Breaking News

Rajasthan Karauli temple preist murder case & Rahul Rajput Murder Case : दोनो घटनाओ ने फर्जी सेक्युलर राजनीति का असली चरित्र उजागर किया।


Rajasthan Karauli temple preist murder case & Rahul Rajput Murder Case
नमस्कार दोस्तों राजस्थान के करौली एक पुजारी जिन्दा जला कर हत्या कर दिया और दुसरी घटना देश की राजधानी दिल्ली में मांब लिंजिग में राहुल राजपूत (Rahul Rajput ) की हत्या कर दी गई। भारत धर्मनिरपेक्ष है या फिर सेक्युलर इन दोनो घटनाओ में खामोशी हमारे देश के फर्जी सेक्युलर राजनीति प्रत्यक्ष रूप से दर्शन करवा दिया। । आज हम असल धर्मनिरपेक्षता क्या होती है उसके बारे में भी विस्तार से बात करेंगे। सबसे पहले हम बात करते है राजस्थान के करौली में एक बहुत ही दुंखत घटना घटी।


राजस्थान के करौली घटना -



जहाँ पर पुजारी को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया है। कैलाश मीणा अपने लोगों शंकर, नमो, किशन और रामलखन के साथ मंदिर के बाड़े पर कब्जा करके छप्पर लगा रहा था। इसका विरोध करने पर उसने पेट्रोल डालकर आग लगा दी। पुजारी बाबूलाल ने बताया था कि उसका परिवार मंदिर की 15 बीघा जमीन पर खेतीबाड़ी करके अपना गुजारा करता था। बाबूलाल वैष्णव बूकना गांव के पुराने राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी थे।यह राजस्व रिकार्ड में दर्ज है। इस मंदिर के लिए गांववालों ने जमीन दान की थी। आपको बता ये पुरी जमीन बंजर थी, जिसे पुजारी कड़ी मेहनत से खेती करने योग्य अर्थात उपजाऊ बनाया था। पिछले एक महीने से आरोपी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। इसकी शिकायत पंचायत में की गई थी।  घटना के कुछ दिन पहले ही गांव में बैठक हुई थी और आरोपियों के समझाया गया। परंतु प्रशासन और पुलिस की निष्क्रियता से आरोपियों के हौसले बुलंद हो गए। मृतक के परिजन ललित ने इस मामले में पटवारी और पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी केस दर्ज करने की मांग की है।

दुसरा घटना देश की राजधानी दिल्ली के आदर्श नगर की मूलचंद कॉलो घटी है।

दिल्ली के आदर्श नगर की मूलचंद कॉलो घटना

Rahul Rajput Murder Case
जहाँ पर इस्लामिक कट्टरपंथी भीड़ ने 18 साल के हिन्दू युवक राहुल राजपूत (Rahul Rajput ) मांब लिंजिग में की हत्या कर दी। राहुल राजपूत (Rahul Rajput ) की गलती बस यही थी कि वो दुसरे महजब की लड़की से प्यार करता था , हर बात इस सविधान खतरे वाले बयान देने वाले हमारे देश के तथाकथित धर्मनिरपेक्षता ठेकेदार नेता भी गायब है। जो केजीवाल युपी में एक मांं लिंजिग के घटना पर युपी चलेे गये थे , वही Arvind Kejriwal (अरविंद केजरीवाल) ने दिल्ली के आदर्श नगर की मूलचंद कॉलोनी नही गये , क्योंकि इस बार मांब लिंजिग मरने वाला धर्म हिन्दू है , और मारने वाला का धर्म उसी वोट बैक से आता है , जो कि कथित तौर इस देश में अल्पसंख्यक कहा जाता है परंतु वास्तविकता ये है कि वो इस देश  दुसरी सबसे बड़ी आबादी है। 

