Saturday, October 16, 2021
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कृष्ण और राम के बिना अधूरा है भारत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- राम और कृष्ण अपमान पुरे देश का अपमान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है।

आजकल दौर में हिन्दू देवी-देवताओ मजाक उड़ा बहुत ही आसान हो गया है। इसी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त टिपण्णी की है।असल में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कृष्ण और राम के बिना अधूरा है भारत। जानिए विस्तार से

इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बताया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है। कुछ प्रतिबंध भी है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी को दूसरे की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं है। भगवान राम और कृष्ण के विरुद्ध सोशल मीडिया में अश्लील टिप्पणी के मामले में कोर्ट ने कहा कि राम के बिना भारत अधूरा है। जिस देश में रह रहे हैं। उस देश के महापुरुषों व संस्कृति का सम्मान करना अवश्यक है। कोई ईश्वर को माने या न माने, उसे किसी की आस्था पर चोट पहुंचाने का अधिकार नहीं है। हाई कोर्ट के इस सख्त टिपण्णी के बाद अभिव्यक्ति स्वतंत्रता वाले गली गहरी सन्नाटा है।

आकाश जाटव की सशर्त जमानत मंजूर

कोर्ट ने कहा हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की रही है।सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यंतु, मा कश्चित दुःख भाग भवेत।

ऐसा कामना करने वाले लोग हैं। कोर्ट ने भगवान राम कृष्ण के विरुद्ध अश्लील कामेंट करने वाले आकाश जाटव उर्फ सूर्य प्रकाश को दोबारा ऐसी गुनाह न करने की चेतावनी देते हुए कहा कि सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। कोर्ट ने आगे कहा कि पिछले 10 माह से जेल में बंद हैं। विचार शीघ्र पूरा होने की संभावना नहीं है।सुप्रीम कोर्ट ने भी दाताराम केस में निर्णय देते हुए ये कहा कि जमानत अधिकार है और जेल अपवाद। इसलिए जमानत पर रिहा किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने हाथरस के आकाश जाटव की अर्जी पर दिया है।

याचिकाकर्ता कोर्ट में बताया निदोष

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में स्वयं निदोष बताया है। कहा कि 28 नवंबर 19 को किसी ने उसकी फर्जी आईडी तैयार कर अश्लील पोस्ट डाली। वह निर्दोष है।और यह भी तर्क दिया कि संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, जिसे अपराध नहीं माना जा सकता। सरकारी वकील ने दलील देते कहा कि याचिकाकर्ता
अहमदाबाद अपने मामा के घर गया था। जहां अपना सिम कार्ड मामा के लड़के के मोबाइल फोन में लगाकर अश्लील पोस्ट अपलोड किया है। और FIR दर्ज होते ही mobile फोन व सिम कार्ड तोड़कर फेंक दिया है।

कोर्ट ने कहा धर्म न मानने वाला नास्तिक हो सकता है

कोर्ट ने आगे कहा कि संविधान में मूल अधिकार दिए गए हैं। उसी में से अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार भी है। संविधान बहुत लिबरल है। धर्म न मानने वाला को नास्तिक कहा जा सकता है। इससे किसी को दूसरे की आस्था को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं मिल जाता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हवाले कहा कि मानव खोपड़ी हाथ में लेकर नृत्य करने की परमिशन नहीं दिया जा सकता है। यह गुहान है।

ईद पर गोवध पर पाबंदी है

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगे कहा कि ईद पर गोवध पर पाबंदी है। वध करना गुहान है। सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology ) कानून में भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम गैर जमानती अपराध है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है। राज्य में सुरक्षा, अफवाह फैलाना, अश्लीलता फैलाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं आता है बल्कि अपराध है। इस पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तांडव web सीरीज पर कोर्ट ने कहा था कि अभिव्यक्ति के असीमित अधिकार नहीं है। अर्थात ये है कि अभिव्यक्ति स्वतंत्रता संपुर्ण नहीं इसके भी दायरे है।

कोर्ट ने कहा हमारे ऋषि मुनियों ने इंसान को भगवान बनने के रास्ता बताया हैं। टैगोर जी ने कहा कि रामायण महाभारत में भारत की आत्मा के दर्शन होते हैं। महात्मा गांधी के जीवन में भी राम का महत्व रहा है। सामाजिक समरसता रामायण से इतर कहीं नहीं दिखती। सबरी के जूठे बेर खाने से लेकर निषादराज को गले लगाने तक सामाजिक समरसता का ही संदेश दिया गया है।

कोर्ट कहा वसुधैव कुटुंबकम् के भावना किसी अन्य राष्ट्र में नहीं

भगवत गीता में कर्म फल सिद्धांत का वर्णन है।आत्मा अमर है। वह कपड़े की तरह शरीर वैसे बदलती है, जैसे बछड़ा झुंड में अपनी मां को ढूंढ़ लेता है। मन शरीर का हिस्सा है।सुख दुख का एहसास शरीर को ही होता है। भगवान कृष्ण ने बताया था कि कर्म पर ध्यान दो,फल मुझ पर छोड़ो। वसुधैव कुटुंबकम् के भावना अन्य किसी भी राष्ट्र में नहीं है।

धर्म की नुकसान होने पर भगवान अवतार लेते हैं

धर्म रक्षार्थ भगवान आते हैं। धर्म की हानि होने पर भगवान अवतार लेते हैं। भारतीय संविधान में भी भगवान राम सीता के चित्र अंकित है।ऐसे में राम कृष्ण के विरुद्ध अश्लील टिप्पणी माफी मांगने योग्य नहीं है। केवल हिन्दुओं में ही नहीं मुसलमानों में भी कृष्ण भक्त रहे हैं। रसखान,अमीर खुसरो,आलम शेख, वाजिद अली शाह नज़ीर अकबराबादी,राम कृष्ण भक्त रहे हैं। राम कृष्ण का अपमान पूरे देश का अपमान है।

अदालत इस निर्णय के बाद अभिव्यक्ति स्वतंत्रता वाले गैग में एक अजीब से सन्नाटा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट  हाई कोर्ट ने साफ संदेश दे दिया कि अभिव्यक्ति स्वतंत्रता संपुर्ण नहीं इसके भी दायरे है। दोस्तों आपको क्या लगता है , अपनी टिपण्णी कामेंट में जरूर करे…

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