Hathras Kand Report : हाथरस व बलरामपुर घटना हमे सोचने मजबुर कर रही हमारी समाज society ऐसी कौन कमी जो जो ऐसी घटना लगातार हो रही , हाथरस की बेटी दलित थी तो फिर बलरामपुर की बेटी भी तो दलित कबतक हमारे नेता ऐसी ही selective सोच रखेगी..

नमस्कार दोस्तों हाथरस की घटना बहुत ही दुर्भाग्यपुर्ण दोषियों पर सख्त से सख्त सजा हो, वही दुसरी घटना युपी के बलरामपुर घटी है , बलरामपुर में भी दलित महिला के साथ वीभत्स बलात्कार (rape) और हत्या का मामला हुआ। परंतु दुसरे घटना में हमारे पॉलिटिक्स टूरिस्ट जाने वाले नेता खामोश है जानते हैं , क्योंकि आरोपी मुसलमान है , बलरामपुर घटना कुछ कहने से इनकी वोट बैक खतरे आ जाएगा ।  इसलिए अब हमारे विपक्ष नेता कुछ भी नही कहेंगे। यही देश का दुर्भाग्य है कि अगर कोई मुस्लिम अपराध करे तो हमारे देश सेक्युलर नेता,  बुद्धिजीवी गैंग , वामपंथी और लिबरल गैंग खामोश हो जाते है। लेकिन हमारा मानना है कि आरोपी किसी धर्म का रहे लेकिन रेप करने वाले सजा फाँसी ही होना चाहिए। हम विपक्ष नेताओ तरह selective सोच नही रखते हर बेटी इंसाफ मिले। हमारी सोच है यही है।

Hathras rape case

हाथरस व बलरामपुर घटना हमे एक समाज के तौर सोचने मजबुर करती आखिर हमारी समाज किस और जा रहा

लगातार ही हो रही रेप घटना एक समाज तौर हमे सोचने पर मजबुर करती है , हमारा समाज किस और जा रहा है । हमारी समाज के लिए विचारणीय प्रश्न चिंह खड़ा हो रहा कि सामाजिक स्तर ऐसी कौन सी कमी जो अक्सर ऐसे घटना लगातार ही सामने आ रहे है। ये भी इस देश दुर्भाग्य है कि बस कुछ घटना मिडिया के सुर्खियो में आती है। वरना नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े कहती हैं कि 2018 में हर दिन 91 महिला ने बलात्कार (rape) होती है। जबकि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो  2014  के एक आंकड़े अनुसार देश में  हर 14 मिनट में रेप की एक घटना सामने आती है। शायद वास्तविकता इस से भयानक हो सकती है। आज भी ऐसी कई मामले जो दबा दिया जाता है जिसमें कई मामले पुलिस  पहुचंती है तो पुलिस एफआईआर दर्ज नही करती है ,और ये आकड़े 2020 के नही 2018 के है , शायद वर्तमान मे मामले इस अधिक भी हो सकता है । हमारे समाज के लिए प्रश्न है कि क्या हर घटना मोमबत्ती जला और सोशल मीडिया विरोध जता कर भुल जाते है।

सुप्रीम कोर्ट पीड़िता (Victim) नाम व फोटो कभी सार्वजनिक करने मना किया

बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न हमारे देश के उन नेताओ के लिए जो हर घटना में जाति तलाश करते है।। वास्तव में पीड़िता के साथ बलात्कार (rape) पहली बार आरोपी ने किया लेकिन दुसरी बार हमारी देश की राजनीति (Politics) ने किया है। जिस देश उच्चतम न्यायालय (Supreme court) ने एक मामले कहा था रेप पीड़िता (Victim) नाम कभी सार्वजनिक नही करना चाहिए। क्या इस देश में  उच्चतम न्यायालय (Supreme court) आदेश पालन नही किया जाएगा। आज परिस्थिती ऐसी बन चुका है। सोशल मीडिया जरिए आसानी रेप पीड़िता (Victim) नाम तस्वीरे वायरल कर दी जाती है। जो बिल्कुल उचित नही है। मैंने इस ब्लॉग में पीड़िता (Victim) नाम बिल्कुल नही लूंगा क्योंकि हम उच्चतम न्यायालय  (Supreme court) सम्मान करते है। इस लिए हम इस ब्लॉग में पीड़िता (Victim) को हाथरस (Hathras) निर्भया कहेंगे और बलरामपुर पीड़िता (Victim) बलरामपुर निर्भया कहेंगे।हम चाहते है कि दिल्ली निर्भया न्याय मिलने मे जितनी देरी उतनी हाथरस व बलरामपुर की निर्भया मामले ना हो।

(Victim) दलित हो और आरोपी सवर्ण हमारे देश नेताओ के लिए  पॉलिटिक्स टूरिस्ट स्पॉट बन जाता है?

