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Earthquake zone in india: ये शहर सबसे खतरनाक जोन में , और धरती अंदर हो रही हलचल तो क्या मिल रही सबसे बड़ी भूकंप संकेत जाने इस मुद्दे पर भू-वैज्ञानिक की राय


जाने किन शहरो में है भूकंप का सबसे ज्यादा खतरनाक जोन और धरती के अंदर हो रही हलचल से खिसक रही जमीन,तो क्या कच्छ जैसी तबाही के संकेत मिल रही ।
Earthquake zone in india


नमस्कार दोस्तों  पिछले कुछ दिनो दिल्ली में लगातार ही भुकंप आ रहे इसके पिछे ये तो नही देश को बड़े भुकंप संकेत मिल रहे है आज भू-वैज्ञानिक जानेगे कि भारत कौन सा क्षेत्र किस जोन में आता है वैसे आप सभी जानते हैं कि भूकंप (Earthquake) भविष्यवाणी करना संभव नही हो सका है। किंतु भौगोलिक परिवर्तन पर यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय के वैज्ञानिकों ने एक स्टडी(study) की है। इसकी रिपोर्ट अर्थ एंड प्लेनेटरी साइंस लेटर्स में प्रकाशित की गई है। इस स्टडी (study) के अनुसार धरती के अंदर केंद्र (Inner Core Moving) में मौजूद हिस्सा घूमता हुआ पाया गया है। जिसकी वजह से धरती के मैग्नेटिक फील्ड यानी चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन हो रहा है। यही कारण  है कि चुंबकीय उत्तरी ध्रुव कनाडा से खिसक कर साइबेरिया पहुंच गया है। प्रोफेसर जियाओडोंग ने कहा कि उन्होंने दुनिया भर के अलग-अलग स्थानों पर भूकंप के आने की दरों का अध्ययन (study)किया। जिसमें मालूम चला कि भूकंप के आने की दर धरती के अंदर घूम रहे कोर की वजह से कम ज्यादा हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि कोर के घूमने की वजह से धरती की ऊपरी सतह और प्लेटें आपस में टकराती हैं या खिसकती हैं। इससे धरती के ऊपर बने पहाड़ों की ऊंचाई पर भी असर पड़ रहा है।



कच्छ के भूकंप तबाही की कहानी 


वर्ष 2001 गुजरात (Gujrat) के कच्छ में आए भूकंप (Earthquake) ने खूब तबाही मचाही थी। इसका जिक्र पीएम मोदी (PM Modi) ने कोविड19 अपने संबोधन के दौरान भी किया। आपको बता दे कि 26 जनवरी 2001, भारत के 51 वें गणतंत्र दिवस, की सुबह 08:46 बजे हुआ और 2 मिनट से अधिक समय तक चला। इसका केंद्र भारत के गुजरात के कच्छ जिले के भचौ तालुका में चबारी गांव के लगभग 9 किमी दक्षिण-दक्षिणपश्चिम में था।इंट्राप्लेट भूकंप तीव्रता पर इसे  7.7 पर दर्ज किया गया और Mercalli तीव्रता पैमाने पर अधिकतम महसूस की गई तीव्रता X (चरम) की थी। इस भूकंप में 13,805 और 20,023 लोगों की मृत्यु हुई (दक्षिणपूर्वी पाकिस्तान में 18 समेत), 167,000 घायल हो गए और लगभग 400,000 घर नष्ट हो गए। इसके साथ साथ अंजर, भुज,ओर बहुआ तालुका पूर्ण रूप से तबाह हो गए! 40% घर,8% स्कूल,2 अस्पताल तथा 4 कि. मी. भुज की सड़क , शहर के  मंदिर ,दुर्ग ,किले, आदि नष्ट हो गए।इस विनाशक भूकंप में गुजरात राज्य की इमारतों के साथ साथ सम्पूर्ण व्यवस्थाओ को हिलाकर रख दिया।
जानिए देश को पांच भूकंपीय क्षेत्रों में बांटा


चलिए news18.com से प्रकाशित रिपोर्ट आधार जानते हैं कि आखिर भूकंपीय जोन है क्‍या?




news18.com से बात करते हुए डिजास्‍टर मैनेजमेंट के प्रोफेसर अभय कुमार श्रीवास्‍तव बताते हैं कि भारत और उसके आसपास के क्षेत्र में विनाशकारी भूकंप आते रहे हैं। भारतीय मानक ब्यूरो ने विभिन्‍न एजेंसियों से प्राप्त विभिन्न वैज्ञानिक जानकारियों के आधार पर देश को पांच भूकंपीय क्षेत्रों में बांटा गया है।


