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#BanTandavNow: Tandav web series बैंन मांग हुई तेज, लोगो गुस्सा देश सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर फुटा.. hinduphobia in bollywood

 इन दिनो वेब सीरीज #Tandav का विरोध हो रहा है। इसकी वजह है कि फिल्म हिन्दू अस्था का अपमान किया गया है। ये वेब सीरीज के आने के बाद से लगातार ही ट्विटर पर #BanTandavNow trending करने लगा है। 

BanTandavNow trending

जैसा आप जानते हैं कि bollywood hindu phobia ग्रसित हो चुका है। अगर कोई भारतीय संस्कृत बात करे , उसे ये पिछड़ा हुआ समझ लेते है। लेकिन जब कोई मौलाना ये ज्ञान देते है कि इस्लाम एक से ज्यादा शादी क्यों जायज तब ये कहते वाह -वाह क्या बात है। इन बॉलीवुड वालो का दोगला चरित्र उदाहरण तो देखिए कभी भी हलाला व तीन तलाक ओर भी कई इस्लामिक कुरीतियों विरुद्ध फिल्म बनाने में हिम्मत नही होती है। इन बॉलीवुड वालो को समाज अंदर हर बुरारी केवल हिन्दू धर्म में नजर आता है। 



फिल्म Tandav विरोध क्यों हो रहा ?


तांडव मूवी में शंकर भगवान का मजाक उड़ाए जाने पर पूरे देश के हिन्दू आक्रोशित है लेकिन हिन्दूवादी सरकार के मंत्री जी अभी तक नींद से नही खुली है। अगर कल्पना कीजिए , देश एक खास महजब पर ऐसी फिल्मे बन जाती है। तो आज देश के शहरो को जला दिया गया होता है । फिल्म जो डायलॉग्स दिया गया है। वो डायलॉग्स को देश की सेंसर बोर्ड  सेंसर चीफ नहीं किया है। लेकिन हम उस डायलॉग्स नहीं दिखाए ना ही लिखे , हम उसे सेंसर चीफ कर रहे है। हम अपने platform किसी तरह नफरत फैलाने वाले डायलॉग्स स्थान नही देंगे। हम ये मानते है कि बॉलीवुड फिल्में समाज में जाति भेदवाद ओर नफरत फैलाने के उद्देश्य बनाई जाती है।



 

यही  फिल्म सैफ अली खान के महजब बनाया जाता 

 तो शायद आज भारत कई शहर जल गये होते किंतु केवल एक ही समुदाय विरुद्ध ऐसे फिल्मे क्यों बन रहे है। बॉलीवुड वाले खुद सेक्युलर अर्थात धर्मनिरपेक्ष कहते लेकिन वास्तविकता में बॉलीवुड फिल्मों जरिए समाज में जाति व धर्म नफरत फैलाए जा रहा है। किसी जमाने में फिल्मे समाज की आईना  होते थे। लेकिन आज बॉलीवुड फिल्में समाज में जाति , धर्म नाम नफरत फैलाना हो गया है। 


सैफ अली खान अगर हिम्मत हो तो अपनी महजब हलाला व तीन तलाक ओर भी कई इस्लामिक कुरीतियों खिलाफ फिल्म बनाए। लेकिन इनकी दोगला चरित्र तो देखिए केवल एक ही धर्म को टारगेट करते है। ये कहते है कि अभिव्यक्ति स्वतंत्रता होनी चाहिए। यही सैफ अली खान taanaji फिल्म में काम किया ओर पैसे भी लिए ओर बाद में एक इंटरव्यू में कह दिया है कि सैफ ने अपने फिल्म के किरदार को लेकर बताया कि उदयभान राठौर का किरदार बहुत आकर्षक लगा था, इसलिए वो छोड़ नहीं पाए, लेकिन इसमें पॉलिटिकल नैरेटिव बदला गया है और वो खतरनाक है। सैफ ने आगे कहा, 'कुछ वजहों से मैं कोई निर्णय (स्टैंड ) नहीं ले पाया, शायद अगली बार ऐसा करूं। यानी वो कहना चाहते है कि आगे वो taanaji जैसे राष्ट्रवादी फिल्म में काम नहीं करेंगे। मैं इस किरदार को लेकर बहुत उत्साहित था क्योंकि मुझे बहुत ही आकर्षक लगा था। लेकिन यह कोई इतिहास नहीं है। इतिहास क्या है इसके बारे में मुझे बखूबी पता है। आगे कहते है कि कोई ऐतिहासिक तथ्य नहीं है। हम इसे लेकर कोई तर्क नहीं दे सकते। लेकिन यह सच्चाई है। सैफ आली खान उस समय कहा देश सेक्युलरिज्म से दूर जा रहे है।  दोगला चरित्र देखिए पहले फिल्म काम पैसे लिए बाद कह दिया है कि ये फिल्म गलत इतिहास बने है। खैर वर्तमान आते है सैफ अली खान ( Saif Ali Khan ) असल दिक्कत है कि वो पढ़े लिखे नही है , उन्हे यही लगता है कि भारत का इतिहास मुगलोकाल से ही आरंभ होता है।  जब आप पढ़े लिखे नही होगे तो आप एक महान देश के बारे में कैसे जान पाए गे । सैफ अली खान ( Saif Ali Khan ) वास्तविकता भारत का इतिहास  जानते तो  अपने बेटे नाम एक लुटेरे नाम कभी नही रखते।अगर आप बॉलीवुड ध्यान देंखे तो ज्यादातर एक्ट्रेस एक्ट्रर पढ़े लिखे नही है , इन्हे भला अपनी संस्कृत और इतिहास के बारे में कैसे जानेंगे। 



ऐमजॉन प्राइम वीडियो ही नही बल्कि कई 

ott platform पर हिन्दू धर्म विरुद्ध कई वेब सीरीज उपलब्ध है। इसी को लेकर देश केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को ट्विटर जरिए हटाने की मांग कर रहे है। लोग लगातार ही तांडव बैंन करने मांग कर रहे है। लेकिन आज लोगो का गुस्सा सोशल मीडिया पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर पर टुट पड़ा है। लोगों नाराजगी इस कदर बढ़ गई कि #प्रकाश_जावड़ेकर_इस्तीफा_दो ट्विटर पहले नंबर trending करने लगा है। 


ऐसा नही बॉलीवुड के फिल्म अभी ही हिन्दू धर्म खिलाफ दिखाए है , अगर आप ने ध्यान दिया होगा बॉलीवुड फिल्मों में हमेशा ही मंदिर पुजारी अर्थात 

 ब्राह्मण और संतो गलत दिखाया जाता है लेकिन मौलाना को बेहतर दिखाया जाता है। बॉलीवुड शुरूआत से ही hinduphobia ग्रसित है। असल बॉलीवुड मकसद बस रहता है कि इस देश बहुसंख्यक अपनी संस्कृत दुर जाए।

लेखक - शशिकांत यादव 



 


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