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Story of Emergency in India Part3: जानिए जब इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी ऐलान उसके बाद क्या-क्या हुआ??

 नमस्कार दोस्तों हम ने पिछले पार्ट 2 जाना था कि इमरजेंसी लगाने में इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) की गलती या सिद्धार्थ शंकर रे की जैसा पिछले भाग अबतक नही पढ़ा है तो आप निचे दिए Link पर जाकर पढ़ सकते है।
Story of Emergency in India part 1


Story of Emergency in India part2


Story of Emergency in India


आज हम हमारे इमरजेंसी पर इंटरनेट इतिहास की सबसे बड़ी  सीरीज स्टोरी ऑफ इमरजेंसी इन इंडिया (Story of Emergency in India)  part 3 में बात करेंगे कि इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) कब कैसे आपातकाल (Emergency)ऐलान इसके उपरांत देश में क्या हुआ। और संजय गांधी और सिद्धार्थ शंकर रॉय कैसे पुरे विपक्ष जेल डालने का प्लान बनाया।


सबसे पहले हम जानते हैं कि संजय गांधी सिद्धार्थ शंकर रॉय अलावा और कौन थे जो इमरजेंसी दौरान विपक्ष के नेताओ  को गिरफ्तार करने की प्लान तैयार करे रहे थे। आईए जानते हैं सबसे पहले इसे विस्तार से

25 और 26 जुन के रात्रि रचा जा रहा विपक्ष की नेताओ जेल डालने की षडयंत्र
Story of Emergency in India

इंदिरा गांधी के विशेष सहायक आर के धवन के कमरे में बैठकर संजय गांधी और ओम मेहता उन लोगों की लिस्ट बना रहे थे जिन्हें गिरफ्तार किया जाना था। नामों पर बार-बार इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) से सलाह-मश्विरा किया जा रहा था। आखिरकार 26 जून की सुबह को जब इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) सोने के लिए अपने कमरे में गईं तब तक जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई समेत तमाम बड़े नेता गिरफ्तार किए जा चुके थे।आपातकाल की घोषणा के पहले ही सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी के आदेश दे दिए गए थे।बंदियोंं में लगभग सभी प्रमुख सांसद थे।उनकी गिरफ्तारी का उद्देश्य संसद को ऐसा बना देना था कि इंदिरा गांधी जो चाहें करा लें।उन दिनों कांग्रेस को अपनी पार्टी में भी विरोध का डर पैदा हो गया था। इसीलिए जब जयप्रकाश नारायण सहित दूसरे विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया तो कांग्रेस कार्यकारिणी के सदस्य चंद्रशेखर और संसदीय दल के सचिव रामधन को भी गिरफ्तार कर लिया गया।आधी रात को घर से उठाकर थाने पहुंचाए गए लोगों को कुछ मालूम नहीं था कि हो क्या रहा? ना जाने कितने ही उदाहरण हैं जब किसी को पकड़कर पहले थाने में बंद किया गया और उसके बाद गिरफ्तारी का आदेश बनाया गया। ये होना स्वाभाविक था क्योंकि गिरफ्तारियां जितनी तेज़ चल रही थीं कागज़ों पर दौड़ रही कलम उसकी बराबरी कर नहीं पा रही थी।वास्तविकता ये थी जो भी हस्तिनापुर बैठे सत्ताधीस विरोध में था उसकी अभिव्यक्ति स्वतंत्रता छिड़नी जा रही है उसे विपक्ष की आवाज को कुचला जा रहा और संपुर्ण देश ही जेल बना दिया गया था।उस समय दिल्ली सिंहासन बैठी सरकार अपने विरोधी जेल में डाले जा रहे है।

  जब घोषणा की इंदिरा गांधी ने आपातकाल की 
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 उसके उपरांत वो समय आया जब इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने आकाशवाणी माध्यम से आपातकाल की घोषणा की उस समय इंदिरा गांधी ने राष्ट्र नाम संदेश कहा कि जब से मैंने आम आदमी और देश की महिलाओं के फायदे के लिए कुछ प्रगतिशील कदम उठाए हैं। तभी से मेरे खिलाफ गहरी षडयंत्र रची जा रही थी। इसके अलावा इंदिरा गांधी ने आपातकाल की जिम्मेदार जयप्रकाश नारायण ठहराया था। इंदिरा गांधी ने कहा कि जिस तरह का माहौल (सेना, पुलिस और अधिकारियों के भड़काना) देश में एक व्यक्ति अर्थात जयप्रकाश नारायण के द्वारा बनाया गया है उसमें यह जरूरी हो गया है कि देश में आपातकाल लगाया (National Emergency in India) जाये ताकि देश की एकता और अखंडता की रक्षा की जा सके।

