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positive news : 11 साल वियोग के बाद एक हुए पति पत्नी .. जाने पुरी खबर विस्तार से

 

बैतूल से एक खबर सामने आ रही जहाँ पर 11 बरस के  वियोग के बाद आखिरकार पति-पत्नी एक हुए है। जैसा कि हमेशा  कहा जाता है कि बच्चों के लिए, माता-पिता को वह सब करना पड़ता है जो बच्चों के लिए आवश्यक है, फिर माता-पिता अपनी इच्छाओं को भी त्याग देते हैं, सभी बच्चों को तैयार करने में सपने देखते हैं। ऐसा ही एक मामला फैमिली कोर्ट में सामने आया जब पिछले 11 सालों से अलग रह रहे पति-पत्नी एक हो गए। इस अवसर पर न्यायाधीश, अधिवक्ता और कर्मचारियों सहित कर्मचारियों के चेहरे पर खुशी थी। दोनों पति-पत्नी जिला और सत्र न्यायाधीश जावेद खान, प्रधान परिवार न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह राजपूत, कानूनी साक्षरता सचिव मनोज मंडलोई, एडवोकेट अजय सिंह चौहान, सुरेश रेक, प्रवीण पांडे और अभय सिंह चौहान मौजूद थे।

11 साल वियोग के बाद एक हुए पति पत्नी




चंद्रशेखर साहू का विवाह वर्ष 2005 में पाथाखेड़ा के  ममता साहू से हुआ था। वर्ष 2009 तक, दंपति के दो बेटे थे, जिनमें से एक का नाम पूर्णेश और दूसरे का मनीष है। इसके बाद सब कुछ ठीक नहीं हुआ और ममता साहू ने चंद्रशेखर साहू के विरुद्ध घरेलू हिंसा (Domestic violence) और दहेज अधिनियम (Dowry act) 498 की धारा 125 के तहत मामला दर्ज किया। इस अवधि के दौरान, जब अदालतें चक्कर लगाना शुरू कर दिया, तो वे 11 साल तक जारी रहे। ये यात्राएं राष्ट्रीय लोक अदालत में न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं के सामने शनिवार 12 दिसंबर को रुकने के लिए आईं।

बच्चे की बीमारी को करीब लाया

दोनों पति-पत्नी अलग-अलग रह सकते थे, लेकिन उनके पिता चंद्रशेखर बच्चों की देखभाल कर रहे थे। कुछ दिनों के बाद, पूर्णेश को टीबी की बीमारी हो गई, पति-पत्नी दोनों बेचैन हो गए। वे दोनों बच्चे का इलाज करवाने के लिए एक साथ दौड़ने लगे। इस दौरान, दोनों फिर से एक-दूसरे के करीब हो गए और दोनों के बीच झगड़ा खत्म होने लगा। आखिरकार, वकील अजय सिंह चौहान की बार-बार की दलीलों और काउंसलिंग के बाद दोनों पति-पत्नी एक हो गए।

न्यायाधीशों के सामने पहनाई माला

शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में, चंद्रशेखर साहू और ममता साहू ने न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं के सामने एक-दूसरे को माला पहनाई और ममता ने चंद्रशेखर के पैर छुए। इसके साथ ही चंद्रशेखर ने ममता को अपने साथ रखने का भी वादा किया। पति और पत्नी दोनों ने एक ही बात कही है, वे अपने असहाय बच्चों की खातिर एक-दूसरे के साथ रहना तैयार गए हैं ताकि बच्चों का भविष्य बनाया जा सके।

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