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नितीश कुमार के राज में लोगो को फिर से क्यों याद आ रहा है जंगलराज , जानिए nitish kumar vs lalu prasad yadav के राज में अपराध आंकड़े , जानिए किसकी राज में सबसे ज्यादा अपराध

 

बिहार में लगातार ही अपराध बढ़ रहे है। अभी हाल मैंने ही मधुबनी जिले के बेनीपट्टी में नरसंहार हुआ वो भी होली के दिन दोपहर को 1 बजे करीब , उसके बाद फिर से घटना सामने आई जब एक विडियो वायरल हो रहा था। तुरकौलिया के मझार गांव से एक दिल दहला देने वाले गोलीकांड के विडियो विडियो वायरल हो रहा है। बिहार अपराध लगातार बढ़ रही है। शायद हम उस पिढ़ी से आते है, जो जंगलराज को नहीं देखा था। लेकिन आज हम जंगलराज पार्ट 2 को देख रहे है। कुछ महीने पहले नितीश कुमार ने कहा था कि जंगलराज्य बेहतर स्थिती है। तुलनात्मक अध्ययन के जाने गे अपराध किसके राज में ज्यादा हुआ है। नितीश राज या फिर लालू राज में..

jungle raj  par 2

आज हम 15 साल पहले उस बिहार को जिसे कथित तौर पर जंगलराज कहा जाता था। लेकिन वास्तविकता आज बिहार स्थिती कुछ बेहतर नहीं है। आज हम तुलना करेंगे , लालू राज के मुकाबले नितीश राज में कितने अपराध होते है। बिहार लोगो के लिए जंगलराज्य कोई नया शब्द नहीं है। बिहार ने उस दौर को भी देखा है जब जाति नाम पर बिहार नरसंहार होता था। वो समय भला कैसे कोई बिहारी भुल सकता है।भले ही  वर्ष 2007 के बाद नरसंहार की कोई घटना यहां नहीं घटी लेकिन इसके पहले करीब 25-30 सालों के दौरान कई सामूहिक कत्‍लेआम की घटनाओं ने देश और दु‍न‍िया का ध्‍यान अपनी ओर खींचा था। दुर्भाग्य कहे या फिर बिहार के नियति। आज भले ही बिहार जातीय संघर्ष नहीं होती है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि बिहार से जातिवाद का वायरस कहे या फिर जहर समाप्त हो चुका है। 

जिस बिहार को गरीबी , पलायन , बेरोजगारी ,  शिक्षा, पिछड़ेपन और  लचर स्वास्थ्य  व्यवस्था (Poor health system) लड़ना चाहिए । वह बिहार आज भी जाति नाम एक आधार पर विभाजित है। ये बात किसी छिपी नहीं है कि बिहार जब मतदान होती है तो लोग ये नहीं देखते है कि कौन से प्रत्याशी (Candidate) उनके क्षेत्र के लिए कार्य करेंगे या फिर बिहार को पिछड़ेपन से निकाले गे। बल्कि वो देखते है कि प्रत्याशी (Candidate) किस जाति के है। वैसे बिहार लोग राजनीति रूप से सबसे जागरूक रहते है। लेकिन उसके बाद भी बिहार के परिस्थिती नहीं बदली है। 

nitish kumar vs lalu prasad yadav जाने किसकी राज में सबसे ज्यादा अपराध होता है।

बिहार में लालू राज (lalu prasad yadav) आखिरी साल 2004 में अपराध के कुल 1,15,216 मामले दर्ज हुए थे। जबकि नीतीश कुमार की सरकार में 15 साल बाद, साल 2019 में कुल अपराध के आंकड़े बढ़कर 2,69,096 हो गए, यानी दोगुने से भी अधिक है।

