Sunday, November 28, 2021
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America Capitol Building Attack Live: सवाल हिंसा करके ट्रंप क्या मिला ? केवल अमेरिकी संसद पर हमला नही था बल्कि कि लोकतंत्र की आर्थी उठाई गई है,

 

आज अमेरिका में लोकतंत्र की आर्थी उठाई गई है। वैसे तो अमेरिका के लोकतंत्र दुनिया सबसे प्राचीन लोकतंत्र कहा जाता है।  किंतु आज जो अमेरिका हुआ वो लोकतंत्र के लिए अशोभनीय है। इस तरह हिंसा किसी लोकतांत्रिक देश में स्वीकार नही किया जा सकता है।अमेरिका घटना के कड़े शब्दो में निंदा करता हूँ । अब किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति को लोकतंत्र पर ज्ञान देने का अधिकार नही है , अगर वो ज्ञान देने पहले स्वयं की देश स्थिती देख ले।

America Capitol Building

हिंसा के बाद ट्रंप क्या मिला ?

प्रश्न ये है कि हिंसा करने बाद ट्रंप क्या मिला इसका उत्तर यही है कि ट्रंप केवल दुनिया भर देशों के प्रमुख से बेइज्जती अलावा कुछ नही मिला जो इज्जत थी वो गंवा दिए , देरी से ही सही किंतु  ट्रंप माना कि वो हार गये बाइडन की जीत हुई । लेकिन 2020 का अमेरिका चुनाव एक इतिहास रचा वो ये है  कि हारने वाला ये जीतने वाला दोनो को अमेरिका का इतिहास का सबसे ज्यादा वोट मिला है। जो बाइडेन को 306 इलेक्टोरल कॉलेज वोट मिले हैं, जो बहुमत से ज्यादा हैं।  जबकि जरूरत थी  270 इलेक्टोरल कॉलेज वोट की। अमेरिका विभिन्न राजनीतिज्ञ के लेख पढ़ने यही लग रहा है कि कोविड 19 नही आया होता तो ट्रंप फिर से राष्ट्रपति बन जाते है। कोरोना वायरस ने ट्रंप डुबा दिया। ट्रंप हार गये , हो सकता है कि ट्रंप के साथ छल हुआ हो , किंतु इसके ये मतलब थोड़े हिंसा कर ले। हार से ट्रंप इतिहास बन चुके है। उन्होंने सदा याद रखा जाएगा। आंतकवाद विरुद्ध जीरो टॉलेज रखने के लिए। इसलिए भी क्योंकि ट्रंप कार्यकाल में अमेरिका के small business बर्बाद हो गई। जो कि उनकी विरोधी आरोप लगाते है जिसकी पुष्टि हम नही कर सकते है। ट्रंप ने कई अच्छे काम किए तो कई बुरे काम भी किए। कोविड 19 दौरान अमेरिका को सही से संभाल नही सके जिसका नतीजा उन्हे चुनाव में हार से मिली है। वैसे ट्रंप कार्यकाल अमेरिका भारत के रिश्ते सबसे अच्छे थी। आगे रहने की उम्मीद जताई जा रही है क्योंकि नये राष्ट्रपति जो बाइडेन से भारत के अच्छा संबंध चाहते हैै। कहा जा रहा वो भी आंतकवाद विरुद्ध है। भारतीय समुदाय जो कि चुनाव में सबसे मजबुत प्रकर रखते है , उसे नाराज करना जो बाइडेन कभी नही चाहेंगे। अर्थात भारत व अमेरिका रिश्ता बेहतर ही रहेंगा।  वैसे आज दौर में भारत को अमेरिका जरूरत नही बल्कि अमेरिका को भारत की जरूरत है।

अमेरिका घटना के बारे विस्तृत जानकारी (information ) देने पहले हम लोकतंत्र विभिन्न राजनीतिज्ञ ने क्या कहा वो बताते है।