देश का सविधान बना हमारा सविधान सभी के लिए बराबर है, ऐसी घटनाए होती, पीड़िता (Victim) दलित हो और आरोपी सवर्ण हमारे देश नेताओ के लिए पॉलिटिक्स टूरिस्ट स्पॉट बन जाता है। सभी पार्टी के नेता अपनी राजनीति रोटी सेंकने व्यस्त है। इन्हे भला क्यों फर्क पड़े , इस देश में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े कहती हैं कि भारत में 2018 में हर दिन 91 महिला ने बलात्कार (rape) वरदात होती है। और वही  नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के 2014 के आंकड़ों के मुताबिक देश में हर एक घंटे में 4 रेप की वारदात होती हैं। यानी हर 14 मिनट में रेप की एक वारदात सामने आती है। राजनीति दलो से प्रश्न है कि अपनी राजनीति (Politics)  महत्वाकाक्षाओ के लिए रेप पीड़िता (Victim) इस्तेमाल करना कहा तक उचित है , क्या इस देश नेताओ थोड़ी शर्म नही बची है। कुछ नेताओ के  नजर में होगी वो दलित की बेटी मेरी नजर में वो भारत की बेटी थी,  जिसके कातिल को फाँसी सजा अविलंब होना चाहिए। जरूर सोचिए गा ऐसी (Dirty politics ) अर्थात गंदी राजनीति करने वाले नेताओ मानसिकता अंदाजा आप इस बात से लगा ही सकते है। जिन्हे हर मुद्दा में वोट बैक दिखे वैसे नेता भला किसी बेटी इंसाफ (Justic) दिला सकते है। हाथरस (Hathras) निर्भया अविलंब  इंसाफ (Justice) मिले।

न्यायपालिका प्रश्न चिन्ह खड़े होते है

प्रश्न चिन्ह इस देश के न्यायपालिका पर भी खड़े होते है। क्योंकि  हमारे न्यायपालिका में कोई मामला जाता है तो निर्णय आने बहुत देरी होती , जिस वजह अक्सर ये देखा लचर कानून फायदा उठा आरोपी बच जाते है। ये सब मानते हैं कि अगर कानून सख्त हो तो शायद अपराधिक मामलों की संख्या बहुत कम हो जाती कमजोर कानून और इंसाफ मिलने में देर भी बलात्कार (rape) की घटनाओं के लिए जिम्मेदार है।  देखा जाए तो प्रशासन और पुलिस कमजोर नही हैं, कमजोर है उनकी सोच और समस्या से लड़ने की उनकी इच्छा शक्ति पैसे वाले जब आरोपों के घेरे में आते हैं तो उन्हें कटघरे के बजाय बचाव के गलियारे में ले जाती हैं। पुलिस की लाठी बेबस पर जितजुलढाती है सक्षम के सामने वही लाठी सहारा बन जाती है। अब तक कई मामलों में कमजोर कानून से गलियां ढूंढ़कर अपराधी के बच निकलने के कई कहानी  सामने आ चुके हैं। कई बार सबूत के आभाव में न्याय नहीं मिलता और अपराधी छूट जाता है।

पॉर्न  देखने में भारत का रेकिंग?

पॉर्न विडियो देखने में भारत रेकिंग तीसरे नंबर है , आप सोचिए उस देश स्थिती क्या होगी , जिस देश में इतने ज्यादा पॉर्न देखा जाता है। ये हमारा देश गर्व की नही शर्म बात होनी चाहिए। सोशल मीडिया अच्छा है तो खराब भी है। सस्ते इंटरनेट डाटा और स्मार्टफोन की बढ़ती बिक्री के साथ देश में पोर्न वेबसाइट देखने वालों की संख्या भी बढ़ी है। पिछले 4 साल में जहां डाटा की खपत 56 गुना बढ़ी है। वहीं दुष्कर्म (rape) की घटनाएं भी बढ़ी है। एक निजी अखबार छपी खबरों की मानें तो पिछले 4 साल में देश में डाटा की दरें 99% कम हुई। 2016 से 2019 के बीच कीमत में लगातार कमी से भारत दुनिया में सबसे सस्ता डाटा उपलब्ध कराने वाला देश बना है। दुनिया में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली एक पोर्न वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत में 2018 में औसतन 8.23 मिनट तक पोर्न वीडियो देखा गया जबकि 2019 में 9.51 मिनट हो गई है। देश में कुल 89% मोबाइल पर जबकि 9% डेस्कटॉप का पोर्न देखने के इस्तेमाल किया जाता है। जो कि किसी अन्य देशों से 12% अधिक है। अगर औसत उम्र की बात करें तो 30 वर्ष की आयु को लोग पोर्न देखते हैं। 18 से 24 साल के युवाओं का आंकड़ा 31 % है। पोर्न देखने वालों में 67% पुरूष जबकि 33% महिलाएं हैं। पुरूषों की संख्या अन्य देशों के अनुसार  3% ज्यादा  है।

निर्भया कांड बाद भी ये देश क्यों नही बदला

निर्भया कांड के बाद भी हमारे देश का स्थिती क्यों नही बदला सवाल यही है कि हमारे समाज की अंदर ऐसी कौन सी कमी है। जो अक्सर ऐसी घटना सामने आ रही , ये गंभीर विषय है कि हमारे समाज (society) में इस विषय चर्चा होना चाहिए , समाज के अंदर ऐसी सोच जड़ से मिटाना चाहिए। देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले प्राचीन से 15 अगस्त दिए भाषण में उन्होंने कहा कि जब  बेटियों से तो हमेशा सवाल करते हैं लेकिन बेटों से भी तो पूछो, जिसने ये सब किया वो भी तो किसी का बेटा है। ये विकृति है और देश के लिए चिंता विषय है।

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