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happy sawan 2020 Sawan 2020 Dates:श्रावण मास सबसे खास पौराणिक कथा और जानिए इस बार कितने सोमवार पड़ेगी.....

नमस्कार दोस्तों श्रावन मास आरंभ होने जा रहा है , मित्रो आज लेख सबसे पहले बताए गे कि श्रावण मास (Shravan Maas) क्यों खास है। इस पर पौराणिक कथाएं आपको बताने जा रहे है।
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चलिए आरंभ करते है आज की लेख को
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पौराणिक मान्यता के वण मास को देवों के देव महादेव भगवान शंकर का महीना माना जाता है। इस संबंध में पौराणिक कथा है कि जब सनत कुमारों ने महादेव से उन्हें श्रावण महीना प्रिय होने का वजह पूछा तो महादेव भगवान शिव ने बताया कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था। उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने युवावस्था के श्रावण महीने में निराहार रह कर कठोर व्रत किया और उन्हें प्रसन्न कर विवाह किया, जिसके उपरांत ही महादेव के लिए यह विशेष हो गया। श्रावण में शिव शंकर की पूजा श्रावण के महीने में भगवान शंकर की विशेष रूप से पूजा की जाती है।


पुजा की आरंभ कैसे होती है
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इस समय पूजन की आरंभ महादेव के अभिषेक के साथ की जाती है। अभिषेक में महादेव को जल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गंगाजल, गन्ना रस आदि से स्नान कराया जाता है। अभिषेक के उपरांत में बेलपत्र, समीपत्र, दूब, कुशा, कमल, नीलकमल, ऑक मदार, जंवाफूल कनेर, राई फूल आदि से शिवजी को प्रसन्न किया जाता है। इसके साथ की भोग के रूप में धतूरा, भाँग और श्रीफल महादेव को चढ़ाया जाता है ।


महादेव का अभिषेक पिछे पौराणिक कथा

महादेव का अभिषेक करने के पीछे एक पौराणिक कथा का उल्लेख है कि समुद्र मंथन के समय हलाहल विष निकलने के उपरांत जब महादेव इस विष का पान करते हैं तो वह मूर्च्छित हो जाते हैं। उनकी दशा देखकर सभी देवी-देवता भयभीत हो जाते हैं और उन्हें होश में लाने के लिए निकट में जो चीजें उपलब्ध होती हैं, उनसे महादेव को स्नान कराने लगते हैं। इसके उपरांत से ही जल से लेकर उन सभी चीजों से महादेव का अभिषेक किया जाता है।


बेलपत्र के पिछे पौराणिक कथा
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बेलपत्र महादेव को प्रसन्न करने का सुलभ माध्यम है। बेलपत्र के महत्व में एक पौराणिक कथा के मुताबिक एक भील डाकू परिवार का पालन-पोषण करने के लिए लोगों को लूटा करता था। श्रावण मास (Shravan Maas) में एक दिन डाकू जंगल में राहगीरों को लूटने के इरादे से गया। एक पूरा दिन-रात बीत जाने के बाद भी कोई शिकार नहीं मिलने से डाकू काफी परेशान हो गया।इसी बीच डाकू जिस पेड़ पर छुपकर बैठा था। वह बेल का पेड़ था और परेशान डाकू पेड़ से पत्तों को तोड़कर नीचे फेंक रहा था। डाकू के सामने अचानक महादेव प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा अचानक हुई शिव कृपा जानने पर डाकू को मालूम चला कि जहां वह बेलपत्र फेंक रहा था उसके नीचे शिवलिंग स्थापित है। इसके उपरांत से बेलपत्र का महत्व और बढ़ गया।


हिंदू धर्म में श्रावन मास का बहुत ही अधिक महत्व है। इस महीने में जो भी भक्त सोमवार का व्रत रखता है उसकी सभी मनोकामनाएं भगवान शिव पूरा करते है। श्रावन मास (Shravan Maas) भगवान शिव को समर्पित है। इस पूरे महीने शिवभक्त बड़ी ही श्रद्धा के साथ उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। सावन मास में पड़ने वाली शिवरात्रि अपना विशेष महत्व रखती है।

Sawan 2020 Dates श्रावन मास शिवरात्रि खास महत्व

प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि भी पड़ती है। किंतु श्रावन माह में आने वाली शिवरात्रि का खास महत्व है। श्रावन की शिवरात्रि को फाल्गुन महीने में आने वाली महाशिवरात्रि के समान ही फलदायी माना जाता है। इस बार श्रावण मास की आरंभ 6 जुलाई से हो रही है और इसका समापन 3 अगस्त को होगा। आपको बता दें कि इस बार श्रावन की आरंभ और समाप्ति दोनों ही सोमवार के दिन होगी।


श्रावन में शिव पूजन का महत्व

सावन में सोमवार का दिन शिवजी की पूजा के लिए खास माना जाता है। हिंदू मान्यता के मुताबिक श्रावन के सोमवार पर शिवलिंग की पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। कुंवारी लड़कियां मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए श्रावन के सोमवार का व्रत रखती हैं।


इन उपायों से मिलेगा बीमारियों से मुक्ति
श्रावण मास में सुबह के समय शीघ्र उठे, इसके उपरांत अपने स्नान के जल में दो बूंद गंगाजल डालकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
पूजा की थाली में रोली-मोली, चावल, धूप, दीपक, सफेद चंदन, सफेद जनेऊ, कलावा, पीला फल, सफेद मिष्ठान, गंगा जल तथा पंचामृत आदि रखें.
 यदि संभव हो सके तो अपने घर से नंगे पैर भगवान शिव के मंदिर के लिए निकलें मंदिर पहुंचकर विधि विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करें।
 गाय के घी का दीपक और धूपबत्ती जलाकर वही आसन पर बैठकर शिव चालीसा का पाठ करें और शिवाष्टक भी पढ़ें.
 अपने घर वापस आते समय भगवान शिव से प्रार्थना करें और अपने मन की इच्छा कहें।


कब-कब पड़ेंगे सोमवार

इस वर्ष 2020 के श्रावन माह में कुल पांच सोमवार पड़ेंगे।पहला सोमवार जहां आरंभ के दिन यानि कि 6 जुलाई को ही पड़ रहा है। वहीं दूसरा सोमवार 13 जुलाई को पड़ेगा। इसके उपरांत 20 जुलाई, 27 जुलाई और 3 अगस्त के दिन श्रावन का सोमवार पड़ रहा है। इस महीने में मोनी पंचमी, मंगला गौरी व्रत, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली और सोमवती अमावस्या, हरियाली तीज, नागपंचमी और रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण त्योहार पड़ेंगे। साथ ही इस बार श्रावन में 11 सर्वार्थ सिद्धि, 10 सिद्धि योग, 12 अमृत योग और 3 अमृत सिद्धि योग भी बन रहे हैं।



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