, जिसमें आप अपने प्रतिनिधि का स्वतंत्रता से चुनाव कर सकते है। आपको जान कर खुशी होगा कि भारत एकमात्र देश है जहाँ पर स्वतंत्रत भारत का पहला चुनाव से ही महिलाओ वोट करने का अधिकार मिल गया ।।

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भारतीय राजनीति में राजनीतिक पार्टियां4

Indian Politics Essay in Hindi:

ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिलने भारत एक लोकतान्त्रिक राष्ट्र बन गया, और यहाँ पर लोकतंत्र में लोगों की पसंद से सरकार बनाने की अवधारणा पर आधारित है। इसमें राजनीतिक दल या पार्टियों का एक ऐसा ग्रुप होता है, जो कि विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों के द्वारा गठित की जाती है।Indian Politics Essay in Hindi

स्वतंत्रता के बाद देश में कई राजनीतिक दलों का गठन किया गया था। जिनमें से कुछ पार्टियां राष्ट्रीय स्तर की थी तो कुछ राज्य स्तर पर थी। बाद में कई राज्य स्तरीय पार्टियों को उनके विस्तार को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर की पार्टी घोषित कर दी गई थी। इन दिनों प्रत्येक राज्य में कुछ लोकल पार्टियों ने भी जन्म ले लिए है, जो की राजनीति को बहुत प्रभावित करता है।

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पार्टी को एक चिन्ह के

कोई भी राजनीतिक दल रहे , चाहे वह पार्टी राष्ट्रीय स्तर की हो या राज्यीय स्तर की पार्टी हो उस पार्टी को एक चिन्ह के रूप में एक प्रतिक होना जरूरी होता है। राजनीतिक पार्टी के पास प्रतिक होने से लोग चिन्ह पर से उस पार्टी की पहचान कर लेते है, और चुनाव चिन्ह के रूप में भी इसे ही इस्तेमाल किया जाता है। लोग चुनाव के समय इसी चिन्ह के माध्यम से पार्टी को पहचान कर अपना मतदान देते है। इन राजनीतिक पार्टियों को चुनाव आयोग द्वारा पंजीकृत होना जरूरी होता है।

भारतीय राजनीति में ऐसी कई राजनीतिक पार्टियां है जो चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त पार्टियां है। जैसे- भारतीय जनता पार्टी, भारतीय राष्टीय कांग्रेस पार्टी, सपा, बहुजन समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी , आरजेडी , जदयू और इत्यादि जिनका वर्चस्व भारतीय राजनीति को प्रभावित करता है। जिसमें कुछ क्षेत्रीय दल है और कुछ राष्टीय दल है।।

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भारतीय राजनीति के नकारात्मक छवि

भारतीय लोकतांत्रिक देश में अनेकों राजनीतिक दस के होने के बावजूद यह बहुत सी समस्याएं भी सामने आयी है, जो बड़े ही दुःख की बात है। हमारे राष्ट्र के विकास और प्रगति के के लिए इन्हें दूर करना बहुत ही जरूरी है।

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(1. )पहला और सबसे महत्वपूर्ण कारण है जो देश के राजनीति और उसके विकास को कमजोर कर रहा है, वो है “भ्र्ष्टाचार”। देश में किसी भी गलत काम को रिस्वत देकर सही साबित करवाना भ्र्ष्टाचार के ही कारण है। सरकारी क्षेत्रों में भ्र्ष्टाचार की अधिकता बहुत है। सभी नियंत्रण राजनीतिक दलो के हाथों में होती है, और राजनीतिक पार्टियां अपनी पार्टी के हित में पैसा इकठ्ठा करने के लिए पैसे लेकर अवैध भर्तियां करवाती है।

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उसके कारण देश के उज्जवल और होनहार छात्रों का भविष्य अंधेरे में चला जाता है। राजनीतिक पार्टियों द्वारा इकठ्ठा किया गया यही धन चुनाव के वक्त जनता का वोट खरीदने काम आता है ।
और दुसरे दलो के नेताओ और विधायक को खरीदने का काम आता है । जो कि वर्तमान दौर की राजनीति कड़वा सच है ।

