Monday, October 25, 2021
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Farmers Protest: सबसे बड़ा खुलासा पार्ट 2 भारत के विरुद्ध ग्‍लोबल षडयंत्र को समझिए, और जाने कैसे विदेशी शक्तियां रच रहे भारत के लोकतंत्र को कमजोर करने की षडयंत्र ..

greta thunberg expose

आज हम कृषि विधेयक (farm Bill) जरिए भारत खिलाफ हो रहे अंतरराष्‍ट्रीय (International) षडयंत्र बड़ा खुलासा कर करेंगे .. जैसा कि मैंने 26 जनवरी अपनी फेसबुक (Facebook)  live कहा था कि 26 जनवरी लाल किले (lal kella) में जो हुआ वो अमेरिका केपिटल हिल से प्रभावित है। यानी उस दिन मैंंने बता दिया था कि जो दिल्ली लाल किले (lal kella) हमला हुआ , उसमें अमेरिका समेत कई पश्चिम देश ने भारत के लोकतंत्र कमजोर करने की षडयंत्र रच रहे है।भारत दुनिया के सबसे बड़ा लोकतंत्र है , अब वो वक्त नहीं जब मुगल या अग्रेज भारत को  गुलाम बना लेगें ।

अमेरिका समर्थन भारत का 

आज अमेरिका ने कृषि विधेयक (farm Bill)  भारत का समर्थन किया है। अमेरिका के  जो बाइडेन सरकार ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार का पूरा साथ दिया है।जो बाइडेन प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इन कृषि बिलों को कृषि में सुधार आएगा और कृषि अर्थव्यवस्था सुधरेगी। साथ ही यह भी कहा गया है कि इस मुद्दे पर जारी गतिरोध को वार्ता से दूर किया जाना चाहिए। जो बाइडेन प्रशासन का यह बयान बहुत महत्वपूर्ण है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति भांजी कमला हैरिस की भांजी मीना हैरिस ने ट्वीट करके भारत के किसान प्रदर्शनों पर टिप्पणी की है।

greta thunberg expose

उन्होंने लिखा है यह कोई संयोग नहीं है कि एक महीने से भी कम समय पहले दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र पर हमला हुआ था और अब हम सबसे बड़ी आबादी वाले लोकतंत्र पर हमला होते देख रहे हैं. यह एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है. हम सभी को भारत में इंटरनेट शटडाउन और किसान प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाबलों की हिंसा को लेकर नाराज़गी जतानी चाहिए।

अब प्रश्न ये है कि बाइडेन प्रशासन जब समर्थन किया है तो फिर कमला हैरिस की भांजी मीना हैरिस क्यों नहीं समझाया कि किसी देश के आंतरिक मामला ( internal matter) कुछ बोलने बचना चाहिए। में पुछना चाहता हूँ कमला हैरिस की भांजी मीना हैरिस जब केपिटल हिल प्रदर्शनकारी पर अमेरिकी पुलिस गोली चलाई तब क्या अमेरिका लोकतंत्र  (democracy) में कमजोर नहीं हुआ।अगर जवाब हो तो जरूर दे ।

विदेशी षडयंत्र बड़ा खुलासा 

greta thunberg expose

आज हम कुछ तस्वीरों की बात करेंगे। उनमें पहली तस्वीर रिआना की है, जो अमेरिका की मशहूर पॉप सिंगर हैं। दूसरी तस्वीर स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग की है और तीसरी तस्वीर पोर्न फिल्म इंडस्‍ट्री में काम कर चुकी अमेरिका की एक मॉडल मिया खलीफा की है। विश्व की इन तीन बड़ी व्यक्तित्व में इतनी असमानताएं हैं कि उन्हें किसी एक विषय पर साथ देखने के बारे में पहले सोचा भी नहीं जा सकता था। लेकिन किसान आंदोलन इन तीनों को एक साथ ले आया और इससे ये बात साबित होती है कि इस आंदोलन के पीछे बहुत बड़ी शक्ति का हाथ है।

अब हम किसान आंदोलन बहाने विदेशी षडयंत्र रचने वालो पर सबसे बड़ा खुलासा करने जा रहे है। जी हाँ स्वयं को पर्यावरण कार्यकर्ता (environmental activist) बताने वाली ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) ने कृषि विधेयक विरोध किया है। लेकिन शायद ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) ने कृषि विधेयक (farm Bill) पढ़ा ही नहीं अगर पढ़ी होती तो कृषि विधेयक समर्थन करती। क्योंकि पराली जलाने से प्रदुषण फैलाता है। तो मैं पुछना चाहता हूँ पराली जलाने वाले एक्ट के विरोध कर रहे तो क्या ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) पराली जलाने को सही मानती है। अपनी राय वे स्वयं जरूर दे। आपको बता दे कि पराली जलाने वाले एक्ट को  सरकार ने  वापस लिया है।

6 पन्नों के डॉक्‍यूमेंट में सामने आया भारत को बदनाम करने का पूरा प्‍लान 

आपको बता दे कि ये डॉक्‍यूमेंट को स्वयं ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) ने ट्वीट किया। जो कि अब डिलीट कर चुकी है। आपको बता दे कि पुरा डॉक्‍यूमेंट हमारे पास है। जो कि English में लेकिन हम आपको हिन्दी अनुवाद करके बता रहे है। उस डॉक्‍यूमेंट मुख्य बाते ..