बिहार में अपराध के 2001 से 2011 तक के आंकड़े

बिहार पुलिस द्वारा उसके साइट biharpolice.bih.nic.in  पर जो डाटा डाला गया है  उसी जानिए वर्ष 2001 से 2011 तक के आंकड़े साइट पर दिए गए हैं। जिसमें हत्या, अपहरण, डकैती, चोरी, दंगा, बलात्कार आदि के रिपोर्ट शामिल हैं। हत्या की बात करें तो वर्ष 2001 में 3619, 2002 में 3634, 2003 में 3652, 2004 में 3861, 2005 में 3423, 2006 में 3225, 2007 में 2963, 2008 में 3029, 2009 में 3152, 2010 में 3362 और 2011 में महज 501 हत्याएं हुईं। वहीं बैंक डकैती की बात करें तो वर्ष 2001 में 22, 2002 में 28, 2003 में 24, 2004 में 30, 2005 में 26, 2006 में 15, 2007 में 19, 2008 में 16, 2009 में 7, 2010 में 9 और 2011 में महज 4 ही हुई। अपहरण की बात करें तो क्रमश: 2001 से 2011 तक 1689, 1948, 1956, 2566, 2226, 2301, 2092, 2735, 3142, 3602, 565 है। जबकि रेप के मामले में जहां 2001 से 2010 के बीच ये आंकड़ा 7000 हजार के ऊपर रहा वहीं 2011 में यह 127 के आंकड़े पर ही सिमट गया।

बिहार में कानून व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। राज्य में अपराध बेलगाम है।अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। बीते कुछ दिनों में लूट चोरी, डकैती, रंगदारी, रेप, हत्या और अपहरण की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि  हुई है।

नीतीश कुमार 15 साल सरकार चलाने के बाद भी अपनी उपलब्धियां बताने से अधिक ये साबित करने की प्रयास करते हैं कि उनसे पहले लालू-राबड़ी शासन काल में हालात बदतर थे। इस साल के जनवरी में ही मीडिया के सवालों पर भड़के नीतीश कुमार ने दावा किया कि अपराध के मामलों में बिहार देश में 23वें नंबर पर आता है। परंतु  NCRB का डेटा कहता है कि 2019 में देश भर में हुए अपराधों में से 5.2 फीसदी अपराध बिहार में दर्ज हुए। इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, गुजरात, मध्यप्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के बाद बिहार का ही नंबर आता है। हमारे पास 2020 और 2021 के आंकड़े नहीं है। अगर होती शायद इस भयानक परिस्थिती सामने आती बिहार में अपराध लगातार बढ़ रहा है। जो कि चिंता का विषय है।

बिहार में लगातार बढ़ते हुए अपराध पर पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय ने बढ़ती जनसंख्या को भी जिम्मेदार ठहराया था। कुछ और लोगों की भी ये ही तर्क है कि अगर जनसंख्या बढ़ेगी तो अपराधों की संख्या भी बढ़ेगी। अब जरा बिहार की जनसंख्या पर गौर करिए, 2001 की जनगणना के मुताबिक बिहार की कुल आबादी 8,28,78,796 थी. जो 2011 की जनगणना के मुताबिक बढ़कर 10,38,04,637 हो गई. अगली जनगणना इसी साल होना है। लेकिन माना जाता है कि वर्तामान बिहार की आबादी 12-13 करोड़ आस-पास है।यानी 2004 से 2019 के बीच बिहार की आबादी करीब 50 फीसदी की दर से बढ़ी है, लेकिन इसी दौरान बिहार में अपराध 133 फीसदी की दर से बढ़े हैं। यानी गुप्तेश्वर पांडेय के बाते भी आंकड़े सामने झुठे साबित होती है , अपराध बढ़ने की वजह जनसंख्या विस्फोट है।  हाँ जनसंख्या विस्फोट की वजह से कई समस्या सामने आ रही है। कुछ समय पुर्व ही मैंने जनसंख्या विषय पर एक लेख लिखा था जो आप पढ़ सकते है।  population control law in india:   जानिए जनसंख्या नियंत्रण कानून पर केंद्र सरकार का जवाब और जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम , क्या भारत 2050 में बन जाएगा इस्लामिक राष्ट्र ..

 
बिहार अपराध बढ़ने की वजह क्या ??

बिहार में अपराध बढ़ने की सबसे बड़ी वजह जो सामने आ रही है। वो है शराब बंदी है , आप सोचेगे कि शराब बंदी तो एक उद्देश्य किया गया था , फिर कैसे शराब बंदी अपराध बढ़ने की बड़ी वजह बन चुका है। इसकी वजह ये है कि इन दिनो बिहार पुलिस अपराधी को पकड़ने स्थान पर केवल शराब शराब तस्कर गिरफ्तार करने मे लगे हुई है , जिसका लाभ
शातिर अपराधी उठाते है। जो कि दबे जुबान में कई बड़े पुलिस अधिकारी मानते है। बिहार पुलिस में इस समय दो लगभग दो पद खाली पड़े है। जिसकी बहाली राज्य सरकार ने अबतक निकला है , इस वजह भी बढ़ती अपराध  रोकने में बिहार पुलिस असफल रही है।



 








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