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LaluPrasadYadav Biography : लालू प्रसाद यादव के जीवनी और जानिए उनके जीवन के महत्वपूर्ण घटनाक्रम

नमस्कार दोस्तों आज लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) 73 वे जन्मदिन है वैसे इतिहास सदा उनके अच्छे एवं बुरे काम कि लिए याद रखेगा किंतु लालू यादव बिहार राजनितिज्ञ है जिन्हे गरीब मशिहा माना जाता है यही दलित-पिछड़े ये मानते है कि लालू प्रसाद यादव उनके मशिहा है किंतु पिछले 15 वर्षा से लालू प्रसाद यादव सत्ता दुर है वही 2015 में महागठबंधन बना कर लालू प्रसाद यादव सत्ता वापसी की उनके ही गठबंधन के साथी नितीश कुमार ने विश्वासघाट करके भाजपा (BJP) के साथ मिल गए उस चुनाव में नितीश कुमार के JDU से ज्यादा सीटे लालू प्रसाद यादव के पार्टी RJD को मिली थी फिर भी लालू प्रसाद यादव अपने चुनाव दौरान किए गए वादे मुताबिक हि Nitish Kumar को बिहार के मुख्यमंत्री बनाया था। अब आईए जानते हैं  लालू प्रसाद यादव (LaluPrasadYadav) के जिंदगी की कुछ रोचक बाते और जीवनी (Biography) इस लेख में।
LaluPrasadYadav Biography

सबसे पहले जानते हैं लालू प्रसाद यादव (LaluPrasadYadav) के जीवनी चलिए मित्रो आरंभ करते है।



जीवनी (Biography)



पूरा नाम: लालू प्रसाद यादव



जन्म की तारीख: 1 जून 1948 (आयु 72)



जन्म स्थान: फुलवरिया, जिला। गोपालगंज



पार्टी का नाम: राष्ट्रीय जनता दल



शिक्षा: LLB, पोस्ट ग्रेजुएट (राजनीति शास्त्र ),पटना यूनिवर्सिटी




प्रोफेशनल व्यवसाय: सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता और राजनीतिज्ञ



पिता का नाम: श्री कुंदन राय



माता का नाम: मरछिया देवी



पत्नी का नाम: राबड़ी देवी


बिहार के गोपालगंज में में फुलवरिया गाँव में एक किसान परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता का नाम मराछिया देवी और कुंदन राय था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गोपालगंज से प्राप्‍त की और आगे की पढ़ाई के लिए पटना चले गए। पटना के बीएन कॉलेज से उन्होंने लॉ में स्‍नातक तथा राजनीति शास्‍त्र में स्‍नातकोत्‍तर की पढ़ाई पूरी की। वे कॉलेज के समय से ही छात्र राजनीति में काफी सक्रीय थे। यहीं से उन्होंने राजनीति की मुख्यधारा में प्रवेश किया था।

विवाह कब हुआ 
LaluPrasadYadav Biography


1 जून 1973 को उनका विवाह राबड़ी देवी  (Rabri Devi's) से हो गया। उस समय लालू यादव बहुत ही गरीब थे और उन्हें दहेज में एक जर्सी गाय मिली थी। गरीबी के दिनों में गाय पालन लालू प्रसाद यादव (LaluPrasadYadav) के परिवार के लिए बड़ा सहारा था। राबड़ी देवी  (Rabri Devi's) गाय के दूध के पैसे से परिवार चलाती थी। राजनीति के शुरुआती दिनों में जब लालू पटना से गोपालगंज वाले घर जाते थे तब राबड़ी उनके लिए सत्तू का परांठा बनाकर रखती थीं।

लालू की सालियों के नाम 

लालू यादव की पत्नी का नाम राबड़ी देवी  (Rabri Devi's)
है, यह तो आप जानते ही हैं। किंतु आज हम आपको राबड़ी देवी (Rabri Devi's) की बहनों के नाम बताने जा रहे हैं जो भी मिठाइयों नाम पर रखे गए हैं।लालू की सालियों के नाम इस प्रकार है- रसगुल्ला, पान और जलेबी।


आपको बता दे कि लालू यादव का राजनैतिक जीवन उतार चढ़ाव वाला ही रहा है। कभी उन्हें जेल जाना पड़ा तो कभी उन्होंने पराजय के उपरांत विजय प्राप्ति करके वापसी की।