इमरजेंसी दौरान कैसे जनता के आवाज कुचलने की प्रयास की

आपातकाल के दौरान सत्ताधारी कांग्रेस जनता की आवाज को कुचलने की निरंकुश प्रयास की। इसका आधार वो प्रावधान था जो धारा-352 के तहत सरकार को असीमित अधिकार देती थी।

आईए जानते कुछ महत्वपूर्ण बिंदु को

(१) इंदिरा जब तक चाहें सत्ता में रह सकती थीं।

(२)लोकसभा विधानसभा के लिए चुनाव की जरूरत नहीं थी।

(३)मीडिया और अखबार आजाद नहीं थे

(४)सरकार कैसा भी कानून पास करा सकती थी।


 आपातकाल (Emergency) में मिडिया पांबदी पर कांग्रेस पार्टी के ही कई लोग मतभेद रखते थे। कुछ दावे किए कि मीडिया पर पाबंदी को लेकर पार्टी में बड़ा विरोध था। खुद आपातकाल की एबीसी बताने वाले सिद्धार्थ शंकर रॉय भी इसके विरुद्ध थे। किंतु तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) संजय गांधी के हाथों की कठपुतली बन चुकी थीं। सिद्धार्थ शंकर रॉय के मीडिया और अदालत पर पाबंदी का विरोध किए जाने पर इंदिरा गांधी (Indira Gandhi)ने उन्हें कहा कि ऐसा कुछ नहीं होगा लेकिन 26 जून को सबकुछ उलट हुआ। सुबह ही गिरफ्तारियां शुरू कर दी गईं। उनदिनों जय प्रकाश नारायण दिल्ली के रामलीला मैदान में युवाओं के साथ मौजूद थे। सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन जोरों पर था। मोरारजी देसाई भी गिरफ्तार कर लिए गए। मीडिया पर पाबंदी लगा दी गई। बिजली के कनेक्शन काट दिए गए। बहादुर शाह जफर मार्ग पर मौजूद एक भी अखबार के दफ्तर में अखबार की मशीने नहीं चलीं, नहीं छप सके समाचार पत्र। सिर्फ हिंदुस्तान टाइम्स छप सका क्योंकि उसका ऑफिस बहादुर शाह मार्ग पर नहीं था। रेडियो पर प्रसारित होने वाले बुलेटिन्स को प्रसारण से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय से अप्रूव कराने के आदेश जारी किए गए।
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 इसके अलावा मीसा-डीआईआर का कहर
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मीसा और डीआईआर के अंतर्गत देश में एक लाख से अधिक लोगों को जेलों में डाल दिया गया। आपातकाल के विरुद्ध आंदोलन के नायक जय प्रकाश नारायण की किडनी कैद के दौरान खराब हो गई थी । उस काले दौर में जेल-यातनाओं की दहला देने वाली कहानियां भरी पड़ी हैं। देश के जितने भी बड़े नेता थे, सभी के सभी सलाखों के पीछे डाल दिए गए। एक तरह से जेल को राजनीतिक पाठशाला बन गईं। बड़े नेताओं के साथ जेल में युवा नेताओं को बहुत कुछ सीखने-समझने का मौका मिला। एक तरफ नेताओं की नई पौध राजनीति सीख रही थी। दूसरी तरफ देश को इंदिरा गांधी  (Indira Gandhi) के बेटे संजय गांधी अपने दोस्त बंसीलाल, विद्याचरण शुक्ल और ओम मेहता की तिकड़ी के जरिए चला रहे थे। संजय गांधी ने वीसी शुक्ला को नया सूचना प्रसारण मंत्री बनवाया जिन्होंने मीडिया पर सरकार की इजाजत के बिना कुछ भी लिखने-बोलने पर पाबंदी लगा दी थी , जिसने मना  किया उसे जेलों में डाल दिया गया।।


क्यों लालू ने आपातकाल दौरान जन्मे अपनी बेटी नाम मिसा क्यों रखा ?

