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#BiharElectionResults2020 : बिहार में दिखा मोदी मैजिक का असर , जानिए जीत की 100 प्रतिशत गारंटी मोदी नाम केवलम ...

बिहार चुनाव के परिणाम पर सबसे सटीक विश्लेषण ।।।।

#BiharElectionResults2020

भारतीय राजनीति अब नई दौर में आ गई अब बस मोदी नाम केवलम बोलने से उम्मीदवार विजय हो रहे है। इंदिरा गांधी बाद देश में सबसे मजबुत नेता (Strong leader) बन के कोई उभरा है तो वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी।  भाजपा अगर बंगाल व केरल जीतने की सपना देख रहा है तो वो केवल नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) नाम से ही , प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आने पहले जहाँ जाति विभाजित करके चुनाव हुआ करता था। बिहार जैसा राज्य में तो चुनाव समय जाति समीकरण देख टिकट दिया जाता है उसी राज्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मैजिक सामने जातिगत समीकरण समाप्त हो गई। ये जीत RSS की हिन्दुत्व की विचारधारा की हुई। जो लोग संघ (RSS ) को करीब से जानते हैं , उन्हे जरूर मालूम है कि RSS हमेशा ही अगले 10 से 15 साल के प्लान बना के रखता है। ये बात सबको मालूम है कि RSS बंगाल व केरल जीतने प्लान बना रहा तो RSS अगले 30 से 50 साल सत्ता में रहने के लिए प्लान बना चुका है ।  


मोदी मैजिक विधानसभा भी चला


जब exit poll आने बाद सभी राजनीति विश्लेषक लगाकर माने लगे थे कि मोदी मैजिक बस लोकसभा चुनाव में ही चलते है। लेकिन वास्तविकता नतीजे आए तो वही हुआ जो हमेशा होता है यानी मोदी मैजिक फिर चल गया है। आज दौर राजनीति में  परिभाषा तय चुका है कि चाहे कितना भी एंटी-इनकम्बेंसी क्यों ना हो लेकिन M फेक्टर सामने वो समाप्त हो जाता है। बिहार चुनाव में नितीश कुमार Nitish Kumar प्रति एंटी-इनकम्बेंसी बहुत ही ज्यादा था। ये बात बड़े-बड़े राजनीति विश्लेषक जानते थे कि अगर इस बार चुनाव कोई जीता सकता है तो वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी है। हार चुकी बाज़ी में जी-जान लगाकर कोई जीताए तो वो है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी है। जरा सोचिए नितीश कुमार हार की भय में आपा खो चुके थे, उटपटांग बक रहे थे, चेहरा उतर गया था,  तेजस्वी की आंधी चल रही थी उस समय नरेन्द्र मोदी ने पुरी हवा ही बदल दिया है। ये बात में ने शुरू से कह रहा था कि इस बार चुनाव में कोई लहर नही चल रहा था। जब exit poll आए तो कई लोग मेरे बात गलत कह रहे थे। लेकिन जब में ने  exit poll का विश्लेषण किया था तब में कहा था कि इस बार चुनाव में कोई लहर नही चल रहा है इसकी वजह में ने बताया था कि जब मतदान 52 से 56 प्रतिशत तक होता है तब कोई लहर नही होता है , इस समय ये भी तय करना सबसे कठिन होता है कि किसकी सरकार बने वाली है। मेरा वो विश्लेषण सबसे सटीक साबित हुआ है। जहाँ कुछ लोग सर्वे देख कर अपना विश्लेषण दे रहे वही सबसे उलट मेरा विश्लेषण था। में ने साफ कहा था कि इस बार चुनावी चौकाने वाला होगा लेकिन सबसे बड़ी पार्टी एनडीए से भाजपा होगा तो वही महागठबंधन से आरजेडी होगा। हुआ भी वही जो में ने कहा था। में ये कहा था कि इस बार चुनाव में महागठबंधन 100 से 140 के बीच सीटे मिलेगी मेरा बात एक फिर से सही साबित हुई , महागठबंधन को 110 सीटे मिली वही एनडीए के लिए कहा था कि 115. से 128 के बीच के सीटे मिली थी ,  हुआ भी कुछ ऐसा ही एनडीए को मिला 125 सीटे। आपको जान कर हैरानी होगी कि ये विश्लेषण में ने आज चार महीने पहले ही कर चुका था। एक बात में हमेशा ही बोलता हूँ  क्रिकेटर अंतिम बॉल तक नही पता होता है कि किसकी जीत होने वाला है उसी तरह राजनीति में जब तक अंतिम वोट नही गिना जाता है तब नही कहा जा सकता है कि किसकी सरकार बने वाला है। उस दिन जब exit poll विश्लेषण कर रहा था तब में ने कहा था कि exit poll वास्तविकता नतीजा नही माना चाहिए ।

