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इतिहास की ऐसी स्त्री जिसने अपना सिर काटकर पति को दिया,आप जान हो जाएगे हैरान

अभी पढ़ रहें है shashiblog.in आज के आर्टिकल में इतिहास वीरांगना रानी हाड़ी कहानी बताने जा रहे है।

मित्रो आज हम एक इतिहास वीरांगना रानी हाड़ी  कहानी आपको बताने जा रहे है।आईए जानते हैं उनकी शौर्यगाथा


यह 16वीं शताब्दी घटना है जब सलूम्बर राज्य की महारानी हाड़ी के पति महाराजा राव रतन सिंह का राज हुआ करता था। उसी बीच किशनगढ़ के राजा मानसिंह हुआ करते थे और औरंगजेब ने किशनगढ़ पर आक्रमण कर दिया था। मेवाड़ के राजा ने औरंगजेब को रोकने का कार्यभार सलूम्बर के महाराजा राव रतन सिंह को सौंप दिया था।

राव रतन सिंह का विवाह रानी हाड़ी से सिर्फ एक दिन  ही पुर्व हुआ था। अभी महारानी के हाथों की मेहंदी भी नहीं सूखी थी कि राव रतन सिंह को युद्धभूमि में जना पड़ा। राजा राव सिंह रानी हाड़ी से बहुत प्रेम करते थे और उनसे थोड़ी देर के लिए भी दूर रहना राजा के लिए कठिन था। वे युद्ध की तैयारी में लगे तो थे ,परंतु  उनका मन रानी को लेकर अत्यधिक उदास था। राजा ने एक सैनिक को रानी हाड़ी की कोई निशानी लेने के लिए भेजा। जब रानी हाड़ी के पास सैनिक पहुंचा तो वे समझ गयीं कि राजा राव का प्रेम उनकी कमजोरी बन सकता है और इस वजह उन्हें युद्ध में नुकसान हो सकती है। रानी ने सैनिक बोली कि वे राजा को अपनी अंतिम निशानी उपहार देनो जा रही है।

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