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Good news Patanjali Corona Medicine: Patanjali Ayurved ने कोरोना की पहली आयुर्वेदिक दवा 'कोरोनिल लॉन्च की तो कुछ लोगो होने लगी जलन..



नमस्कार दोस्तों बाबा रामदेव (Baba Ramdev)की पतंजलि आयुर्वेद (Patanjali Ayurved) ने कोरोना वायरस (covid 19) के इलाज का सफल दावा करते हुए दवा लॉन्च की है। इस दवा को 'दिव्य कोरोनिल टैबलेट' नाम दिया गया है। बाबा रामदेव ने कहा कि पतंजलि ने खतरनाक वायरस के इलाज के लिए इस आयुर्वेदिक दवा को तैयार किया है। उन्होंने मंगलवार को हरिद्वार में इस दवा को लॉन्च किया। उन्होंने बताया कि इस दवा का सेवन करने पर रोगी पांच से 14 दिनों के अंदर ठीक हो जाता है। आज कुछ लोग बाबा रामदेव की कोरोना दवा बिना किसी तथ्य (fact) की ही निराधार आरोप लगा रहे है ,ऐसे लोग पत्रकारिता (Journalism) पढ़ाई किए बिना स्वयं को फेसबुक कांतिकारी पत्रकार समझ लेते हैै वैसे लोगो के लिए में ने Facebook पर Post लिखा हूँ जिसे आप विस्तार पढ़ सकते है ।

निचे विस्तार से पढ़िए मेरा फेसबुक पोस्ट को
Patanjali Corona Medicine


जैसे ही पंतजलि आयुर्वेद और कोरोना वायरस की दवा बनाने दावा कुछ नामसमझ प्रश्न चिन्ह खड़े करने  लगते है। आज दौर में सोशल मीडिया कुछ कांतिकारी लोग आ चुके जो बिना किसी रिसर्च रिपोर्ट पढ़े बिना निराधार आरोप लगाते है
और साक्ष्य के बिना ही प्रश्न चिन्ह उठाते है , किसी की परिश्रम प्रश्न चिन्ह खड़े करने से पहले उस विषय के बारे पुरी इफार्मेशन इकट्ठा करे तभी उस पर कोई टिपण्णी करे,  ऐसे लोगो सोच समझ परे.

वास्तव में ऐसे लोगो की सोच गुलामी दौर में ही है आज भी , इन्हे कभी सकारात्मक (positive) चीजे अच्छी नही लगती है , बल्कि कि इन्हे सदा ही नकारात्मक (Negative) चीजो पढ़ना ही या फिर देखना पंसद आता है...चलिए ऐसे नकारात्मक (Negative) लोगो की ज्यादा महत्व ना देते ये कहना चाहते है कि अगर पंतजलि आयुर्वेद के वास्तविकता में कोविड १९ औषधि सफल हुई ऐसे आज्ञानी लोगो की बोलती ही सदा के लिए बंद हो जाएगी और ये दुनिया के लिए बहुत ही सकारात्मक (positive) खबर है।

वैसे Patanjali Ayurved कहना है कि ये औषधि पुरे रिसर्च आधार तैयार किया गया है। मेरे दृष्टिकोण अनुसार पंतजलि आयुर्वेद की कोरोनिल| (CORONIL) रामबाण औषधि साबित होती है , तो ये भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा जगत के लिए बड़ी सफलता है , विश्व को COVID 19 महामरी (Epidemic) से मुक्ति तो मिलेगी ही.और विश्व में भारत के प्राचीन आयुर्वेद को फिर से नई पहचान मिलेगी तथा हमारा संनातन संस्कृत उद्देश्य सदा ही विश्व कल्याण रहा है, विश्न पटल भारत व आयुर्वेद की छवि उभरेगी साथ में कोरोना काल के इतिहास जब लिखा जाएगा कि तो ये भी लिखा जाएगा कि विस्तारवादी कम्युनिस्ट चाईना ने दुनिया को कोरोना वायरस दिया उसमें संपुर्ण विश्व के मानवता के संकट लाया था उस समय विश्वगुरू भारत ने संपुर्ण विश्व की मानवजाति की रक्षा की ...



जैसा भारत की सनातन संस्कृति का आधार ही वसुधैव कुटंबकम है. जिसका अर्थ होता है सारी धरती एक ही परिवार है... सतातन धर्म सदा ही बताए गा कि संपुर्ण जगत कल्याण हो तथा हमारे मंदिरो के आरती के समय कहा जाता है कि धर्म की विजय आधर्म की नाश हो ,सतातन संस्कृत सदा ही पुरे विश्व कल्याण चाहा है , संतातन धर्म सदा ही विज्ञानिक सोच आधारिक है.. किंतु आज युग में कुछ आज्ञानी लोग संतातन संस्कृत प्रश्न चिन्ह उठाते ऐसे लोगो बिना संतातन संस्कृत के पढ़े ही संतातन संस्कृत प्रति द्वेष की भाव रखते है हमारा संनातन संस्कृत सदा अपने प्रति शत्रु भाव रखने वाले के लिए कल्याण की कामना करना सिखाया है अंत में उन सभी के साथ संपुर्ण जग की कल्याण हो तथा कोरोना महामरी से दुनिया को शीध्र मुक्ति मिले ऐसी कामना और शुभकामनाएं के साथ अपनी फेसबुक पोस्ट को विराम देता हूँ... 🙏🙏

सकारात्मक चीजो राजनिति ना करे

वैसे महान फेसबुक के कांतिकारी पत्रकार यही कहुँगा कि राजनिति किसी अन्य मुद्दा भी की जाती है किंतु बात कोरोना वैक्सीन की है , अगर आयुर्वेद औषधि से कोरोना मरीज ठीक होते है, तो इसे संनातन धर्म प्रति निजी ईर्ष्या भुलाकर इस दवा अपनाना चाहिए और ऐसे लोगो से ये कहुँगा कि मन सकारात्मक ((positive) विचार रखे दुनिया अच्छी लगने लगेगी।


सनातन धर्म कभी तलवार दम धर्म परिवर्तन नही करवाया

सनातन धर्म सदा सिखाया है कि प्रेमभाव रखने से ही विश्वविजेताबन पाए गे। सतातन माने वालो ना कभी तलवार दम ना कभी किसी राष्ट्र छिड़ने की प्रयास किया और ना कभी अपने धर्म फैलाने उद्देश्य से किसी पर तलवार दम या लालच देखकर धर्म परिवर्तन नही करवाया है। सदा ही संनातन धर्म सिखाया है कि जो हमारे धर्म अपने इच्छा आना चाहते है उन लोगो स्वागत और जो हमारे प्रति शत्रु भाव रखते वैसे लोगो के लिए भी कल्याण के ही भावना रखना चाहिए।



note - ये पोस्ट किसी कंपनी का विज्ञापन के लिए नही था बल्कि पुर्णरूप से मेरी निजी विचार थी धन्यवाद...
          🖋🖋- Shashi Kant Yadav


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