Anant singh story: अनंत सिंह कैसे बना मोकामा का ‘डॉन’? जानिए उसके जुर्म की पूरी कहानी

Anant singh story : बिहार के राजनीति में अक्सर ही बाहुबलियों का दबदबा रहा है। कई ऐसे नेता रहे जो बिहार की सियासत में देखें तो ऐसे नेताओं की लंबी फेहरिस्‍त है जिनकी छवि दबंग वाली रही है। जनता इन्‍हें चुनकर विधानसभा से लेकर संसद तक भेजती रही है।  सांसद, विधायक से लेकर राज्‍य और केंद्र में मंत्री पद तक पर ऐसे लोग काब‍िज रह चुके हैं।

10 साल सजा आर्म्स एक्ट मामले अनंत सिंह

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एमपी-एमएलए कोर्ट में फैसला जिसमें आर्म्स एक्ट मामले में बाहुबली विधायक अनंत सिंह (Anant singh) खिलाफ कोर्ट ने फैसला सुनाया। आपको बता दे कि विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को AK-47 केस में एमपी-एमएलए कोर्ट ने 10 साल जेल की सजा सुनाई है। आज इस बाहुबली की विधायिकी पर संकट है, लेकिन कभी सलाखों के बाहर रहा ये शख्स सियासत के साथ-साथ एक अलग दुनिया का मालिक था। जहां वो जो कह देता वही सही माना जाता था। अनंत सिंह का राजनीतिक जीवन छोटा नहीं बल्कि इतना लंबा है कि उस पर एक किताब लिखा जा सकती है।इतिहास के पन्नो जब भी मोकामा की जिक्र होगा तो अनंत सिंह का नाम आना लाजमी हो जाता है। छोटे सरकार और मोकामा के डॉन से पहचाने जाने वाले अनंत सिंह का नाम ही बिहार को खौफ में डाल देने को काफी है। कहते हैं कि अनंत सिंह की मोकामा में समानांतर सरकार चलती है। 

कहानी अनंत सिंह के

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ये कहानी शुरू होती है , पटना से 40 मिनट की दूरी पर बाढ़ स्थित है। जहां के लदमा गांव में अनंत सिंह का जन्म हुआ । वो चार भाइयों में सबसे छोटे है। कहते हैं कि अनंत सिंह पहली दफा जेल महज 9 साल की उम्र में गये थे फिर जुल्म की दुनिया में वो शक्तिशाली बनते गये।

वैराग्य से छोटे सरकार तक सफर

एक वो दौर जब अनंत सिंह (Anant singh) सबकुछ छोड़ कर अनंत सिंह वैराग्य ले चुके थे, फिर अयोध्या और हरिद्वार की और निकल गए। लेकिन जब साधुओं से झगड़ा हुआ तो वैराग्य से मन उचट गया। फिर अनंत सिंह के जिंदगी में कुछ ऐसी परिस्थिती बनी कि अनंत सिंह का जिंदगी मुश्किलो का पहाड़ आ गया है। किसी ने उनके सबसे बड़े भाई बिरंची सिंह की हत्या कर दी । इसके बाद दुनिया एक नया अनंत सिंह देखा जो कलतक वैराग्य ले चुका था वो आज उसके सर पर बदले का भूत ही सवार हो गया।और जब अचानक पता चला कि किसी नदी के पास हत्यारा बैठा है तो अनंत ने तैरकर नदी पार की और उसकी ईंट-पत्थरों से कुचलकर हत्या कर दी।

अनंत सिंह के राजनीति एंटी कहानी

बिहार के बाहुबली नेता थे अनंत सिंह (Anant singh)के बड़े भाई दिलीप सिंह और लालू प्रसाद यादव की सरकार में मंत्री भी थे। दिलीप सिंह के राजनीति में आने के पिछे एक किस्सा है। असल में 80 दशक में कांग्रेस विधायक श्याम सुंदर धीरज के लिए दिलीप सिंह बूथ कब्जाने का काम करते थे , लेकिन एक दिन दिलीप सिंह दिन ko आ गये तो श्याम सुंदर बोले कि तुम रात में आया करो। जिसके बाद दिलीप सिंह नाराज हो गये है और श्याम सुंदर को चुनाव में हराया भी और जनता दल के टिकट पर 1990 में विधायक बन गए ।ऐसे में दिलीप सिंह एक भरोसेमंद साथी की अवश्यकता था। ऐसे में छोटे भाई अनंत सिंह को साथी बना लिया जिस पर दो हत्याओं का आरोप लग चुका था और जो रंगदारी की राह पर काफी आगे निकल चुका था।