राजनितिक जीवन (Political biography)

लालू प्रसाद यादव (LaluPrasadYadav) ने छात्र राजनीति में बहुत सक्रिय थे और सन 1970 में पटना विश्व विद्यालय (Patna university, patna bihar) के छात्र संघ के महासचिव चुने गए। वे जय प्रकाश नारायण, राज नरेन, कर्पूरी ठाकुर और सत्येन्द्र नारायण सिन्हा जैसे नेताओं से बहुत प्रभावित थे। सत्येन्द्र नारायण सिन्हा, जो बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री और बिहार स्टेट जनता पार्टी के अध्यक्ष थे, के सहयोग से लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) ने लोकसभा (loksabha) चुनाव लड़ा। लालू प्रसाद (Lalu Prasad Yadav) ने चुनाव जीता और भारतीय संसद में सबसे युवा सदस्य में से एक बन गए। सिर्फ दस वर्षो के अंदर लालू प्रसाद यादव बिहार (Bihar) की राजनीति में एक शक्तिशाली शख्सियत बन गए और भूतपूर्व मुख्यमंत्री राम सुन्दर दास को हराकर वे बिहार के मुख्य मंत्री चुने गए। जनता दल से असामंजस्य होने के कारण 1997 में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD)नाम से एक अलग राजनैतिक दल का गठन किया। सात साल तक वे बिहार के मुख्यमंत्री रहे और ‘चारा घोटाले’ में गिरफ्तारी निश्चित हो जाने के उपरांत लालू ने मुख्यमन्त्री पद से इस्तीफा दे दिया और अपनी पत्नी राबड़ी देवी (Rabri Devi's) को बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया।

रेल मंत्री के तौर पर

भारत सबसे सफल रेलमंत्री तौड़ पर लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) जाने जाते है जब लालू रेल मंत्री थे तब भारतीय रेल घाटे से निकल कर मुनाफे की और वापस लौट आई। रेलवे की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के वजह कई मैनेजमेंट स्कूलों ने लालू प्रसाद के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए उन्हें हार्वर्ड, व्हार्टन और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के सैकड़ों विद्यार्थियों को सम्बोधत करने के लिए आमंत्रित किया। रेलवे के इस उपलब्धि का अवलोकन इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, अहमदाबाद के विद्यार्थियो द्वारा भी किया गया।

टाइम लाइन (जीवन घटनाक्रम)



1948: लालू प्रसाद यादव का जन्म हुआ
1977: लालू प्रसाद ने लोक सभा चुनाव जीता
1989: राज्य विधान सभा में विपक्ष के नेता चुने गए
1990: बिहार के मुख्य मंत्री बने
1990:23 सितम्बर को आडवानी को रथयात्रा के दौरान गिरफ्तार करने का आदेश दिया
1996: एक बड़े घोटाले (चारा घोटाला) का आरोप लगा
1997: राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना की
1997: मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया
2004: केन्द्रीय रेल मंत्री बने
2009: लोक सभा चुनाव जीता

2013: चारा घोटाले में न्यायालय ने 3 अक्टूबर 2013 को पांच साल कारावास की सजा सुनाई और पच्चीस लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई

चारा घोटाला :

लालू प्रसाद यादव (LaluPrasadYadav) के जीवन सबसे बुरा समय चारा घोटाला (fodder scam)था। जिसके कारण उन्हे जेल जाना पड़ा था।1997 में जब केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उनके विरुद्ध चारा घोटाला मामले में आरोप-पत्र दाखिल किया तो लालू यादव को मुख्यमंत्री पद से हटना पड़ा। अपनी पत्नी राबड़ी देवी (Rabri Devi's) को सत्ता सौंपकर वे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष बन गये और अपरोक्ष रूप से सत्ता की कमान अपने हाथ में रखी। चारा घोटाला (fodder scam) मामले में लालू यादव को जेल भी जाना पड़ा और वे कई महीने तक जेल में रहे भी। लगभग सत्रह साल तक चले इस ऐतिहासिक मुकदमे में सीबीआई (CBI) की स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह ने लालू प्रसाद यादव को वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के जरिये 3 अक्टूबर 2013 को पाँच साल की कैद व पच्चीस लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई उसके उपरांत अन्य मामलों में कुल सजा 14 वर्ष की हो गयी है और अभी वह जेल में हैं।