आपको बता दे कि बिहार के पुर्व मुख्यमंत्री और देश के पुर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव मिसा कानून अंतर्गत ही जेल गए थे , उनके जेल रहते उनके घर में  पुत्री का जन्म हुआ और उन्होंने अपनी पुत्री नाम मिसा भारती रखा दिया था।




आपातकाल की दौरान इंदिरा क्या क्या किया ?
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इंदिरा गांधी  (Indira Gandhi) को सबसे पहले राजनारायण के मुकदमे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय और सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्णय का निबटारा करना था। इसलिए इन फैसलों को पलटने वाला कानून लाया गया। साथ ही इसका अमल पूर्व काल से लागू कर दिया। संविधान को संशोधित करके कोशिश की गई कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष पर जीवन भर किसी अपराध को लेकर कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इस संशोधन को राज्यसभा ने पारित भी कर दिया , किंतु इसे लोकसभा में पेश नहीं किया गया। सबसे कठोर संविधान का 42वां संशोधन था।इसके जरिए संविधान के मूल ढांचे को कमजोर करने, उसकी संघीय विशेषताओं को नुकसान पहुंचाने और सरकार के तीनों अंगों के संतुलन को बिगाड़ने का प्रयास किया गया। मित्रो हम 42वां संशोधन के विषय पर भी बहुत जल्द ही आपके लिए लेख लेकर आएगे।

इमरजेंसी के समय श्रीमती इंदिरा गांधी  (Indira Gandhi) ने संविधान को तोड़ने-मरोड़ने का बहुत प्रयास किया और इसमें उन्हें तात्कालिक सफलता भी मिली। आपातकाल के पहले हफ्ते में ही संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 22 को निलंबित कर दिया गया। ऐसा करके सरकार ने कानून की दृष्टि में सबकी बराबरी जीवन और संपत्ति की सुरक्षा की गारंटी और गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर अदालत के सामने पेश करने के अधिकारों को रोक दिया गया। जनवरी 1976 में अनुच्छेद 19 को भी निलंबित कर दिया गया। इससे अभिव्यक्ति, प्रकाशन करने, संघ बनाने और सभा करने की आजादी को छीन लिया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) तो पहले से ही लागू था, इसमें भी कई बार बदलाव किए गए।


संजय गांधी ने बनाया था पांच सूत्रीय योजना
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 एक तरफ देशभर में सरकार के विरुद्ध बोलने वालों पर जुल्म हो रहा था तो दूसरी तरफ संजय गांधी ने देश को आगे बढ़ाने के नाम पर पांच सूत्रीय एजेंडे परिवार नियोजन, दहेज प्रथा का खात्मा, वयस्क शिक्षा, पेड़ लगाना, जाति प्रथा उन्मूलन पर काम करना शुरू कर दिया था। बताया जाता है कि सुंदरीकरण के नाम पर संजय गांधी ने एक ही दिन में दिल्ली के तुर्कमान गेट की झुग्गियोंले साफ करवा डाला परंतु पांच सूत्रीय कार्यक्रम में ज्यादा जोर परिवार नियोजन पर था। लोगों की जबरदस्ती नसबंदी कराई गई। 19 महीने के दौरान देश भर में करीब 83 लाख लोगों की जबरदस्ती नसबंदी करा दी गई। कहा तो ये भी जाता है कि पुलिस बल गांव के गांव घेर लेते थे और पुरुषों को पकड़कर उनकी नसबंदी करा दी जाती थी।

संजय गांधी की इमरजेंसी भुमिका पर विषय पर हम बहुत जल्द ही एक लेख लाए गे जिसमें हम जानने का प्रयास करेंगे और इमरजेंसी के जिम्मेदार संजय गांधी थे या फिर नही?


दोस्तों ऐसा कहा जाता है कि इमरजेंसी दौरान साधारण कार्यकर्ताओं की बात जाने दीजिए बड़े नेताओं की गिरफ्तारी की सूचना भी उनके रिश्तेदारों, मित्रों और सहयोगियों को नहीं दी गई।उन्हें कहां रखा गया है इसकी भी कोई खबर नहीं दी गई। दो महीने तक मिलने-जुलने की कोई सूरत न थी। बंदियों को तंग करने, उनको अकेले में रखने, इलाज न कराने और शाम छह बजे से ही उन्हें कोठरी में बंद कर देने के सैकड़ों उदाहरण हैं। आपातकाल के पहले हफ्ते में ही करीब 15 हजार लोगों को बंदी बनाया गया।उनकी डाक सेंसर होती थी और जब मुलाकात की अनुमति भी मिली तो उस दौरान खुफिया अधिकारी वहां तैनात रहते थे। कहना न होगा कि ऐसे स्थिती में जेल के अफसरों का व्यवहार कैसा रहा होगा, वास्तव में ये अफसर स्वयं डरे हुए थे।


हम अपने सीरीज स्टोरी ऑफ इमरजेंसी इन इंडिया (Story of Emergency in India) सीरीज के अगले पार्ट में बताएगे कि Story of Emergency in India part 4: इंदिरा गांधी ने आपातकाल हटाने निर्णय क्यों लिया , और संजय गांधी 35 साल तक क्यों रखना चाहते थे इमरजेंसी

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