Uniform Civil Code: गोवा के यूनिफॉर्म सिविल कोड में हिंदुओं को कई शादियां का इजाजत और जानें क्या-क्या हैं नियम

अमित शाह कुछ दिन पहले ही असम में भाजपा के नेताओ के बैठक बोले कि अब यूनिफॉर्म सिविल कोड की बारी है। इसी बाद देश में एक बार फिर से यूनिफॉर्म सिविल कोड की चर्चा जोर पकड़ रही है। जैसा कि उत्तराखंड ने तो UCC तैयार करने के लिए कमिटी बनाने का भी ऐलान कर दिया है। कई भाजपा शासित प्रदेश यूनिफॉर्म सिविल कोड का समर्थन कर रहे है। लेकिन आज इस लेख जरिए हम गोवा के यूनिफॉर्म सिविल कोड के बारे में बताए गे। जैसा कि आप जानते हैं कि गोवा एकमात्र ऐसा राज्य जहाँ यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है। लेकिन आज हम आपको ये भी बताएगे कि डेढ़ सौ साल से भी पुराने गोवा के कानून में ऐसी कौन से बातें हैं जो कि आज के कानून के उलट हैं। जैसे कि गोवा के यूनिफॉर्म सिविल कोड में हिंदुओं को बहुविवाह की छूट दी गई है लेकिन मुस्लिमों को इजाजत नहीं है।

Uniform Civil Code

वास्तव में यूनीफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) का मतलब होता है कि तलाक, विवाह, बच्चा गोद लेना और संपत्ति के बंटवारे जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक जैसा कानून होना। संविधान के अनुच्छेद 44 में भी ऐसी उम्मीद जताई गई थी कि भविष्य में यूनीफॉर्म सिविल कोड की अवश्यकता पड़ेगी।

जैसा कि आप जानते हैं कि फरवरी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐलान किया था कि अगर पार्टी राज्य में चुनाव जीतती है तो यूनीफॉर्म सिविल कोड लागू की जाएगी। चुनाव जीतने के बाद उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड तैयार करने के लिए कमिटी बनाने का भी ऐलान कर दिया।
 

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से केंद्र का जवाब मांगे जाने के बाद कई भाजपा शासित प्रदेशों ने यूनिफॉर्म सिविल कोड की वकालत की। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वासरमा ने कुछ दिन पहले कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड से मुस्लिम महिलाओं को उनके अधिकार मिलेंगे। कोई मुस्लिम महिला नहीं चाहती है कि उसकी पति की दो शादियां हों। जब भी किसी राज्यों में उनके अपने यूनिफॉर्म सिविल कोड की बात की जाती है तो वे गोवा का उदाहरण देते हैं। गोवा में 1869 से ही यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है और यह पुर्तगाली कानून है। आइए जानते हैं क्या है गोवा का यूनिफॉर्म सिविल कोड लॉ।

 
गोवा में क्या है लॉ ?

1867 में पुर्तगालियों ने यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाया था और उसके बाद इसे अपने उपनिवेशों (Colonies) में भी लागू कर दिया। गोवा में भी 1869 में इस कानून को लागू कर दिया गया। इस कानून के अनुसार विवाह का रजिस्ट्रेशन सिविल अथॉरिटी के पास कराना अवश्यक है। उसके मुताबिक अगर तलाक होता है तो महिला भी पति कि हर संपत्ति में आधी की हकदार है। इसके अलावा पैरंट्स को अपनी कम से कम आधी संपत्ति का मालिक अपने बच्चों को बनाना पड़ेगा जिसमें बेटियां भी शामिल होंगी।

गोवा लॉ कमिशन की पूर्व सदस्य ऐडवोकेट

क्लियोफाटो अलमेदा के मुताबिक गोद लेने और शादी को लेकर इसमें पूरी तरह से एकरूपता नहीं है। पुर्तगाली सिविल कोड गोवा और दमन दीव में लागू है। समझौते के अनुसार गोवा की आजादी के समय कहा गया था कि जब तक किसी कंपीटेंट अथॉरिटी द्वारा इस कानून को रीप्लेस नहीं किया जाता। यह लागू रहेगा। अब हाल यह है कि पुर्तगाल में यह कानून हट गया है लेकिन गोवा में लागू है। पुर्तगाल में साल 1966 में ही नया सिविल कोड लागू कर दिया गया था।

हिंदुओं को बहुविवाह की छूट

गोवा के यूनिफॉर्म सिविल कोड में मुस्लमों को बहुविवाह की इजाजत नहीं दी गई है। लेकिन हिंदुओं को विशेष परिस्थिति में इसकी छूट दी गई है। अगर किसी हिंदू की पत्नी 21 साल की उम्र तक किसी बच्चे को जन्म नहीं देती है या फिर 30 की उम्र तक लड़के को जन्म नहीं देती है तो वह दूसरा विवाह कर सकता है। इस मुद्दे को लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने उठाया और कहा था कि गोवा में हिंदुओं को भी कई शादियां करने की इजाजत दिया गया है।

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