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Petrol Price Today : पेट्रोल-डीजल के दाम में 43 से 50 रूपये सस्ता ... जाने के लिए पुरा पढ़िए ..

पेट्रोल-डीजल दाम लगातार ही बढ़ रही है। हम कबतक इस मुद्दा पर मौन धारण करेंगे। आखिर पेट्रोल-डीजल दाम बढ़ने से हर चीज की मंहगाई बढ़ रही है। सोशल मीडिया के कुछ अर्थशास्त्री बताएगे कि इस समय दुनिया महामरी आई है। इस वजह से पेट्रोल-डीजल दाम बढ़ रही है। मैं ये मानता हूँ कि महामरी भी बड़ी वजह बन सकती है। पेट्रोल-डीजल दाम बढ़ने की। वर्तमान सरकार ने कोविड दौर में बहुत अच्छा कार्य किया इसकी भी प्रशंसा करना चाहिए। लेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि हम प्रश्न पुछना बंद कर दे। इस विषय पर देश के बड़े-बड़े मिडिया हाउस बात नहीं कर रहे है। लोकतंत्र में एक जिम्मेदार मिडिया कार्य होता है कि जब सरकार अच्छा करती है उसकी प्रसन्नता करे लेकिन जब सरकार की गलती करे तो उसका कमियां को भी उजागर करे। जैसा कि डीजल पैट्रोल दाम बढ़ने की जिम्मेदार केवल केन्द्र सरकार की ही नहीं बल्कि कि राज्य सरकार की भी गलती है। आईए विस्तृत रूप जानते हैं कि डीजल पैट्रोल की दाम(Diesel petrol price) बढ़ने की बड़ी वजह। और आज हम इस विषय पर चर्चा करेंगे कि पेट्रोल-डीजल के लगातार दाम बढ़ने की बड़ी वजह क्या है और हम आज एक ऐसे फॉमुला बताएगे जिस से पेट्रोल-डीजल दाम में करीब 43 से 50 रूपये तक सस्ता हो सकता है। 

Petrol Price Today


 जैसा कि आप जानते हैं कि पिछले कई महीने से पेट्रोल-डीजल दाम बढ़ रही है। लेकिन मिडिया में चर्चा तक नहीं हो रही है। इसकी बड़ी वजह कि इन दिनो देश में किसान आंदोलन हो रही है। सभी मिडिया उसी कवर करने में लगे हुए है। लेकिन हम लगातार ही आम आदमी जुड़े विषय उठाते है। क्योंकि हमारा मानना है कि पत्रकारिता धर्म भी यही कहती हैं।




सबसे पहले हम ये समझने की प्रयास करे कि  पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ने की बड़ी वजह क्या है।


विदेशी बाजार में कच्चे तेल की कीमत 65.61डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। लेकिन जब लॉकडॉउन लगाया था तब  लगातार ही  international market में कच्चे तेल के भाव में गिरावट हो रही थी। तब भी आम आदमी को उसका फायदा नहीं पहुंचाए गया। तब सरकार ने ये कहा कि जब international market में कच्चे तेल बढ़गी तो इसका फायदा ग्राहको दिया जाएगा। 

लेकिन जब अब लगातार दाम बढ़ रही तब , इसका लाभ ग्राहको नहीं मिल रहा है । ऐसे में इसके उत्तरदायित्व किसकी है। जाहिर सी बात है कि सरकार की है। लेकिन इसमें केवल केन्द्र सरकार की ही नहीं बल्कि कि राज्य की सरकार की भी है। इसके लिए लिए आपको पेट्रोल-डीजल के पुरा गणित को विस्तार से समझना होगा।



अभी पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकार की वैट लगती है। वहीं कई स्थान पर ट्रांसपोर्ट और लोकल बॉडी टैक्स की कारण से पेट्रोल की कीमतें और भी अधिक बढ़ जाती हैं। उदाहरण के तौर समझिए- माना कि पेट्रोल कीमत 30 रुपये प्रति लीटर थी। भाड़े आदि को मिलाकर इस पर एक्साइज ड्यूटी थी 35.98 रुपये लीटर और राज्य सरकार की वैट था 21.55 रुपये लीटर, डीलर का कमीशन था 4.30  रुपये लीटर और कुल खुदरा कीमत थी 91.83 रुपये लीटर। अब आप पेट्रोल और डीजल संपुर्ण गणित को समझ चुके है। 



कैसे घट सकती है 43 से 50 रूपये प्रति लीटर तक पेट्रोल और डीजल के दाम -


हम अगर बोल रहे है कि आज हम आपको ऐसे फॉमुला बताएगे कि जिस से पेट्रोल और डीजल दाम में 43 से 50 रूपये तक गिरावट आ सकती है। यकीन मानिए हो सकता है। हम आपसे कोई मजाक नहीं कर रहे है। बल्कि कि वास्तव में ऐसा हो सकता है। आईए विस्तृत रूप बताते है इसकी फॉमुला - इसके लिए सरकार को पेट्रोल और डीजल को जीएसटी अर्थात (Goods And Service Tax) दायरे में लाना होगा। इसके पेट्रोल-डीजल दाम में भारी गिरावट हो सकती है। इसकी वजह यह है क‍ि जीएसटी की अध‍िकतम दर 28 फीसदी है। अगर आज के उदाहरण तौर पर देखे तो करीब 30  रुपये के बेसिक रेट के हिसाब से 28 रूपये की पैट्रोल व डीजल कीमत में करीब 58 हो सकता है। 


आपको बता दे कि पेट्रोल और डीजल के दाम को जीएसटी शामिल होने से देश के हर राजनीति पार्टी विरोध करती है। इसकी वजह है कि संकट की घड़ी में जब सरकार के पास राजस्व के स्रोत कम रह गए हैं, पेट्रालियम सेक्टर दुधारु गाय बन जाती है। 

आशा करता हूँ कि आप पेट्रोल और डीजल के संपुर्ण गणित समझ चुके है। आपको हमारा विश्लेषण कैसा लगा अपनी राय कामेंट बाक्स में दे..
















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