देश विरुद्ध षडयंत्र कितनी बड़ी है, अगर आप ने ये 6 पन्नों का डॉक्‍यूमेंट पढ़ लिया तो समझ जाएगे कि  भारत को किसान आंदोलन के नाम पर बदनाम करने का पूरा प्‍लान कैसे बनाया गया है। उसका script writer कौन है? और ये जान जाएगे कि कितनी षडयंत्र गहरी है। आज हम देश विरुद्ध षडयंत्र रचने वाले हर चेहरा बेनकाब करेंगे। जिसे जानकर आप हैराण हो जाएगे।

इसमें लिखा है कि चार और पांच फरवरी को बड़ा ट्विटर अभियान चलाया जाएगा और ये अभियान Twitter Storm (ट्विटर स्टॉर्म)नाम से होगा। जिसे हम अभी ट्विटर पर चल रहे इस अभियान जोड़ सकते है जो कि है।  #IndianFarmersHumanRights.. ओर ये Hashtag इस समय trending पर चल रहा है ।

समझिए कितनी गहरी षडयत्र रचा गया है।

फिर लिखा है – 13 और 14 फरवरी को विदेशों में भारतीय दूतावास और सरकारी संस्थानों के आस पास बड़े प्रदर्शन किए जाएंगे। यानी ये भी पहले से ही निश्चित था।

इस डॉक्‍यूमेंट  में ये भी लिखा है, 26 जनवरी के लिए जो प्‍लान तैयार किया गया था पूरी दुनिया और भारत में बिल्कुल वैसा ही हुआ है ।

इसमें एक खास ईमेल एड्रेस Scrap Farmers Act

(स्क्रैप किसान अधिनियम)@ Gmail. Com पर किसानों के समर्थन में फोटो और वीडियो भेजने की बात कही गई है।

साथ ही इसमें हैशटैग Ask india why के साथ डिजिटल स्ट्राइक करने की बात भी लिखी है और भारत के प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री के अलावा International Monetary Fund (IMF) World Trade Organization (WTO)और वर्ल्‍ड बैंक को उसमें टैग करके कृषि विधेयक का विरोध करने की अपील की गई है।

26 जनवरी को भारत और विदेशों में सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करना है । ये भी इसमें लिखा है और इससे ये बात साबित होती है कि 26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसा संयोग नहीं, बल्कि एक प्रयोग था।

भारत के बड़े उद्योगपतियों की कंपनियों और दफ्तरों  के बाहर प्रदर्शन करें। ये भी इस डॉक्‍यूमेंट में लिखा हुआ है।

डॉक्‍यूमेंट ये लिखा हुआ है कि किसान आंदोलन में आप शामिल कैसे हो सकते है।

किसानों कंधे बंदूक

आपको बता दे कि आंदोलन जरिए विदेशी शक्तियां भारत के किसानों के कंधे बंदूक रखकर भारतीय लोकतंत्र कमजोर करने प्रयास कर रहे है। जैसा कि आप जानते हैं कि जब भी विदेशी हमलावर ने भारत पर हमला किया है तब भारत के अंदर के जयचंद ने हमेशा ही विदेशी हमलावर का साथ दिया है । जैसा आज भी आप देख कैसे देश विपक्ष इन विदेशी का समर्थन करने लगे है। बस हमला करने तरीके बदलकर चुके लेकिन मकसद वही है। भारत को कमजोर करना चाहते । वास्तविकता में इन लोगों का डर है ये कि अगले साल भारत का GDP 11.5 प्रतिशत पहुचने का अनुमान है। यही नहीं IMF ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था 2022 में 6.8% और चीन की 5.6% की वृद्धि का अनुमान है। अर्थात भारत के वृद्धि दर चीन से भी ज्यादा होगा। यानी भारत  सुपर पावर बने के करीब है , जबकि वर्तमान सुपर पावर अमेरिका दो विचारधारा विभाजित हो चुका है। यही चीज इन विदेशी और भारत के लिबरल पत्रकार को जलन हो रही है क्योंकि इन लोगों यही सोच कर रखा कि भारत हमेशा गरीब ही रहेंगा। लेकिन भारत कोरोना काल कठिन चुनौती दौर में भी गरीबी के साथ कोरोना को हरा रहा है। और भारत के कोरोना टीका (Corona vaccine) दुनिया ज्यादातर देशो को Order  किया है। जिससे वजह इन विदेशी कंपनी को बहुत ज्यादा नुकसान हुई है।

