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Petrol, Diesel Prices: लोगो फिर याद आ गई वो गीत महंगाई डायन ... और जानिए सरकार क्या करना चाहिए विकास को अग्निपथ न बना दे महंगा तेल ...

 कोविड दौर में संकट से निकलकर इकोनॉमी राह पर आनी आरंभ हुई नहीं कि पेट्रोलियम पदार्थो की बढ़ती कीमतों ने नया संकट पैदा कर दिया है। यह वृद्धि (Growth) ऐसे समय में हो रही है। जब महंगाई दर का बेकाबू होना पुरी रणनिति और मंशा पर पानी फेर सकता है। यह सच है कि देर सबेर सभी को विकल्प भी तलाशने होंगे। लेकिन फिलहाल अवश्कता  है। इस विकराल संकट से बाहर आने की। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया तो बजट ने चटख रंग दिखाया और पैकेज ने जो उत्साह जगाया , उस पर तुषारापात हो सकता है। पिछले साल अप्रैल के मुकाबले पैट्रोल व डीजल की खुदरा कीमतों में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है।

petrol diesel price today


लगातार हो रहे पेट्रोल-डीजल दाम से लोगो फिर से याद आने लगे वो गीत , जिसके बोल थे -


ऐ सैयां ऐ सैयां रे 

मोरे सैयां रे खूब कामय सैयां जी

अरे कमा कमा के मर गए सैयां

पहले तगड़े तगड़े थे अब दुबले पतले हो गए सैयां

अरे कमा कमा के मर गए सैयां

मोटे सैयां पतले सैयां

अरे सैयां मर गए हमारे ईसी आये गए में

महंगाई डायन खाये जात है.. 




विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल-डीजल के दाम में हो रही बेतहाशा बढ़ोतरी से महंगाई दर बढ़ेगी , जिससे अन्य वस्तुओं की मांग में कमी आएगी , जो कु रिकवरी के इस दौर में अच्छी बात नहीं है। महंगाई बढ़ने से मैन्यूफैक्चरिंग में तेजी लाने के प्रयास भी प्रभावित होंगे।



पेट्रोलियम पर निर्भर 70 प्रतिशत  ट्रांसपोर्ट


हिन्दी न्यूज पेपर दैनिक जागरण से बातचीत में क्रिसिल के डीके जोशी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत से मैन्यूफैक्चरिंग की लागत बढ़ जाएगी। जो हमारी प्रतियोगिता (कम्पटीशन ) क्षमता को प्रभावित करेंगी। देश का 70 प्रतिशत ट्रांसपोर्ट पेट्रोलियम पर निर्भर करता है। और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत से इस पर असर पड़ेगा। छोटे उद्दमियों ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत उनके लिए कठिनाई लाने वाली है। अर्थव्यवस्था में कीमतों से प्रभावित होगा। इससे आम जनता की समस्या बहुत अधिक बढ़ जाएगी।



सरकार क्या करना चाहिए ?



सबसे पहले पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और अधिक वृद्धि होने से रोकना की प्रयास करना चाहिए। उसके बाद ऐसी प्लानिंग करना चाहिए जिस से हम ट्रांसपोर्ट पेट्रोलियम पदार्थों निर्भरता (Dependency) कम करते जाए। जिस  से आने समय हमे ऐसे चुनौती का सामना ना करना पड़े। 



इलेक्ट्रिक गाड़ी पर सब्सिडी दिया जाए जिस से पेट्रोल-डीजल निर्भरता समाप्त हो जाए।


कई राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक गाड़ीयो पर सब्सिडी दे रही है। ऐसी ही कदम सभी राज्य सरकार को उठाना चाहिए। सरकार इलेक्ट्रिक गाड़ियो को बढ़ावा देना चाहिए। खास कर ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में इलेक्ट्रिक गाड़ियो को बढ़ावा देना चाहिए। वैसे तो भारत सरकार  2030 तक में भारत में 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक गाड़ी का लक्ष्य रखा है। अगर ये वकई पुरी हो जाती है तो देश सरकार को बहुत ही अधिक लाभ भी होगा।  पेट्रोल-डीजल पर पुरी तरह से निर्भरता समाप्त हो जाएगी। और इस से हवा स्वच्छ होगा और पर्यावरण भी बेहतर होगी।  



 


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