  (अमेरिका)United States 16 वे राष्ट्रपति  (president) Abraham Lincoln (अब्राहम लिंकन)  ने लोकतंत्र परिभाषा में कहा था कि लोकतंत्र जनता का, जनता के लिए और जनता का शासन है। लोकतंत्र में जनता ही सत्ताधारी होती है, उसकी अनुमति से शासन होता है, उसकी प्रगति ही शासन का एकमात्र लक्ष्य माना जाता है।

भारत के सविधान निर्माता बाबा साहब अम्बेडकर ने कहा था कि लोकतंत्र का अर्थ है, एक ऐसी जीवन पद्धति जिसमें स्वतंत्रता, समता और बंधुता समाज-जीवन के मूल सिद्धांत होते हैं।

नोबेल पुरस्कार साहित्य विजेता, १९२५ महान नाटककार व कुशल राजनीतिज्ञ मानवतावादशा जार्ज बर्नार्ड शा  ने कहा था कि लोकतंत्र, अपनी महंगी और समय बर्बाद करने वाली खूबियों के साथ सिर्फ भ्रमित करने का एक तरीका भर है जिससे जनता को विश्वास दिलाया जाता है कि वह ही शासक है जबकि वास्तविक सत्ता कुछ गिने-चुने लोगों के हाथ में ही होती है।

ऐसी कई महान राजनीतिज्ञ अपने दृष्टिकोण से लोकतंत्र का परिभाषा बताया है। खैर हम आगे बढ़ते है , अब हम आज अमेरिका संपुर्ण घटना जानकारी बताते है।

वास्तव कैपिटल हिल में इलेक्टोरल कॉलेज की प्रक्रिया चल रही थी, जिसके तहत जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने पर मुहर की तैयारी थी। इसी बीच हजारों की संख्या में ट्रंप समर्थकों ने वॉशिंगटन में मार्च निकाला और कैपिटल हिल पर धावा बोल दिया। यहां डोनाल्ड ट्रंप को सत्ता में बनाए रखने, दोबारा वोटों की गिनती करवाने की मांग की जा रही थी। अमेरिकी संसद भवन ‘कैपिटल बिल्डिंग’ के 220 साल के इतिहास में बुधवार जैसी घटना पहले कभी नहीं हुई जब निर्वतमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समर्थक हजारों दंगाई यहां घुस आए और संवैधानिक दायित्वों के निर्वाह में बाधा पहुंचाने की हर संभव प्रयास की। अमेरिका के लोकतांत्रिक इतिहास में इसे काला दिन कहा जा रहा है।

दुनिया भर नेताओ साथ भारत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रक्रिया..

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि ”अमेरिकी संसद परिसर में अशोभनीय दृश्य देखने को मिले। अमेरिका विश्व भर में लोकतंत्र के लिए खड़ा रहता है। यह महत्वपूर्ण है कि सत्ता हस्तांतरण शांतिपूर्वक और तय प्रकिया के तहत उचित तरीके से हो।”

“फ्रांस के राष्‍ट्रपति मैक्रों इमैनुएल ने कहा कि ”हम उन कुछ लोगों की हिंसा से हार नहीं मानेंगे, जो लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करना चाहते हैं। हम लोकतंत्र में विश्वास करते हैं। वाशिंगटन में आज जो कुछ हुआ वह अमेरिका नहीं है।”

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने कहा कि ”वाशिंगटन डीसी की घटना से दुखी हूं। ऐसी स्थिति में यह अहम है कि राजनीतिक नेता अपने समर्थकों को हिंसा से दूर रहने और लोकतांत्रिक प्रकिया और कानून के शासन में यकीन करने के लिए राजी करें।”

कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि ”अमेरिका में लोकतंत्र पर हुए हमले से कनाडा बेहद आहत और क्षुब्ध है। यह देश हमारा करीबी साझीदार और पड़ोसी है। हिंसा कभी सफल नहीं होगी और अमेरिका में लोकतंत्र कायम रहेगा।”

