hemophilia: बिहार के deputy CM के क्षेत्र के स्वस्थ्य व्यवस्था के खुली पोल. Life-saving इंजेक्शन नहीं मिलने से मरीजो करना पड़ रहा परेशानी का सामना . सामने आया जदयु के सांसद के स्वस्थ्य मंत्री लिखे पत्र

 

कहने को बिहार का कटिहार जिला डिप्टी सीएम का जिला है। परंतु वही कटिहार जिला नीति आयोग माने स्वस्थ्य व्यवस्था में देश के सबसे पिछड़े जिले में आता है।

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कटिहार के हीमोफीलिया मरीजो कोLife-saving फेक्टर 8 इंजेक्शन लेने के लिए पटना या बंगाल जाना पड़ता है। वैसे सुशासन वाली नितीश सरकार ने दावे धरातल बहुत खोकलें है ये हम जानते हैं। बिहार स्वस्थ्य मंत्री मंगल पाडे भले ये कहते हो कि बिहार स्वस्थ्य व्यवस्था बेहतर हो गया है। परंतु कड़वी सच्चाई यही है कि बिहार के स्वस्थ्य व्यवस्था ICU में है। कुछ दिन पुर्व ही कटिहार के स्थानीय अखबार में मिरचाईबाड़ी के एक दंपति ने अपने पुत्र के लिए  फेक्टर 8 इंजेक्शन के लिए बिहार के डिप्टी cm व मुख्यमंत्री से कटिहार जिले के मेडिकल कॉलेज या सदर अस्पताल उपलब्ध करवाने की मांग की थी।  आपको बता दे कि इंजेक्शन महंगी और Life-saving होने के वजह से केवल सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में ही उपलब्ध है।

आपको ये बता दे कि इस खबर के छोटा हिस्सा अखबार के जरिए बताया था परंतु आज हम संपुर्ण जानकारी देंगे। जिसमें सवालो घेरे में आएगी। नितीश कुमार के सुशासन वाली सरकार साथ उनके स्वस्थ्य मंत्री। 

सबसे पहले हम आपको हीमोफीलिया के बारे में बता देते है।hemophilia kya hai

हीमोफीलिया आनुवांशिक बीमारी है जिसमें ख़ून का थक्का बनना बंद हो जाता है। यह बीमारी रक्त में थ्राम्बोप्लास्टिन (Thromboplastin) नामक पदार्थ की कमी से होती है। थ्राम्बोप्लास्टिक में खून को शीघ्र थक्का कर देने की क्षमता होती है। खून में इसके न होने से खून का बहना बंद नहीं होता है। ये बिमारी शरीर में एक प्रोटीन की कमी वजह से होती है। इस बीमारी के लक्षण हैं : शरीर में नीले नीले निशानों का बनना, नाक से खून का बहना, आँख के अंदर खून का निकलना तथा जोड़ों (joints) की सूजन इत्यादि।वर्तमान समय  में इसका संपुर्ण उपचार नहीं आया है। वर्तमान में समय एक मात्र उपचार clotting factors से होता है। जिस से शरीर में कमी प्रोटीन की पुरी हो जाती है। डाक्टर ये मानते है कि इस बिमारी में अगर मरीज को सही टाइम फेक्टर उपलब्ध नहीं होता है। तो फिर ये बिमारी जानलेवा भी बन जाता है। आपको बता दे कि कटिहार व सिमांचल क्षेत्र  में फेक्टर उपलब्ध नहीं है। जिस कारण यहाँ के हीमोफीलिया मरीजो को 2 या 3 दिनो में पटना या बंगाल जाना पड़ता है। इस वजह से इन मरीजो बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता है। 

Super exclusive खुलासा करने जा रहे जिसमें सवालो के घेरे आ जाए गे स्वस्थ्य मंत्री

कटिहार व सिमांचल के हीमोफीलिया मरीजो के समस्या को लेकर शांति देवी बिहार के स्वस्थ्य मंत्री Mangal Pandey (मंगल पांडे) 26 फरवरी को मिलने गई थी।  जिसके बाद स्वस्थ्य मंत्री Mangal Pandey आश्वासन दिया था। परंतु आज चार महीने से ज्यादा हो गया है। लेकिन अबतक कटिहार हीमोफीलिया मरीजो फेक्टर उपलब्ध नहीं हो पाई है। शांति देवी ने हम से खास बातचीत बताया है कि उनके पुत्र को हीमोफीलिया बिमारी है। जिसके उन्होंने कटिहार सांसद से लेकर बिहार डिप्टी सीएम से लेकर हर नेता एप्लीकेशन दे चुकी है। परंतु आज भी Life-saving इंजेक्शन के जरूरी पड़ने फेक्टर 8 बंगाल या पटना जाना पड़ता है। इसके साथ उन्होंने एक  एप्लीकेशन दिखाए जो कि कटिहार के सांसद दुलाल चंद्र गोस्वामी ने बिहार के स्वस्थ्य मंत्री लिखा था। जिसमें सांसद ये माना था कि उनके क्षेत्र में बहुत ही हीमोफीलिया मरीज है। चलिए हम आपको दिखाते वो एप्लीकेशन। 

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इस साबित होती है कि बिहार के स्वस्थ्य व्यवस्था कितनी लचर है। आपको ये भी बता दे जो फेक्टर है वो केवल सरकार द्वारा निधारित मेडिकल कॉलेज व सदर अस्पताल मिलती है। लेकिन दुख बात है कि बिहार सुशासन वाली सरकार गहरी नींद में सो रही है।

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