पहला ट्वीट अमेरिका की मशहूर पॉप सिंगर रिआना का है,

greta thunberg expose

जिन्होंने भारत में प्रदर्शन स्थलों पर इंटरनेट सेवाएं बंद करने से जुड़ा एक लेख  शेयर करते हुए लिखा कि हम इसके बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं? उन्होंने किसानों के आंदोलन के समर्थन में हैशटैग Farmers Protest पर भी ट्वीट किया।  रिआना के 10 करोड़ से ज्‍यादा फॉलोअर्स हैं। रिआना कोई भी ट्वीट या  पोस्ट करती हैं, तो उन्हें इसके बदले में 3 करोड़ 27 लाख रुपये मिलते हैं। इस समझ सकते है कि किसानों आंदोलन  पानी तरह पैसा बहाया जा रहा है।

दूसरा ट्वीट स्वीडन की एक पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग का है।

greta thunberg expose

इस ट्वीट में ग्रेटा ने लिखा है कि हम भारत में किसान आंदोलन  के साथ एकजुटता से खड़े हैं और सबसे अहम ग्रेटा ने भी वही आर्टिकल शेयर करते हुए ट्वीट किया है, जिस आर्टिकल को रिआना ने भी शेयर किया था।

रिआना और ग्रेटा की तरह अमेरिका की एक मॉडल और पॉर्नस्‍टार मिया खलीफा भी इसमें पीछे नहीं है।

greta thunberg expose

उन्होंने किसान आंदोलन को समर्थन देते हुए एक ट्वीट किया है कि ”भारत में मानवाधिकार उल्लंघनों पर ये क्या चल रहा है? उन्होंने नई दिल्ली के आसपास के इलाकों में इंटरनेट काट दिया है।

अब में पुछना चाहता हूँ जब अमेरिका में केपिटल हिल प्रदर्शनकारी हमला किया तब अमेरिकी पुलिस ने प्रदर्शनकारी पर गोली चलाया तब क्या मानवअधिकार नहीं छिना गया था। इसका जवाब जरूर दे.. भारत में गोली भी नहीं चलाए गया है।

ये आंदोलन जब शुरू हुआ था तब इसका उद्देश्य  था कृषि कानूनों को रद्द कराना लेकिन जिस दिन से इस आंदोलन ने झूठ के हाईवे पर चलना शुरू किया उस दिन से ही ये आंदोलन अपने रास्ते से भटक गया और 26 जनवरी को हम इस भटके हुए आंदोलन का असली चेहरा भी देख चुके हैं।

भारत तोड़ने के लिए विदेशी शक्तियां पानी तरह पैसों की बरसात कर रहे हैं। इन लोगों असली उद्देश्य यही है कि भारत के लोकतंत्र कमजोर करना है। लेकिन हम आप से यही कहेंगे कि इस समय राष्ट्र के साथ एकजुट रहे। विदेशी शक्तियां करारा जवाब दे।

गीता गोपीनाथ ने क्या कहा –

IMF की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ के मुताबिक , मोदी सरकार के कृषि कानूनों में किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता है। उसके साथ ही कमजोर किसानों को सामाजिक सुरक्षा देने की जरूरत है। गीता गोपीनाथ ने कहा कि भारत में ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां सुधार की जरूरत है. इन कानूनों से किसानों के लिए बाजार और ज्यादा बड़ा हो जाएगा। कुल मिलाकर एक वैश्विक वित्तीय संस्थान की मुख्य अर्थशास्त्री ने कृषि कानूनों की प्रसन्नता की थी। उन्होंने इस परिवर्तन से होने वाले नुकसान से किसानों को बचाने के लिए सामाजिक सुरक्षा की भी सलाह दी।

भारत सरकार बयान –

भारत सरकार की तरफ से भी इस पर एक बयान जारी किया गया है। उसमें लिखा है कि हम अपील करते हैं कि इस तरह के विषयों पर प्रतिक्रिया देने से पहले तथ्यों का पता लगाया जाए और इन मुद्दों को अच्छे से समझा जाए। सोशल मीडिया पर सनसनीखेज हैशटैग लगाने और कमेंट करने का लालच न तो पूरी तरह से सही है और न ही जिम्मेदाराना है। खासकर तब जब ऐसा जाने-माने और अन्य लोग करते हैं। ये बयान सरकार की तरफ से आया है।

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