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bihar election 2020 Super exclusive: 50-50 फॉर्मूला क्या है , और जानिए तो क्या Nitish Kumar फंस गये भाजपा के चक्रव्यूह...

 


कटिहार: नमस्कार दोस्तों जैसा कि हम ने आपको सबसे पहले बता दिया था कि चिराग पासवान ने एनडीए अलग-अलग होने का निर्णय ले लिया है। आपको बताते चले कि सबसे पहले ओर सबसे सटीक इफॉर्मेंशन आगे भी देते रहेंगे। उसी तरह आज हम आपको और दो बहुत बड़ी खबर देने जा रहे है जो कि super exclusive है , जो अबतक किसी चैनल नही बताया है।

Bihar Election 2020 :NDA से अलग होगी LJP, Chirag Paswan ने लिया निर्णय , करेंगे आज शाम को औपचारिक ऐलान ..


bihar election 2020

जी हाँ दोस्तों हम आपको बताने जा रहे है ,  super exclusive है , इसी साथ ही हम आपको सबसे सटीक विश्लेषण भी बताएगे , आज हम आपको बताएगे कि  kase Nitish Kumar भाजपा के चक्रव्यूह फंस गए हैं। 


चिराग पासवान नितीश कुमार नेतृत्व चुनाव ना लड़ना वैचारिक मतभेद था इसके पिछे कोई ओर था.


सबसे बताते है कि चिराग पासवान ने नितीश कुमार नेतृत्व चुनाव लड़ना नही चाहते क्योंकि Ljp का जदयू से वैचारिक मतभेद है। परंतु ये सब कुछ Chirag Paswan ने किया है , या इसके पिछे भाजपा का हाथ है ,  ऐसा हम इसलिए हमारे पास जो इनफॉमेशन है , उसके मुताबिक चिराग पासवान (Chirag Paswan)  के एनडीए बाहर होने की पहले से ही तय था , पिछले सप्ताह सोमवार ये इनफॉमेशन हमारे पास पटना से आ गई थी। चिराग पासवान (Chirag Paswan) एनडीए से अलग होने के औपचारिक ऐलान संडे करेंगे। चिराग पासवान (Chirag Paswan) ये कहा था कि वो केवल जदयू विरुद्ध ही चुनाव लड़ेगे , इसके मायने आप समझ सकते है , ये सब कुछ भाजपा के चक्रव्यूह हिस्सा जिसमें नितीश कुमार बुरी तरह फंस चुके है। भाजपा चाहती है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री  BJP का हो। और इसके लिए चिराग पासवान (Chirag Paswan) से कहा वो जदयू सीटे पर चुनाव लड़े जिससे जदयू को नुकसान होगा। इस से विधानसभा चुनाव में जदयू की सीटे घटेगी जिसके बाद आसानी से भाजपा अपने शर्तो पर अपना मुख्यमंत्री बना सकता है । अगर सबकुछ भाजपा के लिखे हुए स्क्रिप्ट अनुसार हुआ तय है , इस बार बिहार भाजपा मुख्यमंत्री ही होगा।



NDA तय हो गई सीटे जानिए 50-50 फॉर्मूला के बारे में विस्तार से


आज हम आपको एक बहुत ही बड़ी खबर बताने जा रहे है जो कि super exclusive  है , NDA में सीटे तय हो चुकी है। जिसके अनुसार  50-50 फॉमुला तय है। आज हम आपको बता दे कि 121 सीटो पर भाजपा चुनाव लड़ने जा रही वही जदयू 117 चुनाव लड़ रही है क्योंकि जदयू अपने कोटे पांच सीट को Jitan Ram Manjhi (जीतन राम मांझी) हम (hum ) पार्टी को दिया है ,  इस बीच मिडिया रिपोर्ट सामने आ रही उसके माने तो  जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने अपने 6 सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम का चयन कर लिया है। जो कि वकई हैरान करने वाली खबर है। ऐसा भी हो सकता है कि भाजपा भी अपनो कोटे के एक सीट को Jitan Ram Manjhi (जीतन राम मांझी) को दे। अभी हमारे पास इनफॉमेशन है उसके मुताबिक जीतन राम मांझी को पांच सीट ही दिया जाएगा ।




