Breaking News

shardiya navratri 2020 : navratri में जाने मां दुर्गा के 9 प्रसिद्ध मंदिर के बारे में दर्शन करने जरुर जाए


नमस्कार दोस्तों आप सभी स्वागत है हमारे ब्लॉग पर, आप अभी पढ़ रहें है shashiblog.in आज के आर्टिकल में बताएंगे नवरात्र (Navratri) के पावन पर्व शुरू हो गया है, नवरात्र  (Navratri) के 9 दिनों के दौरान एक का कोना-कोना भक्ति  मय और साथ ही मां दुर्गा के मंदिरों में हुई लाखों की तादाद में श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा हुआ है हर तरफ मां दुर्गा के जयकारे गूंज रहे हैं इस आर्टिकल में आपको बताने जा रहा हूं कि नवरात्र के 9 दिनो दौरान आपको नवरात्रों में जानिए मां दुर्गा के 9 प्रसिद्ध मंदिर जिनके दर्शन अवश्य करें| क्योंकि मां दुर्गा के नौ रूपों अस्तित्व काफी गहरा है इनकी मान्यता भी जाने|  



1. नैनीताल की नैना देवी


नैनीताल की नैना देवी मां नैना देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है माता की पूजा की जाती है पहाड़ियों में स्थित इस मंदिर को नैना देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है नैनी झील के किनारे पर यह मंदिर स्थित है|1880 1880 में भूस्खलन से मध्य पूरी तरह से तबाह हो गया था|लेकिन बाद में पुन निर्माण करके बनाया गया बताया जाता है कि माता यहां सती के शक्ति रूप की पूजा की जाती है|



2. कोल्हापुर महाराष्ट्र


कोल्हापुर महाराष्ट्र क्या जो भी भक्तों की मनोकामना लेकर आता है तो मां की आशीर्वाद से आपकी सारी इच्छा पूरी कर पाता है भगवान विष्णु की पत्नी होने के नाम माता लक्ष्मी के नाम पर रखा गया है|


3.करणी माता का मंदिर

राजस्थान का नाम भारत के अस्तित्व प्राचीनतम चीजों को लेकर काफी अधिक रहता है इस कड़ी में हमारे देश में अनेक प्रसिद्ध मंदिरों से एक करणी माता का मंदिर राजस्थान के बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर जोधपुर रोड पर गांव की सीमा पर स्थित है यह प्राचीन मंदिर बताया जाता है मां करणी देवी मंदिर का धाम है जो करणी माता मंदिर के नाम से जाना जाता है | करणी माता मंदिर के नाम से जाना जाता है लेकिन इसे चूहे वाली मंदिर के नाम से भी जाना जाता है और दुनिया के लोग इसलिए देखते हैं कि आखिर क्यों जाना जाता है|



4. कामाख्या शक्ति पीठ




असम गुवाहाटी के कामाख्या शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से कामाख्या शक्तिपीठ मंदिर का भी अलग है या मंदिर पश्चिम में किलोमीटर दूर नीलांचल पर्वत पर है माता के सभी शक्तिपीठों में से एक कामाख्या शक्तिपीठ को सर्वोत्तम कहा जाता है| माता सती का गुह्वा मतलब योनि भाग गिरा थाउसी से कामाख्या महापीठ की उत्पत्ति हुई| कहा जाता है यहां देवी का योनि भाग होने की वजह से यहां माता रजस्वला होती हैं|




5. ज्वाला देवी मंदिर 


ज्वाला देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश माता का मंदिर है जो पहाड़ों की गोद में बसा हुआ है हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित बसा हुआ है| कांगड़ा जिले में काली धार पहाड़ी के बीच ज्वाला देवी का मंदिर स्थित है मां ज्वाला देवी तीर्थ स्थल को देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ माना जाता है आपको बता दे शक्तिपीठ उस जगह कहा जहा भगवान विष्णु के चक्र से कटकर माता सती के अंग गिरे शास्त्रों के अनुसार ज्वाला देवी में सती सिन्हा गिरी थी और आपको बता दें कि जैसा प्रचलन है ज्वाला देवी मंदिर में जो जो वाला है यानी अखंड ज्योत है मां की शक्ति के अनुसार हमेशा जनती रहती है और करते हैं|



