gyanvapi masjid faisla : ज्ञानवापी में हिन्दूओ का पहला जीत, मिलिए जीत के असली नायक पिता-पुत्र से।।

gyanvapi masjid faisla : 12 सितम्बर का दिन ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष के लिए एक खास दिन रहा। आज के दिन इस बात का फैसला आना था कि क्या इस मामले में आगे सुनवाई होगी या नहीं और कोर्ट ने हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए हर पहलू पर फिर से सुनवाई करने की इजाज़त दे दी है।

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जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र को खारिज करते हुए कहा कि “चर्चाओं और विश्लेषणों को ध्यान में रखते हुए, मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि अभियोगी का मुकदमा पूजा स्थल स्पेशल प्रोविज़न एक्ट 1991, वक्फ एक्ट 1995 और यूपी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर एक्ट 1983 द्वारा प्रतिबंधित नहीं है और अंजुमन इंतेजामिया द्वारा दायर आवेदन 35सी बर्खास्त किए जाने योग्य है।”

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यह फैसला आने के बाद हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि, “आज का दिन काफी महत्वपूर्ण था। उम्मीद के मुताबिक फैसला हमारे पक्ष में आया है। कोर्ट में मस्जिद कमेटी की तरफ से 1991 के प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट का हवाला दिया गया था। हम लोगों ने बहुत वैज्ञानिक तौर पर अपने तर्क कोर्ट में रखे थे। हमारा पक्ष बहुत मजबूत था और अब हम एएसआई सर्वे और शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग करेंगे।”

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यह कहना बिलकुल गलत नहीं होगा कि जीत की तरफ यह पहला कदम सिर्फ पिता हरिशंकर जैन और पुत्र विष्णु शंकर जैन की जोड़ी की वजह ही संभव हो पाया है। दोनों पिता-पुत्र का मुख्य लक्ष्य हिंदू राष्ट्र है। पिता हरिशंकर जैन एक गौरवान्वित हिंदू हैं जो आपको हमेशा बड़ी दाढ़ी और माथे पर एक तिलक के साथ ही दिखेंगे।

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दोनों अब तक बाबरी मस्जिद, ज्ञानवापी मस्जिद, ताज महल और कुतुब मीनार सहित 102 केस लड़ चुके हैं। बाबरी मस्जिद का नतीजा तो हम सब जानते ही हैं और इस पिता-पुत्र की जोड़ी की लगन और मेहनत से हम ज्ञानवापी का मुकदमा भी ज़रूर जीत सकते हैं क्योंकि अदालत में ये पूरी तरह से तर्कसंगत ढंग से अपनी बात रखते हैं, और यही वजह है कि हम आज यह खुशी का दिन देख रहे हैं।

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इस फैसले को हिंदू पक्ष के लिए जीत

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इस फैसले को हिंदू पक्ष के लिए जीत की तरफ एक बड़े कदम की तरह देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि फिर से सुनवाई होने से विष्णु जैन शंकर अपनी बात को अदालत के सामने और अच्छी तरह से रख पाएंगे और हिंदू पक्ष को जिता सकेंगे लेकिन ध्यान देने योग्य बात है कि मुस्लिम पक्ष अभी भी इस मामले में हाईकोर्ट और सु्प्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है।

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जहाँ एक तरफ खुशी की लहर हैं तो वहीं मुस्लिम पक्ष के वकील मेराजुद्दीन सिद्दीकी ने अदालत पर बड़ा आरोप लगा दिया है, उन्होंने कहा कि, “ये फैसला न्यायोचित नहीं है और हम फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। जज साहब के ऑर्डर ने संसद के कानून को दरकिनार कर दिया है। हमारे लिए ऊपरी अदालत के दरवाजे खुले हैं। न्यायपालिका आपकी है, आप संसद के नियम को नहीं मानेंगे, तो क्या कह सकते हैं सब लोग बिक गए हैं।“

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आपको बता दें कि यह पूरा मामला बहुत पुराना है पर यह सुर्खियों में तब आया जब वाराणसी की एक अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद में एएसआई को सर्वे करने का निर्देश दिया। वहाँ के पुजारियों ने कोर्ट में याचिका दी थी, जिसमें उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद क्षेत्र में पूजा की अनुमति मांगी थी और साथ ही यह दावा भी किया था कि 16वीं शताब्दी में मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर काशी विश्वनाथ मंदिर के एक हिस्से को गिराकर यहां मस्जिद बनवाई गई थी|

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लेकिन यह केस कुछ वक्त बाद बंद हो गया और उसके बाद भी कई बार खुला पर कोई सही फैसला नहीं आ पाया और इस बार दिल्ली की पांच महिलाओं ने ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवारों पर मौजूद हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों की नियमित तौर पर पूजा-अर्चना करने के लिए इजाजत मांगते हुए याचिका दायर की थी।

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फिर 20 मई को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले को सिविल जज की कोर्ट से जिला जज की कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया था, 24 मई को जिला जज ने केस की मेरिट पर सुनवाई का आदेश दिया। उसके बाद 24 अगस्त को सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया और आज 12 सितम्बर को कोर्ट ने फैसला सुनाकर दिया।

धर्म-सुधार आन्दोलन की पृष्ठभूमि


इस पूरे मामले में आप क्या सोचते हैं हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं और वीडियो को लाईक करना बिल्कुल न भूलें।

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