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Shahjahan और Mumtaz love story जाने और आखिर क्यों नही निभा पाए Mumtaz को दिए वादे

नमस्कार दोस्तों आप सभी स्वागत है हमारे ब्लॉग पर, आप अभी पढ़ रहें है shashiblog.in आज के आर्टिकल में Shahjahan और Mumtaz love story के बारे में बताएगे।


शाहजहां (Shahjahan)और मुमताज(Mumtaz)
की लव स्टोरी (love story) किसी की परिचय कि अवश्यकता नही है।
Shahjahan aur Mumtaz
मुमताज (Mumtaz) मुगल बादशाह शाहजहां की 13 वीं पत्नी थीं। शाहजहां का जन्म 5 जनवरी 1592 को लाहौर पाकिस्तान में हुआ था। 

दोस्तों सबसे पहले मुमताज (Mumtaz) जुड़े कहानी बताने जा रहे है।

  • वास्तविक नाम (Real Name)अर्जुमंद बानो
  • जन्म (Birthday)अप्रैल 1593 में
  • आगरापति (Husband)
  • शाहजहां (10 मई, 1612)
  • निधन (Death)17 जून, 1631, बुरहानपुर



मुमताज (Mumtaz) अप्रैल 1593 में उत्तरप्रदेश के आगरा शहर में अर्जुमंद बानो बेगम के रुप में जन्मीं थी। मुमताज (Mumtaz),  अब्दुल हसन आसफ खां की बेटी थी, जो कि मुगल साम्राज्य के चौथे शासक और शाहजहां के पिता जहांगीर के मंत्री थे। वहीं मुमताज (Mumtaz) की बुआ नूरजहां मुगल सम्राट जहांगीर की सबसे प्रिय पत्नी थीं।




मुमताज  और शाहजहां की मुलाकात और विवाह – Mumtaz and Shah Jahan meet and marry
Shahjahan aur Mumtaz


मुमताज (Mumtaz) उर्फ अर्जुमंद बानो एक बहुत ही सुंदर और गुणवती लड़की थीं। जो मीना बाजार में कांच और रेशम के मोती बेचा करती थीं। वहीं 1607 में उनकी मुलाकात इसी बाजार में मुगल वंश के शहजादे शाहजहां खुर्रम से हुई थी। उस वक्त वे सिर्फ 14 साल की थी।
उसी समय शाहजहां और मुमताज महल की बेमिसाल लव स्टोरी की प्रारंभ हुई और उस समय के साथ-साथ दोनों का प्यार परवान चढ़ा और फिर उसके 5 साल बाद मुमताज महल और मुगल वंश के शहजादे शाहजहां ने 1612 ईसवी में विवाह कर लिया। विवाह के बाद वे शाहजहां की सबसे प्रिय और पसंदीदा बेगम बन गईं। जिसके बाद वह बिना शाहजहां एक पल भी नहीं रह सकता था।



इतिहासकारों (Historians )की माने तो मुगल सम्राट शाहजहां ने मुमताज (Mumtaz) को अपने राज-काज से संबंधित कई अहम निर्णय का अधिकार भी दे रखा था। और तो और मुमताज (Mumtaz) की मुहर के बिना मुगल सम्राट शाहजहां कोई भी शाही फरमान तक जारी नहीं करते थे।

उसके अलावा शाहजहां ने मुमताज महल को अपने सबसे ज्यादा भरोसेमंद साथी के रुप में Honored
करते हुए उनके नाम पर आगरा में खास महल, मुहर उजाह, शाही मुहर जैसे भव्य और शानदार महलों को भी बनवाया था।

मुमताज (Mumtaz) की मृत्यु वजह



उसके बाद सोने के लिए अपने कमरे के अंदर चले गए। सोने से ठीक पहले उसकी बेटी जहां आरा वहां पहुंची और उसने मां की बिगड़ती हालत के बारे में जानकारी दी।जब शाहजहां हरम पहुंचा तो वहां उसने मुमताज को हकीमों से घिरा हुआ पाया। मुमताज छटपटा रही थीं। वह मौत के करीब थी। शाहजहां के पहुंचते ही शाही हकीम को छोड़कर तमाम लोग कमरे से बाहर चले गए। बादशाह की आवाज सुनकर मुमताज अपनी आंखें खोलीं। उनमें आंसू भरे हुए थे। शाहजहां मुमताज के सिर के पास बैठ गया। उनकी गोदी में मुमताज ने दम तोड़ा।मुमताज 19 साल में 14 बार गर्भवती हुईं। इसी के बाद उनकी मृत्यु  हुई जिसने शाहजहां को अंदर तक हिला दिया। बताया जाता है कि उन दोनों के 14 बच्चे थे जिनमें से सिर्फ 7 ही बच्चे जीवित रहे बाकी छोटी उम्र में ही मर गए। 


शाहजहां ने नहीं रखी मुमताज की वादा 




मुमताज ने मरने से पहले शाहजहां से दो वादा की वो उनके बाद मुमताज (Mumtaz)ने आखिरी समय पर शाहजहां (Shahjahan) से 2 वादे किए है ।

। पहला किसी से विवाह नहीं करेंगे जबकि दूसरा वादा
एक ऐसा मकबरा बनवाने का था जो अनोखा हो।
पहला किसी से विवाह नहीं करेंगे लेकिन शाहजहां ने कुछ ही दिनों बाद मुमताज की छोटी बहन से शादी कर ली। इसके अलावा भी शाहजहां ने आठ शादियां और भी कर ली।

जबकि दुसरे वादा पुरा किया मुमताज (Mumtaz) याद में
मकबरा का निर्माण करवाया जिसे हम सब ताजमहल नाम से जानते हैं।

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