लालू प्रसाद यादव के परिवार 

पुत्र: 2 (तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव)

बेटियां: 7

लालू यादव का पारिवारिक विवरण (Family details of Lalu Yadav)

 उनकी सात बेटियां हैं: रोहिणी, मिशा भारती, हेमा, चंदा, धन्नु, अनुष्का और राजलक्ष्मी और दो बेटे तेजप्रताप और तेजस्वी यादव।

गंभीर मुद्दों पर उनका मजाक अंदाज माहोल  
को हल्का बनाने के लिए काफी होता है। आइए हम ऐसे ही कुछ बयानों पर एक नजर डालते हैं 


एक बार लालू यादव ने कहा, पूरी दुनिया के लोग जानना चाहते हैं कि एक ग्वाला का बेटा इतनी ऊंचाई पर कैसे पहुंच गया?

ANSWER- मुझ में लोगों की इतनी रुचि, भारतीय लोकतंत्र की जीत है।

एक बार महिला पत्रकार ने लालू से उनके नौ बच्‍चों  के बारे में पूछा ?

Answer- तो उन्‍होंने कहा, जब से सीएम बने हैं, बच्चे पैदा होना ही बंद हो गए।

एक पत्रकार ने जब लालू से पूछा कि क्‍या आपने आरजेडी शासन में कभी नकल की बात सुनी?

Answer- उन्होंने जवाब दिया, नहीं सुनी होगी क्योंकि हम तो छात्रों को पूरी किताब ही दे देते थे।

एक पत्रकार ने जब लालू यादव को ये बताया कि हेमा मालिनी उनकी फैन हैं ?

ANSWER- तो उन्‍होंने कहा, अगर हेमा मालिनी मेरी फैन हैं तो मैं उनका एयरकंडीशनर हूं।

एक मौके पर लालू ने कहा था, हम बिहार की सड़कों को हेमा मालिनी के गालों जितना मुलायम बना देंगे।


काम न करने को लेकर हो रही?

ANSWER- आलोचनाओं का जवाब देते हुए लालू ने कहा था, हम इतना काम करते हैं, अगर आराम नहीं करेंगे, तो पगला जाएगे।


वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उऩ्होंने एक बार बोले नरेन्द्र मोदी अगले कुछ दिनों में पागल हो जाएंगे, हमारे देश के प्रधानमंत्री बनने के लिए वो पागल हुए जा रहे है।

अपना 69वां जन्‍मदिन मनाते हुए भी मीडिया से बातचीत के दौरान लालू यादव ने ठेठ अंदाज में कहा, 'अभी तो मैं जवान हूँ।



लालू रेल मंत्री थे तब उन्‍होंने अपना आर्थिक सिद्धांत देते हुए कहा, अगर आप गाय को पूरी तरह नहीं दुहेंगे तो वो बीमार पड़ जाएगा।

लालू प्रसाद यादव खुद ही कई बार कह चुके हैं, जब तक समोसे में रहेगा आलू, बिहार में रहेगा लालू।



लालू यादव अक्‍सर 'धत बुड़बक' कहते हैं. आज भी अधिकतर हास्‍य कलाकार इसका उपयोग करते हैं।


रेलवे में बढ़ती चोरी की घटना पर कहा था, डकैती तो होता रहता है।

रेल हादसों की बढ़ती संख्या पर लालू ने कहा था, भारतीय रेल का दायित्व भगवान विश्वकर्मा पर है. इसलिए यात्रियों की सुरक्षा का दायित्व उनका है, मेरा नहीं, मैं उनके काम को संभालने के लिए विवश हूं।

बीफ बैन पर लालू ने बोले थे, 'गौ रक्षा का ढिंढोरा पीटने वाले लोग खुद घरों में कुत्ता पालते हैं, गाय नहीं, जानते हो ना कौन है ई लोग।



यूपीए सरकार में रेलवे मंत्रालय की जिम्‍मेदारी संभालने पर लालू ने कहा था, हमरी मां ने सिखाया है कि भैंसवा को पूंछ से नहीं, बल्कि हमेशा सींग की तरफ से पकड़ों. मैंने जिंदगी में यही सबक अपनाया है।