Exit poll गलत क्यों साबित हुई 


Exit poll लोग अक्सर ही वास्तविकता आकड़े मान लेते है जो कि बिल्कुल ही गलत है क्योंकि exit poll महज एक प्रतिशत के राय आधारिक होती है । जैसा कि में ने उस दिन exit poll का विश्लेषण कर रहे थे तब भी बताया था कि हरियाणा के exit poll गलत साबित हुई थी। इसलिए कभी भी exit poll वास्तवविकता आकड़े ना समझ ले। कई  सर्वे एजेंसिया एक प्रतिशत से भी कम सैपल साइज रहता है। ऐसे कई सर्वे करीबी मुकाबले होने की दावा कर रहे थे वो बिल्कुल सही साबित हुई है। एक पत्रकार कहा था कि बिहार लोग राजनीति रूप इतना ज्यादा जागरूक है। अगर आप ये पुछे गे कि किसे वोट दिया है तो बिहारी वोटर मजे हुए राजनीतिज्ञ तरह आपको इतना राजनीति ज्ञान देगा आप भी आश्चर्यचकित हो जाएगे। भारत के अन्य राज्यो तरह नही है यहाँ के वोटर राजनीति रूप सबसे जागरूक होते है।




भाजपा जीत की बड़ी वजह 


भाजपा की जीत सबसे बड़ी वजह नरेन्द्र मोदी की नाम तो है लेकिन भाजपा ने एक रणनीति के तहत चुनाव लड़ा सरकार जनहित के निर्णय लेते हुए किसान, महिलाओं, आदिवासियों से लेकर अन्य हितग्राहियों के खाते में योजनाओं की रकम भेजती रही तो दूसरी ओर प्रचार का अभियान पूरी तेजी से चला। भाजपा में टीम भावना का समन्वय नजर आया-सत्ता और संगठन के समन्वय ने कार्यकर्ताओं में भी जोश बनाए रखा परिणाम स्वरूप भाजपा को बड़ी जीत हासिल हुई है। भाजपा की जीत में भाजपा के बूथ स्तर कार्यकर्ता भी अहम रोल रहा है , जब नरेंद्र मोदी और अमित शाह आए तब से भाजपा के चुनाव लड़ने तरीके बहुत ही बदलाव हुआ है। उसमें बूथ प्रमुख है , बुथ प्रमुख काम होता है कि अपने बुथ के ज्यादा से ज्यादा वोट भाजपा के लिए दिलाए जाए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रति पुरे देश में pro-incumbency में है , जब 2024 में फिर से चुनाव होगी तो भाजपा की जीत तय है और सीटो संख्या 400 से ज्यादा होगी। ये बात सभी राजनीति विश्लेषक मानते है कि 2014 के बहुमत से सरकार बनाने के बाद भाजपा लम्बे समय तक राज करेंगी। जैसा कि में ने कहा कि RSS के प्लान अगले 40 से 50 साल तक सत्ता रहने का है़। 


मंत्रियों को अलग-अलग विधान सभा क्षेत्रों  जिम्मेदारी 


एक तरफ जहां प्रमुख नेताओं को पार्टी ने सक्रिय किया था तो वहीं संगठन से जुड़े पदाधिकारियों को अलग-अलग विधान सभाओं की जिम्मेदारी दी गई। इतना ही नहीं मंत्रियों को भी विधान सभा क्षेत्रों में तैनात किया गया था साथ ही उनसे यह भी कहा गया था कि जिस मंत्री के क्षेत्र में पार्टी हारेगी उसे मंत्री पद तक खोना पड़ सकता है। इसी का नतीजा रहा कि मंत्रियों ने भी किसी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ी।



 नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बने के बाद देश की राजनीति एक नई दौर की शुरुआत हुई। जिसे आसान शब्दो में व्याख्या करे तो ये वो दौर जब देश में एक अलग जाति का बना वो थी गरीबो की,  पिछले 70 सालो से हमेशा से  गरीबी मिटाने बात तो कही गई लेकिन गरीबी नही मिटा है। नरेंद्र मोदी आने के बाद गरीबो के लिए जन कल्याण योजना बनाए गये। उस योजना के सफलता पुर्वक गरीब तक पहुँचाया भी गया। 





इस बार के वोट प्रतिशत क्या कहती हैं   ?


पिछले बार भाजपा की सीटे की कमी थी लेकिन वोट शेयर ज्यादा था , उस समय भाजपा का वोट शेयर 25 प्रतिशत थी जो कि उस समय सबसे ज्यादा था। वही बात करे इस बार कि इस बार सीटे ज्यादा लेकिन वोट शेयर कम हो चुका है। इस बार भाजपा की वोट शेयर 19.46 प्रतिशत है। और इस बार सीटे 74 है। जदयू बात करे तो पिछले बार से बहुत ज्यादा नुकसान हुआ और उसमें 70 सीटे जीती थी इस बार महज 43 सीटे जीत पाई है और वोट शेयर की बात करे तो 15.39 प्रतिशत पिछली बार 17.3 प्रतिशत था। वही आरजेडी की बात करे तो पिछली वोट शेयर 18.8 प्रतिशत था और इस बार बढ़कर 23.1 प्रतिशत हो गया है। सीटो की संख्या पहले से पाच सीटे कम हुई इस बार भी आरजेडी सबसे बड़ा दल बना कुल 75 सीटे हासिल किया है।



 

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