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patliputra ka 2020 mein king kon Episode 3: Bihar की किसानो की दयनीय स्थिती जिम्मेदार कौन? और जानिए बिहार में कृषि के पिछङेपन की वजह क्या है ...

 

नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है पाटलिपुत्र का 2020 में किंग कौन (patliputra ka 2020 mein king kon) बिहार चुनाव हमारा स्पेशल सीरीज है , इस सीरीज जरिए बिहार के सभी समस्या बताएगे और उसके सामधान भी बताए गे। जैसा कि मेरा पुराना आदत है केवल समस्या ही नही बल्कि सामधान भी बताते है।

patliputra ka 2020 mein king kon


आज का हमारा विषय है बिहार में किसानो स्थिती बेहाल क्यों है?


देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री कहते थे कि 

जय जवान जय किसान लेकिन शास्त्री जी के जाने इस देश राजनिति में बस नारा तौर पर ही जय जवान जय किसान इस्तेमाल किया है। वैसे आज हम बात कर रहे है बिहार के किसानो  स्थिती पर,  आखिर आजादी इतने वर्षो के बाद भी बिहार के किसान स्थिती दयनीय है। 

बिहार में किसानो की स्थिती 


बिहार( Bihar) के किसान स्थिती बहुत ही दयनीय है। इसकी मुख्य वजह बिहार में यहां अधिकतर छोटे किसान हैं, जिनके पास टुकड़ों में जमीन है। बड़े स्तर पर किसान लोन की बोझ से दबे हुए हैं। आज भी प्रदेश की खेती सिंचाई के लिए वर्षा के जल पर निर्भर हैं।पारंपरिक खेती ही यहां प्रचलन में है। मशीनों का उपयोग न के बराबर होता है।


बिहार किसानो की दयनीय स्थिती पिछे की वजह 


बिहार किसानो की दयनीय स्थिती के लिए  बाढ एक प्रमुख वजह है। लगभग 28 जिला इसकी चपेट में हैं। उत्तरी बिहार की नदियां हिमालय से निकलती हैं जो अपार जलराशि वहन करती हैं। कोसी और गंडक इसके लिए  जिम्मेदार हैं। इन नदियों के प्रवाह मार्ग में काफी सिल्ट जमा हो चुका है और तल उथला होने के कारण जल बाहर निकल कर पसर जाता है। कोसी तो मार्ग बदलने के लिए पुरे विश्व में बदनाम है। दक्षिण की नदियों भी गंगा से मिलकर भयंकर रूप बाढ़ लाती है। बिहार भारत का सबसे अधिक बाढ़ग्रस्त राज्यों में है और यहां बाढ़ पीड़ितों का घनत्व सबसे अधिक है। भारत का 16.5 प्रतिशत बाढ़ प्रभावित क्षेत्र बिहार में पड़ता है। जबकि इतने ही क्षेत्र पर देश की 22.1 प्रतिशत बाढ़ प्रभावित जनता रहती है। राज्य में बाढ़ से प्रभावित होने वाला क्षेत्र आजादी के बाद लगातार बढ़ता रहा है। बिहार में बाढ़ भी एक बड़ी समस्या है जिसके बारे हम विस्तार बात करेंगे इसी सीरीज में और बाढ़ की समस्या का सामधान बताए गे। बिहार सिमांचल व कटिहार के क्षेत्र मे तो प्रत्येक वर्षा बाढ़ आती है।



कृषि के पिछङेपन मिट्टी कटाव भी 


  मिट्टी कटाव और मिट्टी जनित कई समस्याएं भी कृषि के पिछङेपन के कारण बनती हैं। तेज बारिश की धार तथा बाढ से मिट्टी का कटाव होता है। रासायनिक खादों और कीटनाशकों तथा जल जमाव से मिट्टी की उर्वरता घटी है। तीसरा वजह  रासायनिक खादों का बिहार में प्रयोग बिना स्वायल टेस्ट का किया जाता रहा है । इससे गैर जरूरी खाद भी खेतों में चला जाता है। उत्पाद कम आता है। इसके अलावा पंजाब के 160 किलो प्रति हेक्टेयर खाद खपत"' की तुलना में बिहार में खाद की खपत महज 22 किलो तक सिमटा हुआ है। इससे उत्पादकता बुरी तरह प्रभावित हुई है। 




राजनीतिक और सामाजिक वजह भी बिहार किसानो की दयनीय स्थिती जिम्मेदार 


बिहार में राजनीतिक और सामाजिक कारणों से भूमि सुधार सफल नहीं हुआ । बङे किसान अधिक खेतों को केवल इज़्ज़तका विषय बना कर रखे हुए है, और एक बहुत बङी आबादी लघु व सीमांत किसानों की बन गई है (लगभग 86%)। जनसंख्या बढते जाने से छोटे छोटे खेत और भी विभाजित होते गये । अब बिहार की किसानो की दयनीय स्थिती के लिए  सामाजिक ढांचा/ रूढिवादिता अधिकतर किसानों के लिए खेती केवल पेट पाल लेने लायक उत्पादन करने का जरिया भर है। भाग्यवादी हैं । कृषि की नवीन तरीकों को लेकर उनमें कोई उत्साह नहीं दिखता। सब्जी है। लाभदायक खेती को सवर्ण बिरादरी के किसान इसे कोइरी जाति के लोगों का पेशा मानकर स्वयं सब्जी उपजाने की खेती नही करना चाहते है। यानी बिहार राजनीतिक और सामाजिक वजह भी बिहार किसानो की दयनीय स्थिती की जिम्मेदार है। खैर हम आगे बढ़ते है अब हम बताते है कि बिहार में सिंचाई कमी की वजह।

बिहार में सिंचाई कमी वजह 

सिंचाई कमी की सबसे बड़ी वजह है। लगभग सारी खेती भगवान के भरोसे होती है , कुल बोई गई भूमि में से 46% हिस्से सिंचाई सुविधा से लैस हैं। नहरी इलाकों में भी पानी ठीक से नहीं पहुंच पाता। बिहार का दक्षिणी-पश्चिमी इलाका सूखा की चपेट में रहता है। 



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