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Chaitra Navratri 2020 story in hindi दुर्गा पूजा मनाए जाने की वजह




नमस्कार दोस्तों आप सभी स्वागत है हमारे ब्लॉग पर, आप अभी पढ़ रहें है shashiblog.in आज के आर्टिकल में बताएंगे navratri story IN HINDI MEIN 






दुर्गा पूजा यानी नवरात्रि हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों का महत्वपूर्ण फेस्टिवल हैं| हिंदू पंचांग के मुताबिक वर्ष में चार नवरात्रि होती है| 



दो मुख्य नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि होती है गुप्त नवरात्रि का महत्व भी चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्र के बराबर ही होता है| 



खासकर तंत्र मंत्र की साधना करने वाले के लिए गुप्त नवरात्रि खास होती है|अब जानिए चारों नवरात्रि के बारे में विस्तार सेअसाढ़ नवरात्रि- यह असाढ़ महीने में आती है यह गुप्त नवरात्रि जो जून-जुलाई में आता है इसे गायत्री या शाकम्भरी नवरात्रि भी कहा जाता है।

माघ नवरात्रि यह गुप्त नवरात्रि माघ महीने मतलब जनवरी-फरवरी महीने के वक्त आती है।यह नवरात्रि बहुत कम जगहो में मनाया जाता है । उत्तरी भारत कुछ क्षेत्रो में जैसे पंजाब हरियाणा हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड और युपी में इसे मनाते है।चैत्र नवरात्रि

चैत्र नवरात्रि इसे बसंत नवरात्रि कहा जाता है चैत्र महीने शुक्ल पक्ष में आती है इस नवरात्रि में हिंदू पंचांग के मुताबिक नए वर्ष की शुरुआत होती है। यह नवरात्रि मार्च-अप्रैल के महीने में होता है। इसी नवरात्रि में नाम रामनवमी भी मनाया जाता है इसलिए इसे राम नवरात्रि भी कहते हैं। शारदीय नवरात्रि जो रीति रिवाज निभाया जाता है, वैसे ही इस नवरात्रि को भी मनाया जाता है। शारदीय नवरात्रि- ये नवरात्रि बहुत ही महत्वपूर्ण होता है यह नवरात्रि आश्विन शुक्ल पक्ष में पड़ता है एवम नो दिनो तक मनाया जाता है। नवरात्रि के नवरात्रि के दसवें दिन Dussehra मनाया जाता है। उसके 20 दिन बाद दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है शरह महीने आता है इसलिए शारदीय नवरात्रि नवरात्र।वैसे इन सभी नवरात्रि में जो आश्विन मास की नवरात्रि होती है केवल उसी महत्व ज्यादा है। इसी नवरात्रि में कई जगहो माँ दुर्गा सुंदर-सुंदर प्रतिमा बनाकर विराजित की जाती है और उनका विधी पुर्वक पुजन की जाती है।






दुर्गा पूजा मनाए जाने की वजह अलग-अलग है?



मां दुर्गा महिषासुर नामक एक राक्षस का वध किया था| बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक दुर्गा पूजा के त्यौहार को मनाया जाता है| कुछ लोगो मान्यता है|कि वर्ष में 9 दिन होते है जब माँ अपने मायके (पिता के घर से) आती है इसलिए वर्ष 9 दिन उत्सव मनाते हैं।

मां दुर्गा पुजा भारत कई राज्य जैसे बंगाल बिहार बड़ी खुशियों और उल्लास के साथ मनाया जाता है। दुर्गा पूजा फेस्टिवल भारत के अलावा अन्य देशों में भी मनाया जाता है।

वैसे दुर्गा पूजा किसी भी राज्य में हो पर इसके मनाए जाने का वजह कुछ हो इन 9 दिनो में देवी 9 रूपो की पुजा किया जाता है।

एक कथा के अनुसार लंका यूद्ध में ब्रह्माजी ने श्रीराम के रावण रावण-वध के लिएचंडी देवी को प्रसन्न करने को कहा और विधि के अनुसार चंडी देवी की पूजन हवन हेतु दुर्लभ 108 नीलकमल की व्यवस्था भी करवा दी गई|तो वहीं दूसरी तरफ रावण ने भी अमरत्व प्राप्त करने के लिए चंडी पाठ प्रारंभ कर लिया रावण ने मायावी तरीक़े से पूजास्थल पर हवन सामग्री में से एक नीलकमल ग़ायब करा दिया जिससे श्रीराम की पूजा बाधित हो जाए। श्रीराम का संकल्प टूटता नज़र आया। सभी में इस बात का भय व्याप्त हो गया कि कहीं माँ दुर्गा कुपित न हो जाएँ।