जानिए नितीश कुमार विरुद्ध भाजपा चक्रव्यूह क्या है


दोस्तों आज हमको दुसरा super exclusive न्यूज दे रहे है जो कि नितीश कुमार ( Nitish Kumar) विरुद्ध  भाजपा का चक्रव्यूह  , जी हाँ दोस्तों सुत्रो माने तो भाजपा कई बड़े नेता चाहते है। कि इस बार बिहार में भाजपा( BJP) का मुख्यमंत्री हो , इसी प्लान तहत चिराग पासवान (Chirag Paswan)  नितीश कुमार के पार्टी जदयू विरुद्ध चुनाव लड़ने का ऐलान किया है । यू समझिए कि Ljp का जदयू से वैचारिक मतभेद है परंतु भाजपा प्लान हिस्सा है  , जिसमें नितीश कुमार पार्टी इतना नुकसान करवा दिया जाए , कि वो मुख्यमंत्री बने स्थिती में ना हो , ऐसी परिस्थिती भाजपा बेहतर जानती है कि सरकार कैसे बनाना है ।



जानिए कैसे भाजपा बना सकता है अपना मुख्यमंत्री 


अगर भाजपा व जदयू 50-50 फॉर्मूला तहत चुनाव लड़ती है तो इसमें जदयू को ज्यादा नुकसान होगा क्योंकि इस पहले 2010 में जब भाजपा-जदयू  गठबंधन था तो जदयू 150 सीटो पर अकेले लड़ती थी। परंतु इस बार बराबरी सीटो पर दोनो पार्टी चुनाव लड़ेगी। जिससे यकीनन भाजपा फायदा होगा। बिहार राजनीति गणित समझिए , 50-50 फॉर्मूला तहत भाजपा 121 सीटे पर चुनाव लड़ेगी जिसमें अगर भाजपा 90 सीटे पर जितती है तो  ljp के 30 सीटे को मिला दे और जीतन राम मांझी) हम (hum ) पार्टी पांच सीटे पर चुनाव लड़ रही उसमें से अगर वो दो सीटो को भी जीतने में भी कामयाब होते है तो भाजपा के लिए अपने दम पर सरकार बनाना कामयाब हो जाएगी क्योंकि 90+30+2 =122 आंकड़े तक पहुँच जाती है यानी सरकार एनडीए की ही बनेगी परंतु वो जदयू के बिना ही बनेंगा। अगर कुछ सीटे कम पर जाएगी तो निर्दलीय उम्मीदवार की सहायता से भी सरकार भाजपा बना लेंगी। ये सभी फॉमुला तभी कामयाब होगा जब जदयू कमजोर होगा , यानी सीधे शब्दो कहे तो जदयू सीटे 30 से 40 के बीच हो। अब बखुबी समझ गए होगे  चिराग पासवान (Chirag Paswan) के जदयू विरुद्ध लड़ना नितीश कुमार (Nitish Kumar ) विरुद्ध भाजपा चक्रव्यूह का हिस्सा है।  भाजपा लिखे स्क्रिप्ट मुताबिक हुआ इसका सीधा अर्थ है कि भाजपा बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने कामयाब हो जाएगा। अब देखने वाली बात ये होगी नितीश कुमार भाजपा चक्रव्यूह को भेद पाएगे या फिर नही।



LJP का वोट शेयर और जानिए चिराग पासवान महत्वाकाक्षा 


जैसा मैंने पहले भी बताया था  कि  चिराग पासवान अलग चुनाव निर्णय लिया है। चिराग पासवान के महत्वाकाक्षा भी है , वो चिराग पासवान मुख्यमंत्री बना चाहते है। वैसे महत्वाकाक्षा रखना कोई गलत बात भी नही है , परंतु चिराग पासवान को बेहतर मालूम है कि LJP अकेले दम पर कभी भी सरकार नही बना सकती है। इसलिए वो ऐसा खतरा क्यों लेंगे जिस उन्होंने नुकसान उठाना पड़े। इसका सीधा अर्थ है कि ये सब चिराग पासवान भाजपा के इशारो पर कर रहे है।


