Guru Govind Singh: सिख धर्म के दसवें गुरु गोविंद सिंह की जीवनी Biography

नमस्कार दोस्तों आप सभी स्वागत है हमारे ब्लॉग पर, आप अभी पढ़ रहें है shashiblog.in आज के आर्टिकल में बताएंगे गुरु गोविंद सिंह(Guru Govind Singh) जी की जीवनी (Biography)

Guru Govind Singh Biography



गुरु गोविंद सिंह(Guru Govind Singh) सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे। 7 अक्टूबर को गुरु गोविंद सिंह की 311 वीं पुण्यतिथि है। वह अटूट साहस और भक्ति के प्रतीक थे, साथ ही एक योद्धा, कवि और खालसा पंथ के संस्थापक थे। जब उनके पिता गुरु तेग बहादुर का इस्लाम स्वीकार ने करने पर सिर कलम कर दिया गया|तब गुरु गोबिंद सिंह को नौ साल की उम्र में सिखों का दसवां गुरु बनाया गया था।


गुरु गोविन्द सिंह की जीवनी (Biography)
जन्म तिथि : 22 दिसम्बर 1666मृत्यु तिथि : 7 अक्टूबर 1708गुरु में पद :           10वें गुरु थेमाता-पिता का नाम :गुजरी जी और गुरु तेग बहादुर जीपत्नीयों के नाम :जीतो जी, सुंदरी जी, साहिब देवन जीबेटों के नाम : जुझार सिंह, जोरावर सिंह ,फ़तेह सिंह, अजित सिंह

जीवन का परिचय(Introduction to life)


गुरु गोविंद सिंह(Guru Govind Singh) का जन्म 5 जनवरी, 1666 को बिहार के पटना साहिब में हुआ था। उनके पिता, तेग बहादुर, सिखों के नौवें गुरु थे और उनकी माँ गजरी थीं। उनके बचपन का नाम गोविंद राय(Govind Rai)था। उन्होंने अपने बचपन के चार साल पटना में बिताए,जहाँ अब तख्त श्री पटना साहिब स्थित है| 1670 में उनका परिवार पंजाब चला गया और बाद में हिमालय की शिवालिक पहाड़ियों में चला गया। यहीं पर उनकी शिक्षा (Education) वही पर चक्क नानकी नामक स्थान पर उनकी शिक्षा शुरु हुई। इस स्थान का वर्तमान में आनंदपुर साहिब के नाम से पुकारा जाता है|
वह फारसी और संस्कृत में शिक्षित थे। उन्होंने शिक्षा में सैन्य प्रशिक्षण भी दिया। उनके पिता ने अपनी मृत्यु से ठीक पहले गुरु गोबिंद सिंह को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था।
गुरु तेग बहादुर ने मुसलमानों के खिलाफ कश्मीरी पंडितों को जबरन धर्मांतरित करने का विरोध किया। उन्होंने मुगल शासक औरंगज़ेब से शिकायत की और शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण वातावरण के लिए अनुरोध किया। इस पर, औरंगज़ेब ने उनकी बात नहीं मानी, लेकिन उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया और 11 नवंबर, 1675 को उनका सिर काट दिया गया। गुरु गोबिंद सिंह ने 29 मार्च 1676 को सिखों के दसवें गुरु के रूप में अनुसरण किया। कम उम्र में गुरु बनने के बाद भी उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी। अपनी पढ़ाई के साथ उन्होंने घुड़सवारी और धनुष सवारी चलाना आदि का ट्रेनिंगप्राप्त किया। उन्होंने साल 1684 में चंडी दी वार कि रचना की। साल 1684 में उन्होंने पंजाबी भाषा में चंडी दी वारलिखी। उन्होंने वर्ष 1685 तक यमुना नदी के किनारे स्थित पांवटा में निवास किया।

