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patliputra ka 2020 mein king kon Episode 4 : बिहार की किसानो की आय देश में सबसे कम क्यों ? और जानिए बिहार के किसानो की स्थिती कैसे सुधेरेगी..

 नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है पाटलिपुत्र का 2020 में किंग कौन (patliputra ka 2020 mein king kon) बिहार चुनाव हमारा स्पेशल सीरीज है , इस सीरीज जरिए बिहार के सभी समस्या  को  बताएगे और उसके सामधान भी बताए गे। जैसा कि मेरा पुराना आदत है केवल समस्या ही नही बल्कि सामधान भी बताते है।

patliputra ka 2020 mein king kon Episode 4
आज का हमारा विषय है देश में सबसे कम बिहार किसानो की आय क्यों , बिहार किसानो स्थिती कैसे सुधार किया जा सकता है।


बिहार की किसानो आय देश सबसे कम क्यों ?


बिहार में किसानों की आय कम होने के कई वजह है। सबसे पहले तो यहां मूल संसाधनों का अभाव है। सरकारी नीतियां धरातल पर लागू नहीं हो रही है। फल-सब्जियों या उपज को रखने के लिए कोल्ड स्टोर नहीं है। बिहार का एक हिस्सा बाढ़ से प्रभावित रहता है, जो हमने पिछले episode में भी बताया था आप ने अभीतक नही देखा है , तो फिर हमारे YouTube चैनल पर उपलब्ध है। या फिर निचे दिए गए link में देख ले । 


बिहार किसानो की आय कितनी 


कृषि प्रधान बिहार की स्थिति बहुत ही दयनीय है। हाल के एक सर्वे अनुसार  बिहार  किसानों की आय मात्र 3,558 रुपये है, जबकि पंजाब 18,059 रुपये के साथ अव्वल है। 


बिहार किसानो आय कमी वजह 


खेती निवेश मांगती है। बिहार के किसानों के पास धन का अभाव होता है । बैंकों से सभी को लाभ नहीं मिल पाता। समय पर कर्ज की राशि मिलने में कई बार परेशानी होती है। कच्चा धंधा होने के वजह पूंजी डूबने की आशंका में बड़े किसान भी कामचलाऊ पूंजी निवेश करते देखे जाते हैं। 


ये थी बिहार के किसानो की समस्या अब हम बात करते इन सभी समस्या का सामधान क्या है।


बिहार में कृषि में सुधार कैसे क्या जाए आईए जानते हैं


(1) बिहार की खेती में जरूरत के हिसाब से तकनीकी यंत्रों को अपनाये जाने की जरूरत है , अक्सर ये देखा जाता है कि किसान यंत्रों का महंगे होने की  वजह से खरीदना नही चाहते है।


(2) बिहार किसानो को सस्ते दरो खेती के लिए लोन उपलब्ध करवाए जाए , कई बार देखा गया ग्रामीण क्षेत्रो के किसानो को लोन लेने में कई दिक्कत का सामना करना पड़ता है , इसलिए कृषि लोन प्रक्रिया ओर भी आसान बनाया जाए।



(3)गांवों को सङकों से जोङे जाने की हालिया पहल बहुत उचित कदम है , लेकिन पहले गांव से कृषि उत्पादों को बाजार लाने की प्रक्रिया खर्चीली और उबाऊ थी। अब स्थिति थोङी सुधरी जरुर है लेकिन कोल्ड स्टोरेज जैसे भंडारण और उचित विपणन तंत्र का अभाव अभी भी प्राय देखने को मिल जाता है।



(4.) कृषि में पानी के उपयोग की दक्षता में सुधार करने की आवश्यकता है। इसके लिये ज़रूरी है कि बाढ़ के जल को सिंचाई प्रणालियों जैसे ड्रिप प्रणाली जरिए इस्तेमाल किया जाए। जिस बाढ़ के तकरीबन 50-70 प्रतिशत पानी को सिंचाई कार्य हेतु उपयोग में लाया जा सके। 

 


(5) फसल बीमा का सही अनुपात में भुगतान करने का सबसे बेहतर तरीक यह है कि फसल नुकसान के संदर्भ में ज़मीनी छानबीन के साथ-साथ उपग्रहों, सेंसरों और अन्य आधुनिक उपकरणों के माध्यम से जानकारियाँ एकत्रित की जानी चाहिये, ताकि ज़मीनी स्तर पर वास्तविक आँकड़ों को प्राप्त किया जा सके। 


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