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Janmashtami 2020: भगवान श्री कृष्ण जानिए कैसे जीवन में हो सकते हैं सफल और सफलता के सूत्र

 


नमस्कार दोस्तों श्री कृष्ण भागवान विष्णू के अवतार थे, किन्तु उन्हे भी अपने जीवन में कष्ट झेले है। आज हम आपको भागवान श्री कृष्ण के ऐसे सुत्र के बारे बताईए गे कि जिस से आप अपने जीवन सफलता प्राप्त करेंगे। जैसा कि मित्रो जानते हैं कि महाभारत के युद्ध में भगवान कृष्ण का अहम योगदान था। उन्होंने ही अर्जुन को धर्म और अधर्म के बारे में ज्ञान दिया था। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को समस्त गीता का ज्ञान दिया था। गीता में जीवन का समस्त ज्ञान समाया हुआ है। और इसमें जीवन के सार का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है। गीता और भगवान कृष्ण के सम्पूर्ण जीवन से कई बातों को सीखा जा सकता है और उसको अपने जीवन में अनुसरण कर सफलता प्राप्त की जा सकती है।  

shri krishna


आईए हम विस्तृत रूप से जानते हैं जीवन में सफलता प्राप्त करने सुत्र के बारे में।



(1) लक्ष्य को कैसे प्राप्त करे ?


 भगवान श्रीकृष्‍ण कहते हैं कि यदि आप लक्ष्य को प्राप्त करने में विफल रहते हैं, तो अपनी रणनीति बदलें लक्ष्य नहीं। इस जीवन में न कुछ खोता है, न व्यर्थ होता है। जो इस लोक में अपने काम की सफलता की कामना रखते हैं, वे देवताओं की प्रार्थना करें।


(2) भागवान श्री कृष्ण साधारण जीवन जीने में विश्वास रखते है 


भगवान कृष्ण सदा ही साधारण आम लोगों की तरह जीवन जीने में विश्वास करते थे। गोकुल के राजघराने में परवरिश होने के बावजूद वह अन्य सामान्य बालकों के साथ रहते, खेलते और घूमते रहते थे। उन्हें कभी भी अपने राजघराने का घमंड नहीं था। यह सीख मिलती है कि व्यक्ति चाहे जितना ऊपर बढ़ जाए उसको साधारण जीवन ही जीना चाहिए।



(3) उसने मत डरो जो वास्तविक नही 


उससे मत डरो जो वास्तविक नहीं है, न कभी था न कभी होगा। जो वास्तविक है, वो सदा था और उसे कभी नष्ट नहीं किया जा सकता। अर्थात भागवान श्री कृष्ण कहते है कि निर्भीक बनो।


(4) माता-पिता का सदा आदर करना


श्रीकृष्ण को जन्म देवकी ने दिया था परंतु उनका पालन-पोषण यशोदा और नंद ने गोकुल में किया। यह जानते हुए कि उनके अपने माता-पिता उनसे दूर हैं। श्रीकृष्ण ने उन्हें दिल से प्रेम किया। उनका आदर और सम्मान करने में कोई कसर ना छोड़ी।



(5.) कभी हार नहीं मानना


भगवान कृष्ण कभी भी बुरा समय आने पर घबराते नहीं थे। वह कठिन परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करते थे। उनका मानना था कि बुरा समय में विवेक पूर्वक काम करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने कभी भी हार नहीं मानने का संदेश दिया था। अंत तक प्रयास करते रहिए जब तक परिणाम आपके पक्ष में न हो सके।




(6.) दोस्ती निभाना 

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भगवान कृष्ण और सुदामा की दोस्ती की मिसाल हर कोई देता है। यह दोस्ती महज दोनों के प्रेम के वजह से नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति आदर के वजह से भी प्रसिद्ध है। श्रीकृष्ण ने हमेशा अपने मित्र सुदामा और अर्जुन का साथ दिया था।

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