विवाहित जीवन

गुरु गोविंद सिंह(Guru Govind Singh) ने तीन विवाह किए। उन्होंने पहली शादी मां जीतू से 10 साल की उम्र में की थी। उन्होंने दूसरी शादी 17 साल की उम्र में 4 अप्रैल, 1684 को आनंदपुर में माता सुंदरी से हुई। इससे उनके एक बेटा अजीत सिंह का जन्म हुआ था। उनकी तीसरी शादी 15 अप्रैल, 1700 को 33 वर्ष की आयु में माता साहिब देवन से की। उन्होंने दूसरी शादी 17 साल की उम्र में 4 अप्रैल, 1684 को आनंदपुर में माता सुंदरी से हुई। इससे उनके एक बेटा अजीत सिंह का जन्म हुआ था। उनकी तीसरी शादी 15 अप्रैल, 1700 को 33 वर्ष की आयु में माता साहिब देवन से की।

चार बेटे थे

उनकी पहली पत्नी से उनके तीन बेटे थे, जिनमें जुजार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह शामिल थे। गुरु जी के चार बेटे थे जिनमें से बड़े दो बेटे(अजीत सिंह और जुह्गार सिंह) युद्ध में शहीद हुए और छोटे दो बेटे जोरावर सिंह और फतहि सिंह को
मुगलों ने ज़िंदा दीवार में चिनवाया था। इस महान शहीदी के बाद ही सिख धर्म लोग इन चार बेटो के नाम के आगे बाबालगाकर उनका सम्मान करते हैं।

खालसा पंथ की स्थापना

Guru Govind Singh Biography

गुरु गोविंद सिंह(Guru Govind Singh) ने सन् 1699 में बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की, जोकि सिख धर्म के विधिवत् दीक्षा प्राप्त अनुयायियों का एक सामूहिक रूप था| प्रकृति का नियम यह है कि जब भी कोई अत्याचार, अन्याय, उत्पीड़न का करता है, | तो उसका समाधान करने तथा उसके उपाय के लिए कोई वजह भी बन जाता है| इसी वजह से जब मुगल शासक औरंगजेब ने अत्याचार, अन्याय और उत्पीड़न की हर सीमा पार कर ली| श्री गुरु तेग बहादुरजी को दिल्ली में चाँदनी चौक पर शहीद कर दिया गया| तब गुरु गोविंद सिंह(Guru Govind Singh) ने अपने अनुयायियों को जुटाया और धर्म के उद्देश्य खालसा पंथ की स्थापना की जिसका लक्ष्य था धर्म व नेकी भलाई के आदर्श के लिए सदैव तत्पर रहना| पुरानी परंपरा से ग्रसित निर्बल, कमजोर व साहसहीन हो चुके लोग, सदियों की राजनीतिक और मानसिक गुलामी के वजह से कायर हो चुके थे| पिछ्ड़ी जाति के समझे जाने वाले लोगों को जिन्हें समाज तुच्छ समझता था,दशमेश पिता ने अमृत छकाकर सिंह बना दिया। इस प्रकार, 13 अप्रैल 1699 को दसवें गुरु गोविंद सिंह(Guru Govind Singh) जी ने सिरसा जी साहिब आनंदपुर में खालसा पंथ की स्थापना की और उत्पीड़न को समाप्त किया।उन्होंने सभी जातियों के लोगों को एक ही अमृत पात्र बाटे से अमृत छका पाँच प्यारे सजाए। ये पाँच प्यारे किसी एक जाति या स्थान के नहीं थे, महत्व खालसा के लिए समझाया, जो केश, कंघा, कड़ा, किरपान, कच्चेरा थे।

गुरु गोबिंद सिंह जी की मृत्यु कब हुई थी? Shri Guru Gobind Singh Ji Death

सेनापति श्री गुर सोभा के अनुसार गुरु गोविंद सिंह(Guru Govind Singh) के ऊपर एक गहरी चोट लग गयी थी। जिसके वजह से 7 अक्टूबर, 1708 को, हजूर साहिब नांदेड़, नांदेड़ में 42 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई|

Leave a Reply

Infinix Zero 5G Goes Official in India as the Brand’s First 5G Phone: Price, Specifications Happy Hug Day 2022: Wishes, Messages, Quotes, Images, Facebook & WhatsApp status IPL Auction 2022 Latest Updates Happy New Year Wishes 2022 Happy New Year Wishes 2022 Happy New Year 2022 Wishes Omicron Variant: अमेरिका में ओमिक्रॉन वैरिएंट का पहला मामला