उसी समय श्रीराम को याद आया कि उन्हें ..कमल-नयन नवकंज लोचन.. भी कहा जाता है तो क्यों न एक नेत्र को वह माँ की पूजा में समर्पित कर दें। श्रीराम ने जैसे ही तूणीर से अपने नेत्र को निकालना चाहा तभी माँ दुर्गा प्रकट हुईं और कहा कि वह पूजा से प्रसन्न हुईं और उन्होंने विजयश्री का आशीर्वाद दिया।




 Chaitra Navratri - चैत्र नवरात्रि की तिथियां 2020:



  • पहला नवरात्र, प्रथमा तिथि, 25 मार्च 2020, दिन बुधवार


  • दूसरा नवरात्र, द्वितीया तिथि  26 मार्च 2020, दिन बृहस्पतिवार


  • तीसरा नवरात्रा, तृतीया तिथि, 27 मार्च 2020, दिन शुक्रवार


  • चौथा नवरात्र, चतुर्थी तिथि, 28 मार्च 2020, दिन शनिवार


  • पांचवां नवरात्र , पंचमी तिथि , 29 मार्च 2020, दिन रविवार


  • छठा नवरात्रा, षष्ठी तिथि, 30 मार्च 2020, दिन सोमवार

  • सातवां नवरात्र, सप्तमी तिथि , 31 मार्च 2020, दिन मंगलवार


  • आठवां नवरात्रा , अष्टमी तिथि, 1 अप्रैल 2020, दिन बुधवार


  • नौवां नवरात्र नवमी तिथि 2 अप्रैल, 2020 दिन बृहस्पतिवार


नवरात्रि मां दुर्गा के नौ रूपों की कहानी 


माता शैलपुत्री

पहले दिन मां के शैलपुत्री रूप के पूजा की जाती है यह मां का ही एक रूप में वृषभ पर विराजमान है। उनके एक हाथमें त्रिशूल और दुसरे हाथ में कमल फुल है। मान्यता यह कि माता दुर्गा के इस रूप की पुजा अच्छी सेहत के लिए विशेष लाभकारकहै।

माता ब्रांहमचारिणी


 दुसरा दिन माँ ब्रांहमचारिणी की पुजा होता है, माता ने अपने इस रूप से भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या कि थी। देवी नहीं देवी ने अपने इस रूप में एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में जप की माला धारण किए हुए है। इस दिन माता को शक्कर का भोग लगाया जाता है तथा इस दिन का पुजन दीर्घ आयु प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

माता चंद्रघंटा
 तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा की  है बताया जाता है कि यह देवी का उग्र रूप है।भक्तों को सभी कष्टों को मुक्ति मिलती है। माँ मां के इस रूप में 10 हाथ है सभी हाथों में माँ ने शस्त्र धारण किए हुए हैं यह देखकर ऐसा लगता है माँ युद्ध के लिए तैयार हैं।

माता कृषमांडा


 चौथा दिन देवी कृषमांडा के पूजन का ऐसा कहा जाता है कि माता के इस रूप में हसी से ब्रहमांड की शुरुआत हुई थी। देवी के इस रूप में आठ हाथ और उन्होंने इन हाथों हाथ से कमंडल धनुष कमल अमृत कलश चक्र तथा गदा लिए हुए।  माता के आठवें हाथ में इच्छा मुताबिक वरदान प्रदान करती है।

 माता स्कंदमाता 


माँ दुर्गा में पाचवे दिन देवी के इस रूप की पुजा की जाती है। माता के इस रूप से मां के भक्तों को पापों से मुक्ति मिलती है तथा मोक्ष की प्राप्ति होता है। नवरात्रि के दिन माता स्कंदमाता को अलसी नामक ओषधि अर्पण करने से मौसम में होने वाली बिमारी नहीं होती और इंसान स्वस्थ रहे। माँ के इस रूप में माता कमल पर विराजमान है। माता अपने इस  रूप में 4 भुजाओ वाली है वे अपने 2 हाथो में कमल लिए हुए हैं, एक हाथ में माला लिए हुए हैं तथा एक हाथ भक्तों को आशीर्वाद दे रही है।