6. अंबाजी मंदिर गुजरात 


अंबाजी मंदिर गुजरात और राजस्थान सीमा पर बना हुआ है माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 12 साल पुराना है इस प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार का काम 1975 से शुरू हुआ था जो कि वर्तमान समय तक चालू है सुमित संगमरमर से बना हुआ यह मंदिर और काफी सुंदर है मंदिर का 103 फुट ऊंचा है मंदिर का 16 फुट ऊंचा है शिखर पर 358 स्वर्ण कलश सुसज्जित है मां अंबा भवानी शक्ति मंदिर की प्रतिमा के भक्तों में अपार श्रद्धा है बताया जाता है कि मंदिर के गर्भगृह में मां की प्रतिमा स्थापित नहीं है लेकिन मां का एक श्री यंत्र स्थापित है इस यंत्र को कहा जाता है कि देखने वाले देखते ही रह जाते हैं यहां पर मां साक्षात विराजी हैं नवरात्र में यहां का पूरा वातावरण भक्तिमय रहता है|




7.काली मंदिर कोलकाता



दक्षिणेश्वरी काली मंदिर दिखा की सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है इसका निर्माण 1847 में हुआ था इसके पीछे एक बड़ी रोचक कहानी है बताया जाता है कि जान बाजार की महारानी राम सैनी ने सपने में देखा था कि मां काली ने उन्हें निर्देश दिया कि वह मंदिर का निर्माण कराएं मंदिर का निर्माण कराया गया यह मंदिर लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में स्थित है और मां काली की मूर्ति स्थापित की गई एक बार काली मंदिर जरूर जाए| नवरात्रि के दिनों में दुर्गा पूजा का अलग ही माहौल काली मंदिर के दौरान देखा जाता है|



8.दुर्गा मंदिर वाराणसी 


दुर्गा मंदिर वाराणसी वाराणसी काशी का नाम जेहन में आते ही अलग से ही धर्म की भावना अंदर से जाग्रत हो जाती है बता दें मंदिर वाराणसी रामनगर में स्थित है माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण बंगाली महारानियां 18वीं सदी के दौरान कराया था यह मंदिर भारतीय वास्तुकला की उत्तर भारतीय शैली का नारा शैली में बनी हुई है इस मंदिर में बना हुआ है दुर्गाकुंड के नाम से जाना जाता है जैसा कि आप सभी जानते हैं कि इस मंदिर में एक वर्गाकार आकृति का तालाब बना हुआ है क्यों कि दुर्गाकुंड के नाम से जाना जाता है यह मंदिर में एक वर्गाकार आकृति का तालाब बना हुआ है जो दुर्गाकुंड के नाम से जाना जाता है| यह इमारत लाल रंग से रंगी हुई है जैसा कि आप सब जानते हैं कि भारत के प्राचीन तत्व या फिर जो भी प्राचीन निशानियां है, लाल रंग से रंग से रंगे हुए ठीक उसी प्रकार से मंदिर में देवी के लाल वस्त्र भी जरूर हैं मान्यता के अनुसार इस मंदिर में स्थापित मूर्ति को मनुष्य द्वारा नहीं बनाया गया है पता ही प्रकट हुई थी जो लोगों की बुरी ताकतों से रक्षा करने आई थी|



9. छत्तीसगढ़ दंतेश्वरी मंदिर


छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्थित दंतेवाड़ा का प्रसिद्ध दंतेश्वरी मंदिर कहा जाता है, ऐसी मान्यता है कि सती का दांत गिरा था|जिसके कारण इस मंदिर का नाम जिसके कारण वर्ष इस मंदिर का नाम दंतेश्वरी परा है|



I

No comments