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Super exclusive: चीन की तरह भारत में गहरा रहा बिजली संकट, थर्मल प्लांट के पास केवल चार दिनों का बचा कोयला.

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electricity shortage: जैसा कि आप ने पिछले दिनों चीन में बिजली संकट खबर मिडिया माध्यम सुना होगा। देश विदेश के कई अखबारों में वह खबरें छपी थी। चीन में थर्मल पावर प्लांट में कोयले की कमी के कारण से बिजली की आपूर्ति प्रभावित हुई थी।और लोगों के घरों में भी पावर कट के समस्या सामना करना पड़ा था। लेकिन अब कुछ इसी तरह का संकट आपको भारत में देखने को मिल सकता है। इसके पिछे कारण भी हम आपको बताए गे।

भारत कोयला बनाने वाले पावर प्लांट के पास महज 4 दिन का कोयला बचा

नवभारत टाइम के रिपोर्ट अनुसार भारत में पावर प्लांट को कोयले की आपूर्ति की स्थिति बदहाल हो चुकी है। कोयले से बिजली बनाने वाले पावर प्लांट के पास औसतन 4 दिन का स्टॉक बचा हुआ है। पिछले कई सालों में यह सबसे खराब आंकड़ा है। अगर बात अगस्त की करें तो उसमें पावर प्लांट के पास औसतन 13 दिन का कोयला बचा हुआ था। देश में थर्मल पावर प्लांट के आधे से अधिक पावर कट की चेतावनी दे दी है।

भारत में 70 फीसदी बिजली कोयले से बनता

ये समस्या इसलिए गंभीर है कि क्योंकि भारत में 70 प्रतिशत बिजली कोयले से बनती है। इसी संकट की कारण से बिजली के स्पॉट रेट बढ़ गए हैं। देश में कोयले की आपूर्ति एलुमिनियम और स्टील मिल्स को की जा रही है। चीन की तरह भारत भी समस्या जुझ रहा है। देश में कोरोना वायरस के मामले कम होने कारण आने वाले वक्त में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ी हैं और इस कारण से बिजली की डिमाट लगातार बढ़ रही है। उसके साथ ही देश में स्थानीय स्तर पर कोयले का उत्पादन कम हुआ है। भारत में अपनी अवश्यकता का तीन चौथाई कोयला अपने स्रोत से ही पूरा करता है। इस साल भारी बारिश की कारण से कोयले की खान में पानी भरा हुआ है और महत्वपूर्ण ट्रांसपोर्ट रूट खराब हो गए हैं।

कोयले के दाम में लगी आग


दुसरी कारण ये है कि कोयले से बिजली बनाने वाले प्लांट में ऑपरेटर एक अजीब सी परिस्थिती का सामना कर रहे हैं। वह लोकल मार्केट में कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मोटा प्रीमियम देने को मजबूर हैं। अगर उन्हें स्थानीय स्रोत से कोयला नहीं मिला तो वह समुद्र किनारे मौजूद कोल मार्केट में जा रहे हैं जहां कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।

बिजली के दाम बढ़ेंगे

भारत में केंद्र सरकार पहले ही गाइडलाइंस बनाने की प्रयास कर रही है कि जिससे पावर स्टेशन के लिए आदर्श स्थितियां बनाई जाए सके। और उनका कामकाज उचित तरीके से चल सके। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के डायरेक्टर (इन्फ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी) प्रणव मास्टर ने बताया है कि जब तक कोयले की आपूर्ति में स्थिरता नहीं आती तब तक हमें देश के कई हिस्से में बिजली का संकट सामना करना पड़ सकता है। आने वाले समय में ये हो सकता है कि ग्राहकों को अब बिजली के लिए अधिक पैसे चुकाने पड़ सकते है।

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