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#FarmerWidows: पंजाब के आर्थिक तौर पर संपन्न किसानो के ऐसे दयनीय हालात में पहुँचाने के जिम्मेदार कौन है? , खेती के लिए मरते किसान... DNA special Sudhir Chaudhary ...

  नमस्कार दोस्तों भारत में किसानो की स्थिती दयनीय है , किंतु पंजाब किसान सबसे ज्यादा आर्थिक तौर संपन्न माने जाते थे. लेकिन कल मैंने DNA में सुधीर चौधरी (Sudhir Chaudhary) जी शो जिसमें उन्होंने और उनकी टीम पंजाब की मालवा की गांव वास्तविकता दिखा रहे थे।जिस पंजाब फिल्मों और कहानियों में पंजाब के जिन किसानों को सबसे खुशहाल किसान के रूप में दिखाया जाता है। उन किसानों के पास भी अब आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। देश भर में जितना अनाज उगाया जाता है।

Sudhir Chaudhary
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उसमें पंजाब की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से अधिक है।लेकिन अब पंजाब के कई गांव ऐसे हैं जहां किसी भी परिवार में कोई पुरुष नहीं बचा है।आपको बता दे कि कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी( Rahul Gandhi) ने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनते ही वो किसानो कर्ज माफ कर देंगे। किंतु वास्तविकता में पंजाब किसानो की कर्ज माफी नही हुई है , इन सभी किसानो ने अपना दर्द zee news पर बंया किया है।




पंजाब मालवा गांव एक भी पुरुष जीवित नही

पंजाब का मालवा गांव एक भी पुरुष जीवित नही है , ये गांव को लोग अब विधवाओं का गांव कहने लगे हैं। इस गांव जिसने घर है उसमें रहने वाले सभी पुरुष कर्ज के बोझ से आत्महत्या कर चुके है। सबसे बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है कि आजादी इतने सालो उपरांत भी हमारे किसानो अच्छे दिन क्यों नही आए। हमारे देश के पुर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री कहते थे कि जय जवान, जय किसान का नारा भी दिया था।  



उद्योगपति कर्ज लेकर विदेश में अय्याशी करते 


जिस देश कई बड़े उद्योगपति के कर्ज लेकर विदेश भाग कर जिंदगी भर अय्याशी करते है , लेकिन तब भी बैंक वाले उन उद्योगपति के कुछ नही बिगाड़ पाता है ,जिसका वर्तमान में  प्रत्यक्ष उदाहरण विजय माल्या, निरव मोदी और ऐसे  कई उद्योगपति जो कर्ज ले कर विदेश भाग चुके है। लेकिन वर्तमान सरकार ऐसे कई सख्त कदम जिससे ऐसे लोगो को जेल पहुँचाया जाए। लेकिन हम ये भी कह सकते है कि कानून प्रक्रिया में ओर भी तेजी करने की जरूरत है। लेकिन जब कोई किसान बैंक से कुछ पैसे कर्ज लेता है। तो बैंक वाले  समय EMI  नही चुकाने पर तुरन्त ही कार्रवाई कर देता है। 

 



पंजाब में 10 वर्षों में साढ़े तीन हजार से ज्यादा किसानों ने की आत्महत्या


पंजाब में पिछले 10 वर्षों में साढ़े तीन हजार से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं और उसमें से 97 प्रतिशत आत्महत्याएं पंजाब के मालवा इलाके में हुई हैं। उसका परिणाम ये हुआ है कि मालवा के जिन खेतों में किसान कभी कपास, गेहूं और धान उगाया करते थे। वही खेत अब किसानों के कब्रिस्तानों में बदलने लगे हैं।


पंजाब सरकार, केंद्र सरकार के नए कृषि विधेयक



जो पंजाब सरकार, केंद्र सरकार के नए कृषि विधेयक का विरोध कर रही हैं । लेकिन वास्तविकता ये है कि पंजाब की सरकार खुद किसानों को उनका अधिकार देने में असफल रही है।कई बार किसानों को उनकी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम दाम पर बेचनी पड़ती है। इसका नतीजा ये होता है कि किसान कर्ज़ चुकाना तो दूर अपनी लागत तक नहीं वसूल पाते। इसी वजह से पंजाब किसानों की आत्महत्या का नया केंद्र बन गया है।



राजनीति दल के लिए किसानो को बस एक वोटर तौर देखती है


देश की राजनीति दल किसानो को बस एक वोटर तौर देखती है , क्योंकि आंकड़े यही कहती है कि देश में  वर्ष 2019 में भारत में 10 हज़ार 281 किसानों ने आत्महत्या की थी और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह कर्ज़ ही थी। भारत में हर साल कुल जितने लोग आत्महत्या करते हैं उनमें से 8 प्रतिशत किसान ही होते हैं। भारत में किसानों के जो परिवार कर्ज़ में डूबे हैं उन पर औसतन 1 लाख 10 हज़ार रुपये का कर्ज़ है। सुनने में ये रकम आपको छोटी लग सकती है। लेकिन जो किसान साल भर अपने खेतों में फसल के उगने का इंतज़ार करता है और फिर उसे मामूली से मुनाफे पर बाज़ार में बेचता है। उसके लिए घर चलाने के साथ साथ कर्ज की किस्तें चुकाना कठिन हो जाता है और कई बार परिस्थितियां ऐसी हो जाती है कि किसान आत्महत्या कर लेते हैं। वास्तविकता ये है कि भारत में एक किसान जीते जी सिर्फ एक वोट बनकर रह जाता है और मरने के बाद वो सिर्फ मुआवजे वाली एक सरकारी फाइल में बदल जाता है।



देश के सरकारे को किसानो की आत्महत्या रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। इसके लिए किसानो कर्ज बजाय किसानो की आय बढ़ाने प्रयास करना चाहिए। फसलो का उचित फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य देना चाहिए।  अन्नदाता है तभी हमारी थाली में भोजन है। 


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