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covid 19 india : मेरे दृष्टिकोण जानिए कैसे आपदा काल भारत अवसर में बदल सकता है ...


मोदीजी सरकार आपदा अवसर कैसे बदल सकते है और इसके अलावा सरकारी अस्पताल कैसे स्थिती सुधर सकती है और Rahul Gandhi प्रत्येक गरीब परिवार 10 हजार रूपये देने बयान और जानिए कई बड़े अर्थशास्त्री modi government 20 हजार लाख करोड़ क्या राय रखते जानिए इन सभी मुद्दे विस्तार से जानते हुए।

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नमस्कार दोस्तों जैसा आज हमारे लेख शीर्षक है आपदा काल अवसर बदले जैसा कि आप अभी कोरोना काल की चर्चा कर रहे है और ये कोरोना काल की उपरांत दुनिया कैसी होगी जब भी कोई आपदा आती है तो मानव जाति परिवर्तन करना पड़ता है। ये समय भी मानवता रक्षा के लिए परिवर्तन युग साबित होगी मानव जाति कई परिवर्तन लाने पड़ेगे अब दुनिया पहले जैसी नही रहेगी। 




जब पुरा विश्व ये जानती थी प्रत्येक 100 वर्ष में एक महामरी आती फिर भी हम ने ढंग से तैयारी नही की अब हमारे पास 100 साल समय है।भविष्य दुनिया कैसी होगी ना में जानता हूँ ना ही आप जानते हैं।आज के वर्तमान परिस्थिती सिख लेकर आने वाले समय अपने राष्ट्र मजबुती तैयार करे। हम स्वयं ही आत्मनिर्भर बनेगे तभी विकसित देशो शामिल हो पाएगे और विश्वगुरू बन पाएगे। 



जैसा कि जानते हैं कि हमारे पास दुनिया की सबसे बड़ी बाजार (market) है। जिस से दुनिया कई देशो कंपनी इंडस्ट्री हमारे देश तरफ आकर्षित होगी। इसका वजह हो सकती है कि इस समय पुरी दुनिया चाईना से नाराज है।विश्व कई देशो के इंडस्ट्री चीन से शिफ्ट करना चाहती दुसरे विकल्प की खोज कर रही है। और पुरी दुनिया में एकमात्र देश भारत ही जो चीन का विकल्प बन सकता है। 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी हर गरीब को 10 हजार देने बात उचित या नही
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) उनकी पार्टी मांग है की प्रत्येक गरीब को 10 हजार रूपये देना चाहिए उनका ये भी कहना कि pm Modi government 20 हजार पैकेज से कोई लाभ नही होगा। इसका अगर विशेषण करे तो राहुल गांधी बात माने देश में गरीबो संख्या संयुक्त राष्ट्र (UN) 2019 के रिपोट आधार पर 37 करोड़ लोगो प्रत्येक गरीब परिवार 10 हजार ₹ देने उपरांत गरीबो उत्थान हो जाएगा। तो इसका उत्तर नही है। तो फिर ऐसा करने से लाभ ही क्या होगा।राहुल गांधी को एक इतिहास की पुरानी कहानी बताते है वैसे तो में ने जो पुस्तक पढ़ा है उसका नाम ठीक से याद नही है।किंतु चलिए जानते हैं उस कहानी को एक राज्य में बेरोजगारी दर लगातार बढ़ रही थी तभी राजा मुलाकात करने बेरोजगार मंडल आया उन्होंने राजा सामने अपनी परेशानी बताई जिसके उपरांत राजा ने कहा आप सभी व्यापार (Business) क्यों नही कर लेते है?




इस पर राजा से बेरोजगारी मंडल कहा कि महाराज हमारे पास धन नही है तब राजा कहा कि हम राज्य कोष धन देते है इसी पर राजा सलाहकार राजा टोकते हुए कहते महाराज आप उन्हे धन अवश्यक दीजिए किंतु ऋण रूप में तभी महाराज पुछते ऐसा क्यों?