आईए जानते पांचो भूकंप जोन के बारे विस्तार से



(1.) जोन एक पश्चिमी मध्यप्रदेश, पूर्वी महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और उड़ीसा के हिस्से आते हैं। यहां भूकंप का सबसे कम खतरा है।



(2) जोन-2: यह भूकंप की दृष्टि से सबसे कम सक्रिय क्षेत्र है, किंतु उसमें आने वाले भूकंप से फर्नीचर हिल सकते हैं, प्‍लस्‍तर झड़ने तथा इमारत को कुछ क्षतिहोने के मामले भी मिल सकते हैं, कम तीव्रता वाले इस जोन में 6 या उससे कम तीव्रता वाले भूकंप आ सकते हैं।
(3.) इस जोन में अधिक तीव्रता वाले भूकंप महसूस किए जा सकते हैं, ऐसे भूकंप जिसमें खड़ा होना तक कठिन हो जाता है। इमारतों में हल्‍का क्षति हो सकता है इसे सामान्य तबाही के खतरे वाले क्षेत्र की श्रेणी में रखा गया है।

इस जोन 
में केरल, गोवा, लक्षद्वीप समूह, उत्तर प्रदेश के बाकी हिस्से, गुजरात और पश्चिम बंगाल, पंजाब के हिस्से, राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडीसा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक शामिल हैं, सामान्य तीव्रता वाले इस जोन में रिक्‍टर पैमाने पर 7 तीव्रता तक का भूकंप आ सकता है।


(4)यह जोन प्रबल भूकंप की संभावना रखता है,  इसलिए यह ज्यादा तबाही के खतरे वाला क्षेत्र कहा जाता है इसमें भूस्‍खलन और इमारतों में क्षति की संभावना रहती है।
इस जोन में जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के बाकी हिस्से, दिल्ली, सिक्किम, उत्तर प्रदेश के  उत्तरी भाग, बिहार और पश्चिम बंगाल, गुजरात के कुछ हिस्से और पश्चिमी तट के समीप महाराष्ट्र का कुछ हिस्सा और राजस्थान शामिल हैं। इस जोन में रिक्‍टर पैमाने पर 8 तीव्रता वाला है ।

दिल्ली में भूकंप की संभवना वाले क्षेत्रो में यमुना तट के नजदीक इलाके, पूर्वी दिल्ली, शाहदरा, मयूर विहार, लक्ष्मी नगर शामिल है. दिल्‍ली के सिस्‍मिक माइक्रोजोनेशन रिपोर्ट में यह मालूम चला है, इसी जोन में हरियाणा के दो बड़े औद्योगिक शहर गुड़गांव और फरीदाबाद भी आते हैं।

(5.) यह देश के अधिकतम जोखिम का जोन है. भूकंपीय दृष्टि से सबसे अधिक सक्रिय क्षेत्र माना जाता है, इसके दायरे में सबसे अधिक खतरे वाला क्षेत्र आता है जिसमें रिक्‍टर पैमाने पर 8 से 9 से ज्यादा तीव्रता के भूकंप आते हैं। इस क्षेत्र में आने वाले भूकंप विशेष रूप से डिजाइन बिल्‍डिंगों में भी
पहुंचा सकते हैं।उसमें रेल पटरियां मुड़ जाती हैं और सड़कों को नुकसान पहुंचता है, जमीन में दरारें पड़ जाती हैं और भूमिगत पाइपें फट जाती हैं। नदियों का मार्ग तक बदलने की संभावना रहती है।



इस जोन में मुख्‍य तौर पर पूर्वोत्तर भारत, जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्से, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात में कच्छ का रण, उत्तर बिहार का कुछ हिस्सा और अंडमान निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं।


जोन 4 या 5 में सबसे ज्यादा भूकंप की खतरा है किंतु आजतक भविष्यवाणी नही की सकती है भूकंप कब आएगा ये किसी वैज्ञानिकों नही मालूम है किंतु एक बार सोच देखिए इतनी बड़ी भूकंप आता है तो कितनी बड़ी तबाही होगी जिसकी आप सपने भी नही सोचा होगा वो सकता है। जरा 
सोचिए गुजरात 26 जनवरी 2001 आए 7  तीव्रता भुकंप उतनी बड़ी तबाही हो सकती भागवान ना करे कभी भी 8 या 9 तीव्रता भुकंप जोन 5 वाले किसी राज्य आ जाए तो कितनी बड़ी तबाही होगी ये सोचने वाली बात किंतु इस से डरने अवश्यकता नही क्योंकि कभी कोई  वैज्ञानिक भूकंप आने की जानकारी नही दे सकती है।


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