मिडिया प्रेमिका बयान बाद दिल्ली पुलिस पर प्रश्न चिन्ह खड़े हो

इस मामले प्रश्न चिन्ह दिल्ली पुलिस (Delhi Police) पर भी खड़ी हो रही है क्योंकि मिडिया में प्रेमिका बयान जो सामने आ रही है, उसके अनुसार लड़की का कहना है कि जब हमलावर राहुल को पीट रहे  थे। तो वह उनकी जान बचाने के लिए पास की पुलिस चौकी पर पहुंची। वहां पर कुछ पुलिस वाले चाय पी रहे थे। जब उनसे साथ चलने और राहुल की जान बचाने की फरियाद की तो वे बोले कि झगड़ा हो रहा है तो हम क्या करें। लड़की का आरोप है कि यदि वे लोग साथ आ जाते तो राहुल की जान बचाई जा सकती थी। आपको बता दे कि इस मामले  में पुलिस अब तक 5 आरोपियों को हिरासत में ले चुकी है। वही लड़की आरोप है कि राहुल राजपूत (Rahul Rajput ) को मारने वाला की संख्या 8 थी। और  3 लोगों को अब तक क्यों नहीं पकड़ा गया है, पीड़ित परिवार और लड़की ने इस मामले में पुलिस पर आपराधिक लापरवाही का आरोप लगाया है। वहीं लड़की की जान को खतरा देखते हुए उसे नारी निकेतन भेज दिया गया है। आरोपी नाम इस प्रकार है - लड़की का भाई मोहम्‍मद राज (20), एक रिश्‍तेदार मानवर हुसैन (20) और उसके तीन नाबालिग दोस्‍त शामिल हैं। जबकि तीनो के  नाबालिग होने के कोई सबुत नही मिला है। हो सकता है कि आरोपी बचाने का षडयंत्र हो।

इन घटनाओ ने तथाकथित धर्मनिरपेक्षता चरित्र उजागर किया

इन दोनो घटनाओ ने देश तथाकथित धर्मनिरपेक्षता  कहे जाने सेक्युलर नेता , वामपंथी , लिबरल गैंग,  पत्रकार और फिल्मी सितारे इन सब का नकली धर्मनिरपेक्षता का चरित्र उजागर हुआ । ये वही लोग जो हर मांब लिंजिग घटना पर देश के सविधान खतरे होने बात करते है परंतु इन दोनो घटनाओ पर एक अजीब से खामोश हो जाते है। NDTv के पत्रकार Ravish Kumar (रवीश कुमार) जो कि इस देश के तथाकथित अल्पसंख्यक के मांब लिंजिग होती थी तो खुब चिलाते थे , परंतु इन दोनो घटनाओ पर वो भी खामोश हो चुके है क्योंकि मरने वाला का धर्म हिन्दू है।  

तुष्टिकरण की राजनीति

जबतक देश में तुष्टिकरण की राजनीति चलता रहेंगा तब तक भारत सच्चे अर्थ में धर्मनिरपेक्ष नही होगा , भारतीय धर्मनिरपेक्ष शब्द अर्थ विपक्ष दलो ने ये बना दिया कि बहुसंख्यक के पक्ष बोलने वाला  धर्मनिरपेक्ष नही है , परंतु  अल्पसंख्यक के गलत तो उसके पक्ष बोलने धर्मनिरपेक्ष माना जाएगा। हमारी देश की तुष्टिकरण की राजनीति (The politics of appeasement) नीति ने इस देश को बहुत ज्यादा बर्बाद कर दिया था , इस देश दुर्भाग्य अल्पसंख्यक तुष्टिकरण करने वाले खुद को धर्मनिरपेक्ष कहते जबकि धर्मनिरपेक्ष सही अर्थ को इन लोगो ने कभी माना ही नही है।

धर्मनिरपेक्ष वास्तविकता क्या आईए जानिए

धर्मनिरपेक्षता शब्द का जनक जॉर्ज जेकब हॉलीयाक को माना जाता है,जो की मूलतः एक व्याख्याता और संपादक था।

