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us riots: जानिए inside story अमेरिका दंगा पर , और जाने अमेरिका में नस्लभेद का पुरा इतिहास...


नमस्कार दोस्तों इन दिनो अमेरिका (US ) दंगा हो रहा है, आज हम इस दंगे के बारे में विस्तार से पुरी inside story बताए गे साथ में ये भी कि अमेरिका(US ) में कितने वर्षो से श्वेत और अश्वेत  भीषण संघर्ष जारी है। इसके पिछे की पुरी inside story आपको बताएगे।


सबसे पहले जानते अमेरिका में दंगा क्यों शुरू हुआ इसके वजह क्या है उसके उपरांत हमारा विषय  अमेरिका नस्लभेद के इतिहास पर भी चर्चा करेंगे चलिए दोस्तों जानते हैं कि क्यों हो रहा है अमेरिका में दंगा

दरअसल अमेरिका (US ) में मिनेपॉलिस में अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड  (George Floyd Death)
की निर्मम हत्या के बाद वहां पुलिस और सरकार विरोधी आंदोलन तेज होते जा रहे हैं।

कैसे हुआ जॉर्ज फ्लॉयड हत्या 


चौवेन के विरुद्ध दर्ज केस में साफ बताया गया है कि उन्होंने 8 मिनट 46 सेकंड तक जॉर्ज की गर्दन अपने घुटने से दबाए रखी। अचंभे के बात है कि चौवेन ने फ्लॉयड की सांस रुकने तक घुटना नहीं हटाया। वो तब हटे जब मेडिकल टीम वहां पहुंच गई।घटना में तीन और अफसर शामिल थे। इनके नाम हैं- थॉमस लेन, जे. एलेक्जेंडर और टोउ थाओ। इनके विरुद्ध भी जांच जारी है।


पुलिस के हाथों मरने से पहले जॉर्ज फ्लॉयड अंतिम शब्द 


पुलिस के हाथों मरने से पहले जॉर्ज फ्लॉयड के आखिरी शब्द थे आई कान्ट ब्रीद, मरने से पहले के आखिरी पांच मिनटों में जॉर्ज ने 6 बार इसी लाइन को दोहराया था। आई कान्ट ब्रीद यानी मैं सांस नहीं ले पा रहा। मगर वहां मौजूद किसी भी पुलिस अधिकारी को उस पर रहम नहीं आया और अब जार्ज के वही आखिरी शब्द आई कान्ट ब्रीद  अमेरिकी आंदोलन का नारा बन गए हैं।


राष्ट्रपति ट्रंप के विवाविद बयान



राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने खुद को लॉ एंड ऑर्डर प्रेसिडेंट करार दिया और कहा कि अगर हिंसा जारी रही तो सेना की तैनाती होगी। अगले ही दिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियां चलाईं। इससे पहले ट्रम्प प्रदर्शनकारियों को गोली मारने और उन पर भयानक कुत्ते छोड़ने की चेतावनी दे चुके थे। एक अन्य ट्वीट में ट्रम्प ने कहा बड़ी कार्रवाई की जाएगी।आपको बता दें कि ट्रम्प के इन बयानों से दुखी ह्यूस्टन पुलिस चीफ ने कहा कि अगर कुछ अच्छा बोलने के लिए नहीं है तो प्लीज अपना मुंह बंद रखिए।


दोस्तों आईए जानते हैं अमेरिका नस्लभेद इतिहास

अमेरिका (US) में नस्लभेद का इतिहास बहुत पुराना है। वर्ष 1619 में जब पहली बार अमेरिका में अफ्रीकी मूल के लोगों को गुलाम बनाकर लाया गया था, तब से इसकी कड़ी जुड़ती है। इस घटना को हुए 400 साल हो गए, पर यह जिन्न आज भी सभ्य अमेरिका में जिंदा है।