तो उसका उत्तर देते हुए राजा सलाहकार कहते है कि ऋण रूप में देने से भविष्य में भी उसी धन का प्रयोग भविष्य बेरोजगारो रोजगार देने में कर सकते है।  जिस राज्य कोष धन की कमी भी नही होगी।और इस संदर्भ समझे वो राजा सलाहकार वर्तमान ही नही बल्कि वो राज्य की भविष्य सुरक्षित कर लिया। यह कहानी वर्तमान परिस्थिती लागू होता है।


मोदी सरकार (Modi government) की 20 लाख करोड़ की पैकेज बिल्कुल उचित है। जबकि अधिकतर अर्थशास्त्री ने मोदी सरकार इस पैकेज उचित बताया है। राहुल गांधी ने योजना बताई उस से भारतीय इकोनॉमी कोई लाभ नही होता, ना ही गरीबो भला होता है। फिर ऐसे योजना का kya फायदा हम तो यही राहुल गांधी से कहेंगे कि भारत के पुर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जो बड़े अर्थशास्त्री भी उनके पास जाकर अर्थव्यवस्था की ज्ञान ले।




आपदा काल अवसर बदले
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मेरा मानना है कि प्रत्येक आपदा को ठीक समझे तो एक अवसर ( opportunity) जरूर देता है, कौन सोचता था कि जिस भारत में कोरोना काल से पहले एक भी मार्क्स और PPE किट नही बन रही है आज उसी भारत में मार्क्स और PPE किट रोजाना एक लाख से भी ज्यादा बन रही है। जिसकी आज से तीन महीने पहले किसी ने कल्पना भी नही की थी।वो अब भारत में हो रहा है, इसलिए हम कह रहे वो उचित समय आ चुका जब दुनिया सबसे बड़े बाजार (market) के साथ दुनिया सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरिंग हब बने की तैयारी करना चाहिए। अगर मोदी सरकार आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए उस दिशा बढ़ना चाहते है तो कई बड़े निर्णय लेने पड़ेगे। और कई बड़े अर्थशास्त्री भी कह रहे हैं कि भारत के पास बड़ा अवसर है और इसे भुनाना चाहिए। अगर भारत इस मौके को भुनाता है तो आने वाले वर्षों में चीन की आर्थिक ताकत कमजोर होगी और उसका एकछत्र कारोबार पर अंकुश लगेगा।



आपदा काल अवसर बदलने क्या चाहिए
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अब जरूरत इस आपदा काल अवसर बदलने की इसके लिए प्रत्येक राज्य सरकार अपने राज्य इंडस्ट्री लगाने पड़ेगे। जिस से फिर श्रेमिको की पलायन समस्या झेलना ना पड़े फिर कभी महामरी की चपेट आए तो ऐसी समस्या सामना ना करना पड़े। अब मोदीजी सरकार चाहिए अच्छे अस्पताल सुविधा हर संसदीय क्षेत्र में हो। कुछ विश्लेषक राय ये है कि भारत की हर नागरिक को स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) दी जाए। एक रिसर्च मालूम पड़ा है कि अधिकतर भारतीय मिडिल क्लास परिवार बिमारी वजह से ही फिर से गरीबी रेखा निचे आ जाते, जिस वजह फिर गरीबो की श्रेणी आ जाते है। ऐसा कई बिमारी जिसके इलाज के लिए लाखो रूपये की हर महीने खर्च करने पड़ते है। ये कारण है जिसके वजह सरकार लाख चाहने बाजवुद भी भारत गरीबी मुक्त नही हो पाए ,भारत सरकार गरीबी मुक्त भारत चाहती है तो एक ही तरीका है कि भारत सरकार प्रत्येक नागरिक को स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) दे जिस इलाज पैसे बचे गे और भारत के प्रत्येक नागरिक आर्थिक मजबुती होगी।और इस वजह से भारत प्रगति मार्ग पर बढ़ेगी और दुनिया विकसित देशो में शामिल होगा।