  1. चुनावों के पहले जो राजनेता बड़े ही विनम्रता से पेश आते है, लोगों से नीतियों और तरक्की के वादों की बौछार करते हैं। वही नेता का चुनाव जीतने के बाद परिदृश्य बिल्कुल ही अलग हो जाता है। उनके सामने आने वाली आम लोगों की समस्याओं की बिल्कुल परवाह नहीं होती है। कहीं-कहीं तो चुनाव जीतने के बाद राजनेता आम लोगों को ही परेशान करने की बात भी सामने आई है। राजनेताओं को बस अपने पैसे बनाने की पड़ी है, उसके लिए वो अपने कुर्सी की शक्ति का इस्तेमाल करते है।Indian Politics Essay in Hindi
  2. राजनीति में पहले से ही उपस्थिति शक्तिशाली राजनेताओं के कारण सही व्यक्ति जो लोगों की सच्ची सेवा करना चाहता है वो कभी चुनाव नहीं जीत पाता हैं। ऐसे शक्तिशाली नेता अपनी अलग-अलग और अवैध रणनीति लगाकर चुनाव को जीतते है। वे आम लोगों में पैसे, खाने के सामान जैसी चीजों को बांटकर अपने चुनावी झांसे में फ़साने का काम करते है, और गरीबो के पैसों की कमी के कारण उनके चुनावी झांसे में आकर उन्हें अपना वोट दे देते है या फिर आप इसे वोट बेचना भी कह सकते है। बाद में लोगों को इन पैसों को अपनी समस्या के रूप में चुकानी पड़ सकती है।

गोदी पत्रकारिता

सत्ता की कुर्सी पर जो राजनेता बैठा हैं वो कभी भी किसी कीमत पर सत्ता और अपना नियंत्रण नहीं खोना चाहता है। ऐसे में नेता फर्जी अफवाहें, झूठी बातें, पैसे देकर दरबारी पत्रकार कहिए या फिर आज दौर के गोदी पत्रकारिता नेता इसी का लाभ उठाकर पत्रकारो को झूठी खबरे फैलाने को कहते हैं। इस तरह से जनता में गलत सन्देश के जाने से दूसरी पार्टी के नेताओं से उनका विश्वास कम हो जाता है और गलत सत्ताधारी नेताओं के जीत का मार्ग और मजबूत हो जाता है।

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4..अधिकांश राजनीतिक दलों में युवाओं की कमी है, क्योंकि राजनीति अब बस पैसे वालों के लिए हो गई है। इसलिए जो अच्छे और कर्मठ युवा राजनीति में आना चाहते है या तो पैसों की कमी या उन्हें राजनीति में पैसो के दम पर आने नहीं दिया जाता। आज भी राजनीतिक पार्टियों में वृद्धावस्था के नेता उपस्थिति है, भारत भले दुनिया का सबसे युवा देश किंतु उसका नेता युवा नहीं है। वृद्धावस्था आ चुके अधिकतर वही नेता जनता की सेवा कर रहे है। वास्तविकता तो यह है की वो न तो ठीक से चल सकते है, न लिख सकते है, न पढ़ सकते है।

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ऐसे नेताओं का काम अधिकारी या कुछ पढ़े लिखे लोग उनके आदेशों का पालन करते है। राजनीतिक पार्टियां अपने निजी स्वार्थ के लिए ऐसे लोगों को अपनी पार्टी में ढो रही है। ऐसे नेताओं को युवा नेताओं के साथ संभावित रूप से बदलने की जरूरत है।

Indian Politics Essay in Hindi

निष्कर्ष

भारतीय राजनीति (Indian politics) अच्छे और बुरे अनुभवों का एक मिश्रण है। जहां एक अच्छा नेता अपनी अच्छी छवि से भारतीय राजनीति को उजागर करता है तो वही दूसरी तरफ नेताओं के गलत तरीके से चुनाव जितना और अपने निजी लाभ के लिए राजनीति करना इसकी छवि को धूमिल बनाता है।

Indian Politics Essay in Hindi

यहां की जनता को देश में लोकतांत्रिक अधिकार दिया गया है की वो अपनी पसंद का नेता चुन सकें। यह चुनाव आयोग की दायित्व है कि वो देश तर्कसंगत या निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराए जिससे देश की प्रगति और तरक्की मार्ग पर बढ़े।

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