जब नीतीश कुमार के आए

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जब नीतीश कुमार के साथ आए अनंत सिंह (Anant singh) वो साल 1996 का लोकसभा चुनाव आया तो इस बात की समस्या नीतीश कुमार को महसूस हुई कि लालू के बिना समर्थन के बात कैसे बनेगी क्योंकि बाढ़ के जातिगत समीकरण नीतीश के लिए अच्छा नहीं था। ऐसे में नितीश कुमार यहाँ पर अनंत सिंह साथ की अवश्यकता पड़ी और साल 1996, 1998 और 1999 के लोकसभा चुनावों में अनंत का साथ नीतीश कुमार के लिए बहुत जरूरी था। फिर साल 2005 का विधानसभा चुनाव हुआ। जिसमें जदयू के टिकट पर नीतीश कुमार ने मोकामा विधानसभा से अनंत को उतार ही डाला । जिसके लिए नीतीश कुमार के विरुद्ध बातें होंने लगी थीं क्योंकि अनंत सिंह के पर संगीन मामले पहले ही केस दर्ज थे। लेकिन इन सबसे ऊपर उठकर आखिरकार अनंत सिंह चुनाव जीत गये।

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जब अनंत के घर पर छपा पड़ा

बिहार (Bihar) एसटीएफ (STF) ने साल 2004 में मोकामा में अनंत सिंह के घर छापेमारी की। इस दौरान घंटों गोलीबारी हुई जिसमें एक जवान की मौत हुई और अनंत सिंह के आठ लोग मारे गए। अनंत सिंह को भी गोली लगी पर वो भाग निकला।

अनंत सिंह की कुल संपत्ति

अनंत सिंह(Anant singh) की संपत्ति विधायक बनने के पांच साल बाद कई गुना बढ़ गई। 2005 में 3.40 लाख रुपये की संपत्ति होने की घोषणा अनंत ने की। फिर 2010 में ही ये बढ़कर 38.84 लाख रुपये हो गई। इस पर सवाल उठते हैं कि आखिर ऐसा कैसे हुआ??? लेकिन इसका कोई जवाब नहीं मिला है।

जाने अनंत पर कितने केस दर्ज

अनंत सिंह पर सैकड़ों अपराधी मामला दर्ज हैं। छोटे मोटे नहीं बल्कि हत्या, फिरौती, डकैती, अगवा करने और तो रेप जैसे संगीन मामले चल रहे हैं। एक महिला से रेप और हत्या के केस में साल 2007 में अनंत सिंह का नाम आया। एक निजी चैनल के पत्रकार इस बारे में उनसे बात करने गए तो पत्रकारों की जमकर पिटाई की उनके समर्थकों ने और सबको बंधी बना लिया। फिर जब मामला ने तूल पकड़ा और विधायक को गिरफ्तार किया गया। अनंत का खौफ कितना था ये इससे ही पता चलता है कि जीतन राम मांझी के सीएम रहते हुए अनंत ने माझी को खुली धमकी दी थी और तो और नीतीश सरकार में मंत्री रहे परवीन अमानुल्लाह को भी उसने धमकी दी और एके-47 लहराते हुए इसका एक वीडियो काफी वायरल हुआ था।

अनंत सिंह की परिवार की एक महिला को छेड़ा

17 जून 2015 को बाढ़ के मार्केट मे चार लड़को ने अनंत सिंह (Anant singh) की परिवार की एक महिला सदस्य को छेड़ा जिसके बाद पर खूब हंगामा हुआ। अनंत पर आरोप लगा था कि उसके कहने पर ही चारों लड़को को उनके गुंडो उठा लिया। और उसके बाद तो से एक की दर्दनाक हत्या की गई। जिसका शव अगले दिन ही जंगल में पाया गया। इस मामले में अनंत सिंह और कई आरोपी गिरफ्तार हुए। बाकी तीनों अगवा किए गए युवकों को भी बरामद किया गया। आरोपियों से पूछताछ में मालूम चला कि विधायक ने युवकों को सबक सिखाने का आदेश दिया। लेकिन इन तीनों की हत्या होती उससे पहले ही वहां पुलिस पहुंच गई। जिस मामले अनंत सिंह को सजा मिला है वो मामला बाढ़ में 16 अगस्त 2019 को पुलिस ने अनंत सिंह के पैतृक घर में छापा मारा तब घर से एक एके 47 राइफल, दो हैंड ग्रेनेड साथ ही मैगजीन में भरे हुए 26 जिंदा कारतूस कब्जे में लिया गया। इस केस में अनंत के विरुद्ध UAPA के अनुसार केस दर्ज किया गया। ये था अनंत सिंह के पुरा कहानी , आपको ये लेख कैसा लगा अपने टिपण्णी कामेंट करे।

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