 और जानिए LJP का बिहार राजनीति क्या असर जानिए वोट शेयर से 



28 अक्टूबर 2000 को रामविलास पासवान ने अपनी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) बनाई। लोजपा ने अपना पहला चुनाव फरवरी 2005 में लड़ा। पहले चुनाव में लोजपा ने 178 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 17.3% वोट शेयर के साथ 29 सीटें जीतीं। यही लोजपा का अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन है।

28 अक्टूबर 2000 को रामविलास पासवान ने अपनी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) बनाई। लोजपा ने अपना पहला चुनाव फरवरी 2005 में लड़ा। पहले चुनाव में लोजपा ने 178 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 17.3% वोट शेयर के साथ 29 सीटें जीतीं। यही लोजपा का अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा है , उसके बाद से लोक जनशक्ति पार्टी  कोई खास प्रदर्शन नही कर सका ,  आपको बताते चले कि 2005 में जब विधानसभा चुनाव दुसरी बार हुई लोक जनशक्ति पार्टी  ने 203 सीटो पर चुनाव लड़ा जिसमें 12.6. प्रतिशत वोट शेयर रहा उसके बाद 2010 में 75 सीटो ljp  नेे चुनाव लड़ा जिसमें वो केवल 6.7 प्रतिशत वोट ला सकी उसके बाद 2015 में 42 सीटो पर चुनाव लड़ा जिसमें 4.8 वोट शेयर रहा। वही बात करे लोकसभा चुनाव में 8.2 प्रतिशत वोट शेयर रहा वही 2009 में 6.5 प्रतिशत वोट शेयर रहा ,  2014 में 6.5 प्रतिशत ही रहा और 2019 में 8 प्रतिशत रहा जो बहुत अच्छा कहा जा सकता है क्योंकि LJP ने केवल 6 सीटो पर ही चुनाव लड़ा।



जदयू वोट शेयर जानिए 


जदयू बिहार राजनीति अकेले दम कुछ भी नही है , ऐसा हम इसलिए कह रहे है , नितीश कुमार चेहेरे होने बाजवुद भी ये पार्टी अकेले दम कभी भी सफल नही हो पाई है , अगर जदयू  गठबंधन बिना लड़ती है तो वो  20 से 30 सीटे भी नही जीत पाएगी , इसके लिए हमारे पास तर्क भी है जब 2014 लोकसभा अकेले दम जदयू चुनाव लड़ा तब जदयू महज एक सीट ही मिला था और जनता दल यूनाइटेड (JDU)  तीसरे नंबर पर 16.04 प्रतिशत शेयर यानि 56,62,444 वोटों के साथ है। उसके बाद 2015  में जदयू जब आरजेडी के साथ गठबंधन किया तो उसे सफलता मिली परंतु 2017  में फिर से एनडीए शामिल हो गई ।जिसके बाद 2019 में  बिहार में एनडीए सबसे बड़ी जीत हुई लेकिन जीत के लिए क्रेडिट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी दिया जाता है ।



 भाजपा के वोट शेयर NDA को मिले 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट


2015 में जब भाजपा को बिहार में करारी हार मिली थी तब एक पार्टी के तौर पर बीजेपी को सबसे ज्यादा 24.8 फीसदी वोट मिले थे , वही बात करे  इन चुनावों में एनडीए को कुल मिलाकर 53.3 प्रतिशत वोट मिले। भारतीय जनता पार्टी के हिस्से कुल 23.6 प्रतिशत वोट आए और उसे कुल 96,22,724 लोगों ने वोट दिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली जनता दल (JDU) के हाथ दूसरा बड़ा हिस्सा आया और उसे कुल 21.8 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला। संख्या के हिसाब से देखें तो उसे 89,02,719 लोगों का समर्थन मिला। वहीं, रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी 7.9 प्रतिशत वोटों या 32,06,979 लोगों के समर्थन से वोट शेयर के मामले में RJD से पीछे चौथे स्थान पर रही। 





ऐसे बिहार राजनीति रूप से सबसे जागरूक प्रदेश। इसलिए कहा जाता है कि यहाँ की जनता बखूबी समझती है राजनीति दलो को।।

 

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