माता कात्यानि

छठे दिन देवी के रूप की पूजा की जाती है देवी के इस रूप को कत्यानि ऋषि ने घोर तपस्या से प्राप्त किया था तथा देवी ने अपने इसी रूप में महिशासुर का वध किया था। बताया जाता भागवान श्री कृष्ण को अपने पति के रूप में पाने के लिए गोपियो ने देवी के इसी रूप की पुजा की थी। मगर कोई  लड़की देवी के रूप की पूजा करे तो विवाह में आने वाली सभी बाधाएं दूर होगी। और उसे मनचाहा वर भी मिलेगा।

माता कालरात्रि 

सातवें दिन देवी के रूप की पूजा की जाती है परंतु कई लोग देवी के कालरात्रि रूप को कालिका देवी समझ लेते है। पर ऐसा नही दोनो ही माँ अलग-अलग रूप है। यह देवी की बहुत ही भयानक रूप है। देवी अपने इस रूप में एक हाथ में त्रिशूल और एक में हाथ में खड़ग लिए है। देवी ने अपने गले में भी खडगो की माला पहनी हुई है।देवी इस रूप मैं पुजा सभी विध्वंस शक्तियो का नाश करती है।

माता महागौरी


आठवे दिन माता गौरी की पुजा विधान है।यह  माता की बहुत ही सौम्य सरल तथा सुंदर रूप है। माता अपने रूप में वृषभ पर विराजमान है। माता के हाथों में त्रिशूल और डमरू लिया हुआ है। अनु दो हाथों से माता अपने भक्तों को वरदान और अभयदान दे रही है। मान्यता है कि माता के स्वरूप को भगवान शिव ने गंगाजल से अभिषेक किया था। इसलिए गौर वर्ण प्राप्त हुआ है।

माता सिध्दीदात्री


नौवे दिन देवी सिध्दीदात्री की पुजा की जाती है। इन्ही के पुजन से दुर्गा पुजा खत्म हो जाती है। तथा भक्तों को समस्त सिद्धि मिलती है। माता के इस रूप में माता के 4 हाथ है इन चारो हाथो में माता ने शंख चक्र गदा तथा कमल लिया हुआ है ।





देश के विभिन्न भागों में नवरात्रि के महत्व Importance of Navratri in different parts of the country.


पंजाब में नवरात्रा कहते हैं जहां पर पहले 7 दिन उपवास रखते है|अष्टमी के दिन अष्टमी के दिन व्रत तोड़ते हैं|कन्याओं को भोजन करवाते हैं और उत्तर भारत में नवरात्रि के अवसर पर रामलीला का भी आयोजन होता है|

 गुजरात मुंबई में नवरात्रि का मतलब होता है गरबा डांस डांडिया डांडिया डांस का भी आयोजन हर जगह किया जाता है|गुजरात में तो अब सरकार भी नवरात्रि की सेलिब्रेशन आयोजन करते हैं जहां देश-विदेश से लोग आते हैं और गरबा और डांडिया डांस का मजा लेते हैं और करते भी|



महाराष्ट्र में कलश स्थापना का विशेष महत्व है लोग नवरात्रि से पहले इसकी तैयारी करते हैं

बिहार और बंगाल में नवरात्रि के दौरान बड़े-बड़े पंडाल बनाए जाते हैं इन इलाकों में दुर्गा पूजा के नाम से जाना जाता हैपंडालों में मां दुर्गा के प्रतिमा को स्थापित करके दुर्गा पूजा का उत्सव मनाया जाता है |

दुर्गा पूजा का उत्सव भारत के अन्य राज्यों में भी मनाया जाता है| भारत में अनेकता में एकता देखने को मिलती उसी प्रकार देवी की पूजा जिस किसी भी रूप में हो सब का मकसद एक ही रहता है सबकी कामना ही रहती थी देवी को प्रसन्न करके मनोवांछित वरदान कैसे पाया जाए या अपने कष्ट को कैसे दूर किया जाए|

शारदीय नवरात्रि शक्ति-पर्व क्यों कहते है

ब्रह्माजी के आदेश पर देवों ने दिनों तक मां पार्वती को प्रसन्न किया और उनसे असुरों के संहार का वचन लिया। असुरों के नाश का पर्व है नवरात्रि। असुरों के संहार के लिए देवी ने रौद्र रूप धारण किया था इसीलिए शारदीय नवरात्रि शक्ति-पर्व के रूप में मनाया जाता है।












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