अमेरिका में अश्वेतों के आगमन का इतिहास 

अमेरिका बरसों तक उपनिवेशवाद के रूप में रहा है और इसी उपनिवेशवाद के प्रथम चरण के दौरान 1619 में कुछ अश्वेत लोगों को लाकर जेन्सटाउन में बसाया गया था। आरंभ में तो ये लोग वेस्टइंडीज से लाए गए में 1674 में रॉयल अफ्रीकन कंपनी ने अश्वेत लोगों को अफ्रीका से जहाजों में भर-भरकर लाना शुरू कर दिया। शुरू में सारे अश्वेत मजदूर, दास बनाकर लाए गए, किंतु जैसे हि आर्थिक कारणों से मजदूरों की मांग बढ़ती गई, अश्वेतों की स्थिति बदहाल होती गई। सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में वर्जीनिया में एक दास नियमावली बन चुकी थी जिसके चलते दासों को उस व्यक्तिगत संपत्ति की तरह माना जाने लगा जिसे बाजार में खरीदा और बेचा जा सकता है। अश्वेत लोगों की इस दयनीय परिस्थिती के दुष्परिणाम तो आने ही थे। इसी कारण से अश्वेत और श्वेत अमेरिकियों में विभाजन की रेखा अस्तित्व में आई जिसने अमेरिका में नस्लवादी और रंगभेदी इतिहास को उत्पत्ति दिया। इसका कच्चा चिट्ठा आज भी अमेरिका की सड़कों पर एक दस्तावेज के रूप में उभरा हुआ है। हैरानी यह भी है कि सैकड़ों साल बीतने के उपरांत भी अमेरिकी स्वतंत्रता के घोषणापत्र में गुलामों के व्यापार के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया। उसमें स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांत पर जो अधिकार दिया गया था वह अश्वेत केलिए नहीं था।


डॉ॰ मार्टिन लूथर किंग नस्लभेद विरुद्ध की संघर्ष 


डा.मार्टिन लूथर किंग जूनियर (Martin Luther King Jr.)  के बारे वैसे आप पढ़ा ही उसे नही पढ़ा है तो बता दे वो अमेरिका गांधी नाम जाने जाने जाते है उन्होंने अमेरिका अश्वेत अमेरिकी अधिकार के लिए संधर्ष किया है।

अमेरिका डा.मार्टिन लूथर किंग जूनियर आदोलन के उपरांत अश्वेत और श्वेत के अलग-अलग सीटे के व्यवस्था खत्म हुई

डा.मार्टिन लूथर किंग जूनियर (Martin Luther King Jr.)पुरे  381 दिनों के सत्याग्रह आन्दोलन के उपरांत अमेरिकी बसों में  अश्वेत और श्वेत यात्रियों के लिए अलग अलग सीटे रखने का प्रावधान खत्म कर दिया।मित्रो आज कि परिस्थिती देखने के उपरांत यह कहा जा सकता है कि कई दशक पहले  अश्वेत नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर का बलिदान व्यर्थ गया।

 बराक ओबामा राष्ट्रपति उम्मीदे बढ़ी थी अश्वेतों की

विडंबना कहिए अश्वेतों का जब उन्होंने बराक ओबामा  राष्ट्रपति बने के उपरांत भी अश्वेतों का स्थिती अमेरिका नही बदली , पुरी लगा कि एक अश्वेत राष्ट्रपति बना नस्लभेद समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा किंतु ऐसा कुछ भी नही हुआ आपको बता दे कि बराक ओबामा प्रथम बार राष्ट्रपति बने थे, तो 53 प्रतिशत अश्वेतों ने कहा था कि अब देश में अश्वेतों की सामाजिक और आर्थिक हालत पहले से अच्छी हो जाएगी। लेकिन आज 40 प्रतिशत अश्वेत लोग कह रहे हैं कि ओबामा के आने के उपरांत अश्वेत समुदाय के लोग और भी अधिक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इस बीच अमेरिकी अश्वेत समुदाय पर श्वेत समुदाय के मुकाबले आर्थिक मंदी की काफी ज्यादा मार पड़ी है। साल 2008 से 2012 तक अमेरिका के अश्वेतों के धन में 31 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि इस दौरान श्वेतों के धन में 11 प्रतिशत की कमी हुई। सबसे चिंताजनक बात यह हुई कि श्वेत लोगों में छह प्रतिशत बेरोजगारी बढ़ी है, जबकि अश्वेत लोगों में बेरोजगारी की दर 14 प्रतिशत हो गई।


भारत में बुद्धिजीवी छोटे ही घटना को मानव अधिकार असहिष्णुता (Intolerance) शांत हो चुके इनके नजर अमेरिका हो रहे मानव अधिकार हनन पर ये लोग कोई टिप्पणी नही करते किंतु भारत में आग भड़काने के लिए दलितो मुसलमान को जरूर भड़का रहे है , लेकिन दंगई बुद्धिजीवी षडयंत्र देश लोगो ने
बहुत अच्छी पहचान लिया है। अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि कम्युनिस्ट विचारधारा वाले लोग ही अमेरिका दंगा फैला रहे है।

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