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farmers protest hindi: देश संसद कानून चलेगा या फिर भिड़तंत्र कानून से ... किसका निर्णय सर्वोपरि माना जाएगा ••

 क्या लोकतंत्र को भिड़तंत्र जरिए लोकसभा पास विधेयक रद्द करवाए जाएगा। जब सरकार विधेयक संशोधन के लिए तैयार हैं। तो फिर किस बात विरोध किया जा रहा है। सबसे बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है कि सड़क को बंधक बनाने वाले प्रदर्शनकारी कैसे कह सकते है वो लोकतांत्रिक तरीके विरोध कर रहे है?  जो तथाकथित लोग अपने आपको किसान कहते है।  

farmers protest hindi

 अगर वो वाकई लोकतंत्र विश्वास रखते है तो वो ना ही सुप्रीम कोर्ट मान रहे ओर ना ही सरकार बात सुन रहे है। तो वो किसके बात मांनेगे? 


क्या वो एंटोनिया माइनो उप Sonia Gandhi (सोनिया गांधी) की बात मानेंगे या फिर विदेश रह रहे सिख फॉर justice जैसे आंतकी संगठन की बात मांनेगे। 


 जब सरकार कोई विधेयक में संशोधन के लिए तैयार हैं। फिर सड़क को बंधक बना क्यों रखे हुए है। क्या ये लोकतंत्र में उचित है। इसका उत्तर लोकतंत्र बचाने पार्टी को जरूर देना चाहिए। ऐसे में कल को कोई नया कानून लाया गया तो इसी तरह से भिड़तंत्र जरिए उस कानून विरोध किया जाएगा। तब क्या किया जाएगा??




 इस देश में अब विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की कोई अवश्यकता नही है। जो निर्णय भिड़तंत्र लेंगी वही निर्णय सर्वोपरि माना जाएगा। जब देश के संवेधानिक पदो बैठे लोगो पर विश्वास ही नही हो , उस देश में लोकतंत्र की क्या अवश्यकता है। चलो भिड़तंत्र बताओ युवाओ कैसे रोजगार दिया है जाएगा। हाँ तुन्हे अंबानी व अडानी बहुत दिक्कत हो रहा है ना , बोलो अंबानी व अडानी जितने रोजगार दिया उन सबको तुम  पहले रोजगार दे दो भिड़तंत्र। हाँ हाँ हाँ भिड़तंत्र मार्च में 5 G का टावर निलामी है वो भी तुम खरीद लो।जिस से युवाओ रोजगार मिलेगी। 


क्या हुआ? ना तुम टावर खरीद सकते हो ना ही रोजगार दे सकते है तुम्हे ये अधिकार किस ने दिया है। किसी कंपनी टावर तोड़ने का , हाँ अगर कोई कंपनी पंसद नही है तो बॉयकॉट कर सकते है। 


कुछ लोग कहते है कि ये देश अंबानी व अडानी का गुलाम बन जाएगा।  जैसे East India Company ने बनाया है। मेरा जवाब ये देश भले कभी अंबानी व अडानी गुलाम ना बने किंतु ये देश में भिड़तंत्र हावी हो चुका है। जो कि लोकतंत्र के लिए विनासकारक और घातक सिद्ध होगा ।


लोकतंत्र में भिड़तंत्र का कोई महत्व नही है , अगर ये सोचते है कि सड़क बंधक , आम जनता परेशान करके अपनी बात मना लेंगे तो वो बात गलत है , क्योंकि लोकतंत्र में भिड़तंत्र कोई importance नही है। हाँ लोकतंत्र विरोध अधिकार है , लेकिन किसी को परेशान करके नही । भारत में लोकतंत्र है ओर निर्णय लेने अधिकार केवल देश के सांसद को है। अगर किसी को लगता उसके साथ अन्याय हुआ तो वो संवाद जरिए अपना बात रखे। 



गणतंत्र दिवश समारोह दिन टैक्टर रैली निकालने की मकसद क्या हो सकती है। इसका एक ही मकसद हो सकता है ,  अमेरिकी संसद केपिटल हिल हुई उसी  तरह हिंसा करके भारतीय लोकतंत्र को मजाक उड़ाने का प्रयास हो जो कि Intelligence Agency (इंटेलिजेंस एजेंसी) रिपोर्ट पढ़े तो यही सामने आ रही है कि टैक्टर रैली बहाने के जरिए वामपंथी एक बार फिर दिल्ली शहर में दंगा करवाना चाहते है। अगर इसी तरह भिड़तंत्र जरिए संसद पास कानून रद्द जिद्द होता रहा वो दिन दुर नही जब कोई भी सरकार कानून में सुधार के लिए ऐसे कदम नही उठाएगे। आंदोलनकारी  संगठन जो कह रहे उसे माने तो उन्हें ना सरकार की नीति पर भरोसा है। ओर कृषि विधेयक पर बात ही नही करना चाहते है। वे सरकार के नियत पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करना चाहते थे। जो नई कृषि विधेयक में है ही नही वो विषय उठा रहे है। जैसे कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य अर्थात( Msp ) की व्यवस्था समाप्त करना चाहती है।मंडिया बंद कर देगी। किसानोंं को कॉरपोरेट के हाथो लुटने के लिए धकेल देगी और कॉरपोरेट उनकी जमीन हड़प लेंगे। इन सबका जवाब यही है कि भावनात्मक विषय पर जिसका एकमात्र आधार शंका है। वैसे शंका  उपचार किसी डाक्टर वैद्य या फिर हकीम के पास नही है।


इस पुरे मासले में एक बात समझ लेना चाहिए। कि यह पुरे देश किसानों का आंदोलन नही है। ये बस पंजाब, हरियाणा ओर पश्चिम युपी के किसानों आंदोलन है। जो कि किसानों हित स्थान पर बिचौलिया को बचाने के लड़ाई लड़ रहे है। इस आंदोलन दो वर्ग है एक वो वर्ग जिस कभी आंदोलन देखा नही दुसरा वर्ग है जिसे लग रहा है इस आंदोलन बहाने अपनी डुबती हुई राजनीति नैया को पार लगा सके। पहला निदोष भाव से जुड़ा है। दुसरा वर्ग पर्दे पिछे छुपा है।



शेतकरी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवट ने कहा है कि कृषि विधेयक वापस लेना किसानों हित में नही है। यदि ये कानून वापस ले लिया जाता है। तो अगले 50 साल तक कोई भी सरकार कृषि सुधार प्रयास नही करेंगी।   


मैं भिड़तंत्र में शामिल तथाकठिथ किसानों से पुछना चाहता हूँ कि अगर पुराना ही कानून बेहतर है तो फिर किसान आत्महत्या करने पर मजबुर क्यों हुए है। इसका उत्तर जरूर दे??


राजनीति के जानकार - शशिकांत यादव 


 



  


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