बोलने की शैली

बिहार राजनिति में लालू प्रसाद यादव जैसी शैली भाषण शायद किसी राजनितिज्ञ होगा। लालू प्रसाद यादव की बोलने की शैली हर कोई दिवाना हो जाता है चाहे उनके विपक्ष में है या फिर समर्थक हो , लालू प्रसाद अपने बोलने की शैली के लिए मशहूर हैं। इसी शैली के वजह से लालू प्रसाद भारत सहित विश्‍व में भी अपनी विशेष पहचान बनाए हुए हैं। अपनी बात कहने का लालू यादव का खास अन्दाज़ है।किंतु एक बात निश्चित है लालू जैसा ना कोई वर्तमान में है ना ही कोई भविष्य में आ पाएगे लालू बस एक ही वो लालू प्रसाद यादव है।


    लालू प्रसाद यादव (LaluPrasadYadav) कुछ रोचक बाते


 लालू प्रसाद यादव परिवार से होने के वजह से उन्‍हें यादव बिरादरी के सभी कार्य करना आता है, जिसमें गायों और भैसों का दूध दूहने के साथ ही दूध-दही बेचना भी शामिल हैं।

लालू प्रसाद को बिहार का प्रमुख व्यंजन लिट्टी-चोखा तथा सत्तू (मक्‍के और चने का) खाना बेहद पसंद है। वे जब भी अपने गांव जाते हैं तो इस प्रमुख व्यंजन को खाना नहीं भूलते है।


2003 में बिहार के कुछ हिस्‍सों में आई बाढ़ के बाद राजद (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद का कहना था कि इतना पानी तो मेरी पाड़ी (भैंस का बच्चा) एक बार में पी जाती है। उन्‍होंने केंद्र सरकार द्वारा बाढ़ पर पूछी गई जानकारी के जवाब में यह कहा।


लालू प्रसाद अपने भाषणों में देहाती भाषा के शब्दों का प्रयोग बहुत ही अधिक करते हैं। देश तथा विदेश  में भी उनके इस तरह के बोलने के स्‍टाइल पर फिदा है। लोग इन्‍हें राजनीति का बहुत बड़ा कॉमेडियन भी मानते हैं। देश की मीडिया में भी इनके इस स्‍टाइल की बहुत ही चर्चा होती है।

2005 लालू प्रसाद केंद्र की सत्ता में UPA की सरकार आने के उपरांत रेल मंत्री बने थे। इसी बीच उन्‍होंने रेलवे में तथा रेलवे स्‍टेशनों पर चाय मिट्टी के बर्तन (कुल्हड़) में बेचना अनिवार्य कर दिया था, जिसके उपरांत रेलव तथा कुल्‍लड़ बनाने वाले की काफी कमाई हुई थी। इतना ही नहीं जब तक लालू यादव रेलमंत्री रहे उन्होंने यात्री किराया नहीं बढ़ाया।

लालू प्रसाद बचपन के दिनों में गांव के छोटे बच्‍चों के साथ गाय और भैंसे चराया करते थे और उनके लिए चारे का व्‍यवस्‍था करते थे। ये अलग बात है कि बाद में चारा घोटाले (fodder scam) के वजह से ही उन्हें जेल जाना पड़ा।

लालू प्रसाद यादव जीवन पर संक्षिप्त वर्णन


ये लालू प्रसाद यादव जीवन पर संक्षिप्त वर्णन ही कर पाए है वो भी internet से की गई रिसर्च आधारिक है , वैसे लालू प्रसाद यादव जानने चाहते है उन पर कई पुस्तक भी लिखे गए , जैसे कि Gopalganj to Raisina Raod और इसके अलावा उनके ऊपर दो अन्य पुस्तकें "लालू प्रसाद, भारत का चमत्कार" नीना झा द्वारा और लालू प्रसाद यादव एक करिश्माई नेता 1996 में प्रकाशित हो चुकी है।आज भले ही लालू यादव वर्तमान में भ्रष्टाचार के जुर्म में जेल की सलाखों के पीछे हो किंतु भारतीय राजनीति में उनकी उपस्तिथि बहुत बड़ी भूमिका निभाती है।



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