जर्मनी के विदेश मंत्री हाइको मास ने कहा कि ”वाशिंगटन डीसी के अभूतपूर्व दृश्य को देखकर लोकतंत्र के दुश्मन खुश होंगे। उकसावे वाले बयानों से हिंसक कृत्य सामने आए हैं। ट्रंप समर्थक लोकतंत्र पर हमला बंद करें।” 

यूरोपीय यूनियन के विदेश नीति प्रमुख जोसेफ बोरेल ने कहा कि ”दुनिया की नजर में अमेरिकी लोकतंत्र आज घेरेबंदी में प्रतीत हो रहा है। यह अमेरिका नहीं है। तीन नवंबर के चुनाव नतीजों का पूरी तरह सम्मान होना चाहिए।” 

“न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा एर्डर्न ने कहा कि ”जो कुछ हो रहा है, वह गलत है। लोकतंत्र में लोगों को मतदान करने, अपनी बात रखने और फिर उस फैसले को शांतिपूर्ण तरीके से मनवाने का अधिकार होता है। भीड़ को इसे पलटना नहीं चाहिए।”

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा कि ”अमेरिका में हिंसा की घटना दुखद है। हम इस कृत्यों की निंदा करते हैं और महान अमेरिकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत शांतिपूर्वक सत्ता हस्तांतरण की उम्मीद करते हैं।”

अमेरिका में चीन के दूतावास ने अपनी वेबसाइट पर एक बयान में कहा कि चीनी नागरिक महामारी और वाशिंगटन में बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर सचेत रहें। चीनी नागरिक हालात पर नजर रखें और सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचें

“पीएम मोदी ने ट्विटर पर लिखा है कि, “वाशिंगटन डीसी में दंगों और हिंसा की खबरें देखकर काफी व्यथित हूं. शक्ति का क्रमिक और शांतिपूर्ण हस्तांतरण जारी रहना चाहिए. लोकतांत्रिक प्रक्रिया को गैरकानूनी विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से विकृत नहीं होने दिया जा सकता है.”

अमेरिका कभी black and white  की लड़ाई होता वैसे अमेरिका black and white  विषय पर हम पहले लेख लिख चुके उसके बारे विस्तृत जानकारी के लिए Link को पढ़े – 

us riots: जानिए inside story अमेरिका दंगा पर , और जाने अमेरिका में नस्लभेद का पुरा इतिहास..

क्यों अमेरिका चुनावी प्रक्रिया विवाद होता

चुनावी प्रक्रिया पर विवाद होता , इसकी बड़ी वजह है कि अमेरिका का चुनावी प्रक्रिया बहुत अधिक लचीरी है। जिसे संभवना हम जैसे नये राजनीतिक विश्लेषक (Political analyst) आसान नही है। किंतु मैंने स्वयं internet जरिए अमेरिका चुनावी प्रक्रिया व अमेरिका संविधान (Constitution) का अध्ययन कर रहा हूँ। जब पुरी तरह वहाँ की चुनावी प्रक्रिया समझ आए जाएगी तब में जरूर इस विश्लेषण (Analysis) तैयार करूँगा। वैसे चुनावी नतीजे विवाद पहली बार नही है , इस पहले जब ट्रंप राष्ट्रपति बने थे। हिलेरी क्लिंटन  समर्थक ने विरोध किया था,  किंतु उस समय विरोध लोकतांत्रिक तरीके किया है। परंतु इस बार विरोध तरीका वास्तव बहुत गलत था।

मेरे दृष्टिकोण से लोकतंत्र में जनता निर्णय सर्वोपरि मानकर सत्ता हस्तांतरण करना चाहिए। लोकतंत्र में हिंसा कतई समर्थक नही किया जा सकता है। हाँ लोकतंत्र में चुनावी नतीजे पर आपको विश्वास नही है तो उसका शांतिपुर्वक विरोध करे। ओर चुनावी नतीजे से सहमत नहीं तो लोकतांत्रिक तरीके विरोध करे या फिर अगले चुनाव की तैयारी करे।

writer- shashikant yadav 

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