वास्तविकता हमारा देश कभी भी धर्मनिरपेक्ष हो ही नही सकता है क्योंकि आपको जो धर्मनिरपेक्ष  के बारे बताईए गा , वो  धर्मनिरपेक्ष नही बल्कि फर्जी धर्मनिरपेक्ष है। सेकुलरिज्म का मतलब ऐसी व्यवस्था जो किसी धर्म विशेष पर आधारित न हो और शासनिक नीतियों का नियमन किसी धर्म विशेष को ध्यान में रख कर न किया जाए। जी नहीं हमारा संविधान एक तरफ भारत को धर्मनिरपेक्ष कहता है और दूसरी ओर हिन्दू विवाह अधिनियम लागू करता है। एक तरफ धर्मनिरपेक्ष कानून है जिसमें मुस्लिम की शादी मुस्लिम धार्मिक कानूनों और मुस्लिम पर्शनल लॉ है। भला आप एक धर्मनिरपेक्ष देश किसी धर्म विशेष का प्रर्शनल लॉ कैसे बनाया जा सकता है। जिस सेकुलरिज्म का मूल ही धर्म विरोध था, वह अब धर्म के घालमेल से क्या साबित करना चाहता है। विरोधाभास बार बार यही दर्शाता हैं की धर्मनिरपेक्षता जैसी कोई विचारधारा हमारे समाज में अवस्थित नहीं हो सकती, हाँ विशेषकर राजनीतिक लोगों के धर्म की धर्मनिरपेक्ष खेती में खाद पानी का काम करती है।  भारतीय परिवेश के लिए अक्सर कई अलग अलग विद्वान अलग अलग राय देते हैं इस मुद्दे पर कोई कहता है की इसका मतलब धर्मविरोध नहीं है। इसका अर्थ है सभी धर्मों की समानता। तो ये तो हमारे मूल अधिकारों में भी है, समानता का अधिकार क्या जरुरत है धर्मनिरपेक्ष तड़का लगाने की,और हम उस सेकुलरिज्म को सर्व धर्म सम्भाव के लिए सीढ़ी मानतें है जिसकी उत्पत्ति ही धर्म विरोध के धरातल पर हुई थी।तो क्या हमारी सदियों पुरानी हिंदुत्व की अवधारणा इस आयतित विचारधारा के सामने नहीं ठहरती,जिसके मूल में सर्व धर्म सम्भाव और सहिष्णुता है। हिंदुत्व ने आज तक सभी धर्मों को स्वीकार किया और स्थान दिया सम्मान दिया। सेकुलरिज्म नामक विदेशी बालक ने अभी जन्म लिया किलकारियां भरने की उम्र गयी नहीं की गुलाम मानसिकता और सत्ता और कानून के मठाधिशों ने इसका राज्याभिषेक कर इसे युगों युगों पुरानी संस्कृति और विचारधारा के सामने खड़ा कर दिया।

असल धर्मनिरपेक्ष पर सटीक विश्लेषण बहुत जल्द ही ले कर आऊ गा तबतक के लिए आप से यही कहुँगा पुस्तक पढ़िए असल धर्मनिरपेक्ष क्या है। और फर्जी  धर्मनिरपेक्ष नाम पर दुकान चलाने वाले नेताओ के दुकान बंद करवाए क्योंकि ये लोग जिस धर्मनिरपेक्ष की बात कर रहे है वास्तविकता वो नकली धर्मनिरपेक्ष है।  बहुत शीघ्र ही असल धर्मनिरपेक्ष पर सबसे सटीक विश्लेषण लेकर मेरे साइट Shashiblog.in  आऊ गा।

दोस्तों आपको ये लेख कैसा लगा हमे कामेंट जरूर बताईए और पंसद आए तो मित्रो साझा शेयर करे साथ में latest information पाने के हमारे साइट को बिल्कुल ही नि: शुल्क subscribe कर ले.


लेखक - Shashi Kant yadav 


No comments