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जाने उस किले कहानी जिसे खोजने के लिए इंदिरा ने बुलाई थी सेना, आज़तक बना है रहस्य…

मौजूदा दौर में भारत की इकोनॉमी  स्थिति भले Global Economy  के समकक्ष शिथिल पड़ गई हो। जैसा कि आप जानते हैं कि प्राचीन काल में भारत को ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था। तो उसके पीछे का वजह भी स्पष्ट है कि प्राचीन काल में भारत धन-धान्य से परिपूर्ण था।

Global Economy jaigarh fort history when indira gandhi government

मध्यकाल काल में भारत पर कई आक्रमण

मध्यकाल में जब भारत पर कई आक्रमण हुए तो,  यहां के राजा-महाराजाओं ने अपनी धन-संपदा को बचाने के लिए उन्हें छुपा दिया। आईए आज हम आपको एक ऐसे ही ख़ज़ाने के बारे में बतानें जा रहे हैं। बताता जाता है कि ख़ज़ाने पर गांधी-नेहरू परिवार की थी नजऱ और ऐसा बताया जाता है कि इंदिरा गांधी ने उस खजाने को खाली करने में निभाई थी अहम भूमिका।

1975-76 की जब देश में emergency लगा हुआ था। इसी वक्त IT विभाग ने जयपुर राजघराने के महलों पर छापे मारे और सेना ने इस किले की तलाशी लिया । ध्यान देने वाली बात ये है कि केंद्र ने सेना की सहायता लेकर खजाने की खोज में कुछ महीनों तक दुर्ग में खुदाई करवाए।

जानकारी के लिए बता दे कि यह वही खजाना था जो राजा मान सिंह अफगानिस्तान पर आक्रमण कर लाए थे।और आखिर एक दिन जयपुर-दिल्ली हाईवे को बंद कर दिया गया। तब चर्चा रही कि केंद्र ने लोगों को धोखे में रखकर खजाना उस बंद हाईवे से ट्रक भरकर दिल्ली पहुंचाया है।

लेकिन सरकार ने स्पष्ट तौर पर इनकार किया कि उन्हें किले से कोई खजाना नहीं मिला हैं। लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा हो रहा है , अगर सरकार को खजाना नहीं मिला तो फिर गया कहां ? जानकारी बता दे कि कई लोगों ने RTI दाखिल कर लगाकर ही  सरकार से खजाने के बारे में जानना चाहा। लेकिन विभागों द्वारा इस सम्बन्ध में उनके पास कोई सूचना न होने का हवाला दिया गया। हर बार जनता को गुमराह किया गया।

जानिए इतिहासकार क्या कहते है

इतिहासकार मानते हैं कि अकबर के दरबार में सेनापति जयपुर के राजा मानसिंह (प्रथम) ने मुगल शहंशाह के आदेश पर अफगानिस्तान पर हमला किया था। उसी अफगानिस्तान पर, जहां अब तालिबान ने कब्जा कर रखा है। और तब उस क्षेत्र को जीतने के बाद राजा मानसिंह को काफी धन-दौलत हासिल किया था।

बताया जाता है कि उन्होंने इसे दिल्ली दरबार में सौंपने की जगह अपने पास ही रख लिया और जयगढ़ किले के निर्माण के बाद ऐसा कहा जाने लगा कि इसमें पानी के संरक्षण के लिए बनी विशालकाय टंकियों में सोना-चांदी और हीरे-जवाहरात छिपाकर रखे गए हैं।

आपको ये भी बता दे कि जयगढ़ किले में खजाने की बात देश को आज़ादी मिलने के बाद भी अक्सर चर्चा में आती रही और उस समय जयपुर राजघराने के प्रतिनिधि राजा सवाई मान सिंह (द्वितीय) और उनकी पत्नी गायत्री देवी थी। स्वतंत्र पार्टी  के सदस्य थे और
ये दोनों लोग कांग्रेस के धुर विरोधी थे। गायत्री देवी तीन बार जयपुर से कांग्रेस के प्रत्याशी को परास्त करके लोकसभा के सदस्य बनी। इसी बीच राजघराने के कांग्रेस पार्टी से संबंध बहुत ही बुरा रहा था।

ऐसे में जब देश में आपातकाल लगा तब गायत्री देवी ने इसका मुखर विरोध किया और इंदिरा गांधी सरकार ने इसी वजह से IT का विभाग आदेश दिया कि वो राजघराने की संपत्ति की जांच करे । फिर 1976 में सरकार की इस कार्रवाई में सेना की एक टुकड़ी भी शामिल गई। ऐसा कहा जाता है कि जयगढ़ किले में खजाना खोजने की जिम्मेदारी सेना को मिली, उसके बाद सेना ने तीन महीने तक जयगढ़ किले और उसके आसपास खजाने खोजने की अपेरेशन जारी रखा।  और इस खजाना खोजी अभियान समाप्त होने के बाद  सरकार ने औपचारिक रूप से कहा कि किले से किसी तरह की संपत्ति नहीं मिली।

इसके बाद जब सेना के भारी वाहनों को दिल्ली पहुंचाने के लिए जब दिल्ली-जयपुर राजमार्ग एक दिन के लिए बंद किया गया। तो यह चर्चा जोरों से चल रही थी कि सेना के वाहनों में राजघराने की संपत्ति है। लेकिन इसके बाद में इस बात की कभी भी पुष्टि नहीं हो पाई है और अभीतक यह बात एक रहस्य ही है।

पाक पीएम भुट्‌टो ने मांगा था पाकिस्तान का हिस्सा

1976 के अगस्त महीने में पाक पीएम भुट्टो ने इंदिरा गांधी को एक पत्र लिखा कि आपकी सरकार जयगढ़ में खजाने की खोज कर रही है। इस बाबत पाकिस्तान अपने हिस्से की दौलत का हकदार है। इस कारण है कि विभाजन के वक्त ऐसी किसी दौलत की अविभाजित भारत को जानकारी नहीं थी। विभाजन के पूर्व के समझौते के मुताबिक जयगढ़ की दौलत पर पाकिस्तान का हिस्सा बनता है। भुट्टो ने लिखा था कि, पाकिस्तान को यह पूरी आशा है कि खोज और खुदाई के बाद मिली दौलत पर पाकिस्तान का जो हिस्सा बनता है वह उसे बगैर किसी शर्तों के दिया जाएगा।

दोस्तों आपको क्या लगता है कि इस खजाने रहस्य कभी सामने आएगा .. अपनी टिपण्णी जरूर दे।।।

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