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सरकार अस्पताल निजीकरण


सरकारी अस्पताल कोरोना काल में काफी अच्छा काम किया है, इसके लिए प्रशंसा योग भी है किंतु ये सत्य देश सरकारी system लाख प्रयास बाजवुद भी हालात नही सुधर रही है मेरा विचार है कि देश हर नागरिक को स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) योजना जोड़ कर सरकारी अस्पताल निजीकरण कर देना या फिर भारत सरकार को ऐसे नियम बनाना चाहिए जिस से कि सरकारी system सही तरीके कार्य करे कई मामलो में सरकारी डाक्टर की भी गलती नही होती है। एक रिपोर्ट आधार पर भारत में हर 10,189 लोगों पर एक सरकारी डॉक्टर है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हर एक हजार लोगों पर एक डॉक्टर की सिफारिश की है। इस तरह छह लाख डॉक्टरों की कमी है। भारत में हर 483 लोगों पर एक नर्स है यानी 20 लाख नर्सों की कमी है।

विश्व GDP कोरोना काल उपरांत कैसी 

कोरोना काल में Lookdown की वजह हर उद्योग धंधे प्रभावित हुई , जिस से अर्थव्यवस्था ( Economy) की गति रूक सी गई फिर से आरंभ करने में समय लगेगा। अगर International Monetary Fund  (IMF)  ने आशंका जताई है कि विश्व की अर्थव्यवस्था वर्ष 1930 के उपरांत सबसे बड़ी आर्थिक मंदी का शिकार हो सकती है। 1930 में अर्थव्यवस्था में आई महामंदी की वजह से दुनिया की GDP 15 प्रतिशत तक गिर गई थी।जबकि साल 2008 की आर्थिक मंदी से दुनिया की GDP को सिर्फ 1 प्रतिशत का नुकसान हुआ था। यानी 2008 में जो नुकसान हुआ था, उससे 15 से 20 गुना अधिक बड़ा नुकसान 2020 में हो सकता है। ये ऐसा नुकसान है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते है। अगर आज दुनिया की सकल घरेलू उत्पाद (GDP )15 प्रतिशत गिरी तो इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था को 2 हजार लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा।



RBI गवर्नर शक्तिकांत दास क्या कहते भारतीय GDP पर
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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) अनुमान लगाया है कि भारतीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP ) 2020-21 में GDP नकारात्मक (Negative) में रह सकती है। (IMF) के माने कोरोना काल उपरांत पुरे विश्व सभी देशो की सकल घरेलू उत्पाद (GDP ) गिरेगी इसका अर्थ यानी ऐसी स्थिती सामना सिर्फ भारत ही नही बल्कि संपुर्ण विश्व की करेंगी।


पीएम मोदी माहिर आपदा अवसर बदलने के लिए
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ऐसा इसलिए कह सकते है कि रिसर्च में भी बताती है कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP ) जरूर घटेगी किंतु
चीन व अमेरिका बेहतर परिस्थिती में भारत रहेगी गी। सीधा अर्थ है कि भारत के पास बहुत बड़ा मौका है स्वयं को आत्मनिर्भर बनाने की और साथ में दुसरी वजह प्रधानमंत्री Narendra Modi काम करने के तरीके और प्रधानमंत्री मोदी आपदा को अवसर बदलने माहिर है। याद कीजिए जब गुजरात के कच्छ-भुज पुरी तरह तबाह हो गई जिसका जिक्र पीएम Narendra Modi ने Lookdown बढ़ाने और 20 लाख करोड़ पैकेज घोषणा समय राष्ट्र संबोधन दौरान किया था।जब कच्छ-भुज कुछ बचा नही था। उसे भी प्रधानमंत्री Narendra Modi  गुजरात ही बल्कि भारत सबसे विकसित जिले बना दिया था।


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Writer ShashiKant yadav फॉलो करिए Facebook , Twitter & Instagram-@shashikant88857


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